Saturday, August 15, 2026
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कर्नाटक चुनाव : राहुल और सिद्धारमैया के सामने पस्त हुए मोदी

आज का ब्लॉग मेरा कर्नाटका चुनाव।

कर्नाटक विधानसभा के सभी 224 निर्वाचन क्षेत्रों में 12 मई 2018 को कर्नाटक में एक चुनाव आयोजित किया जाएगा। वोटों की गिनती और परिणाम की घोषणा 15 मई 2018 को होगी। कर्नाटक का चुनाव हमारे देश की राजनीति का वो मोड़ या बिंदु बनता जा रहा है जहां से एक नए परिवर्तन की शुरूआत होती है।परिवर्तन की ये प्रक्रिया साल 2013 में ही शुरू हो चुकी थी जहां पर दोबारा उठ खड़े होने की कोशिश करने वाली कांग्रेस पार्टी और जिद्दी व उद्दंड बन चुकी, किसी की भी बात को न सुनने वाली बीजेपी का एक मोड़ पर मिलान हो रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों जोर-शोर से कर्नाटक विधान सभा चुनाव के प्रचार में लगे हुए हैं। शुक्रवार 04 मई को उन्होंने गुलबर्गा के कलगी में जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले साल यानी 2019 में जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनेगी तो देशभर के किसानों का कर्जा 10 दिनों के अंदर माफ कर दिया जाएगा। उन्होंने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसानों के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया और कहा कि मोदी जी ने कर्नाटक के किसानों को एक रुपये की भी मदद नहीं की, जबकि कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक के किसानों का करीब 8000 करोड़ रुपया कर्जा माफ किया था। राहुल गांधी ने कहा कि हमारी लड़ाई कर्नाटक की जनता का पैसा दिलवाने की लड़ाई है. बीजेपी के लोग आपका पैसा छीनते हैं नीरव मोदी, रेड्डी ब्रदर्स को देते हैं. 4 साल में मोदी जी ने किसानों का एक रुपया माफ नहीं किया, अब एक साल बचा है और वो एक रुपया माफ नहीं करेंगे। राहुल ने कहा कि पूरे देश के बिजनेस बंद हो गये लेकिन अमित शाह का पुत्र 50 हजार को तीन महीने में 80 करोड़ रुपये में बदल देता है, नाक के सामने चोरी हो रही है लेकिन मोदी जी एक शब्द नहीं कहते. उनके मंत्री पीयूष गोयल देश को नहीं बताते कि उनकी कंपनी है, छुपाते हैं और फिर उसको बेच देते हैं; करोड़ों रुपया कमाते हैं लेकिन नरेन्द्र मोदी जी एक शब्द नहीं कहते। जब मोदीजी बौखला जाते है तो दूसरों पे हमला करते है ।

पीएम और यूपी सीएम के हमलों के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये. सिद्धारमैया ने मोदी पर हमला करते हुए कहा कि पीएम को यह शोभा नहीं देता कि सिर्फ चुनाव जीतने के लिए वह बेंगलुरु और उसकी जनता का अपमान करें।

पीएम मोदी ने कर्नाटक में अपनी चुनाव रैलियों के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष पर जोरदार हमला बोला था। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ उन्हें मेरे बारे में जो बोलना है, बोलने दें, चाहे वह गलत हों या सही, उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. राहुल गांधी ने 12 मई को होने वाले प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्रचार तेज करते हुए कहा, ‘‘ वह भारत के प्रधानमंत्री हैं और मैं उन पर व्यक्तिगत हमले नहीं करूंगा. मैं भारत में रहता हूं और वह भारत के प्रधानमंत्री हैं, इसलिए मैं उन पर कभी भी व्यक्तिगत हमला नहीं करूंगा।

दरअसल, नरेंद्र मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव में वादा किया था कि अगर वो सत्ता में आए तो किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के मुताबिक, न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत से 50% बढ़ाकर देंगे। लेकिन सत्ता में आए प्रधानमंत्री मोदी को चार साल से ज़्यादा हो गए हैं लेकिन वो अभी भी अपना वादा पूरा नहीं कर पाए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर चुनाव के लिए अपनी पद की गरीमा का ध्यान ना रखते हुए लोगों के सामने झूठ बोल दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और पूर्व रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने जनरल थिमाय्या का 1948 में पाकिस्तान से जंग जीतने का बाद अपमान किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्नाटक बहादुरी का पर्याय बन गया है। लेकिन, कांग्रेस सरकार ने फील्ड मार्शल करिप्पा और जनरल थिमाय्या से किस प्रकार का बर्ताव करते थे? प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास इसका सबूत है। 1948 में पाकिस्तान से जंग जीतने के बाद भी पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और पूर्व रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने जनरल थिमाय्या का अपमान किया। अब लोग सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को झूठ ना बोलने और गलत जानकारी देने कि सलाह दे रहे हैं। दरअसल, कृष्णा मेनन 1958 में रक्षा मंत्री बने थे और पीएम मोदी ने 1948 में पाकिस्तान से जंग जीतने के बाद अपमान की बात कही।

दूसरी तरफ राज्य चुनाव के लिये प्रचार करने आए यूपी के मुख्यमंत्री अदित्यनाथ पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जिस तरह से ट्वीटों के माध्यम से वार किया उसके बाद तिलमिलाए आदित्यनाथ कर्नाटक छोड़ यूपी भाग आए।

वही कांग्रेस के स्टार प्रचार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने Pm मोदी को सलाह देते हुए कहा कि अगर किसानों का ऋण माफ करना सीखना है तो वो सोनिया गाँधी और सिद्धारमैया जी से सीखें। यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राजब्बर ने भी कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में बड़ा रोड-शो किया।

ब्लॉग काफी बड़ा हो गया इसलिये बाकी बाते अगले ब्लॉग में बताऊंगी।

✍शिल्पी सिंह

मोदीजी के कुछ बेहतरीन चुनिदा जुमले

आज का ब्लॉग मैं मोदीजी के जुमले के ऊपर से लिख रही हूँ।

मोदीजी ने सदा ही बडे-बडे जुमले दिए है जनता के बीच जाके। कुछ लोगों की टीम तैयार करती है जुमले, जो नरेंद्र मोदी की जुबां से निकलते ही हो जाते हैं मशहूर। इस टीम के मुख्य सदस्य हैं :-

1. जगदीश ठक्कर,
2. यश गांधी और नीरव के. शाह
3. हिरेन जोशी (ओएसडी-आईटी
4. प्रतीक दोषी (ओएसडी- रिसर्च एंड स्ट्रैटजी)

आइये उनके 2014 के चुनाव से अब तक मुख्य जुमलो पर नजर डालते हैं।

56इंच का सीना :

2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश की एक रैली में कहा था कि उत्तर प्रदेश को गुजरात बनाने के लिए 56 इंच का सीना चाहिए। उनके इस जुमले को लेकर आज तक विपक्षी पार्टियां उससे सवाल करते है और सोशल मीडिया पर मजाक बनाया जाता है।

हर खाते में 15 लाख :

2014 के अपने चुनावी प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश से कालाधन वापस लाने का वादा किया था। साथ ही कहा था कि हर भारतीय के खाते में 15-15 लाख रुपये भी आयेंगे। पीएम के इस जुमले को लेकर विपक्ष के साथ देश की जनता भी प्रधानमंत्री से सवाल करती है।

गधे की तरह काम करने वाला पी एम और यूपी का गोद लिया बेटा :

उत्तर प्रदेश की एक रैली में मोदी ने खुद को गधे के तरह काम करने वाला Pm बताया था। जबकि एक और रैली में पीएम मोदी ने खुद को यूपी का गोद लिया बेटा बताया था। उन्होंने कहा कि यूपी ने मुझे गोद लिया है और यूपी मेरा माईबाप है। मैं माईबाप को नहीं छोड़ूगा। मैं भले ही गोद लिया हूं, लेकिन यूपी की चिंता है मुझे। प्रधानमंत्री मोदी के इस जुमले पर विपक्ष ने उन्हें जम के घेरा था।

मै बनारस का बेटा मुझे गंगा मां ने बुलाया है :

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसद क्षेत्र में जाकर कहा था कि मैं बनारस का बेटा हूं और मुझे गंगा मां ने बुलाया है। मोदजी के इस जुमले को लेकर आज भी लोग उनसे सवाल करते है।

अच्छे दिन आने वाले हैं :

यह जुमला ने मोदीजी का ही नहीं बल्कि पुरी बीजेपी पार्टी का मुख्य जुमला है। हर किसी की जुवा पे है कि अच्छे दिन आने वाले है।

बहुत हुआ भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार :

बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने के लिए बहुत हुआ भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार जुमले का जम का प्रयोग किया था। लोगो की जुबा पे भी खूब चढ़ा था ये जुमला।

सबका साथ सब का विकास :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह सबसे मुख्य जुमलों में से एक जुमला रहा है। मोदीजी के इस जुमले को लेकर देश की जनता ने विश्वास दिखा।

मैं आपसे वादा करता हूं। अगर आप 12 घंटे काम करेंगे तो मैं 13 घंटे काम करुंगा। अगर आप 14 घंटे काम करेंगे तो मैं 15 घंटे काम करुंगा। क्यों? क्योंकि मैं प्रधानमंत्री नहीं बल्कि एक प्रधानसेवक हूं।” ये भी जुमला था।

इसके अलावा और मुख्य जुमले हैं :

मेरी राजनीति का एक ही रास्ता है, मेरी राजनीति का एक ही मकसद है, मेरी राजनीति का एक ही मंत्र है…और वो मंत्र है विकास।”

“हिंदुस्तान को अगर आगे बढ़ना है, तो हिंदुस्तान में गांव को आगे बढ़ाना पड़ेगा। गांव को अगर आगे बढ़ना है तो किसान को आगे बढ़ाना पड़ेगा।”

इन तमाम जुमलों में से मोदीजी का एक भी जुमला पूरा नही हुआ। जनता को आज भी इंतजार है कि कोई एक जुमला थो मोदीजी पूरा कर दे।

अब तक आपने सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारें में ही सुना है कि, नरेंद्र मोदी फेकू है। उनके भक्त भी बहुत बड़े वाले फेकू भक्त है। इस तरह के वादों से देश की जनता को दिए गए लेकिन मोदी सरकार को 4 साल हो चुके है लेकिन अभी तक मोदी जी ने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया है।

अमित शाह ने तो खुलकर ऐलान भी कर दिया है कि, 15 लाख रूपये का इंतजार मत करें, क्योंकि वह तो सिर्फ एक चुनावी जुमला ही था।

जैसे-जैसे मोदी जी के वादों की पोल खुलती गई वैसे-वैसे देशभर में मोदी जी फेकू नाम से मशहूर होने लगे। गूगल पर भी फेकू नाम से बहुत सर्च किया जाता है जिसमें सर्च करने पर सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के बारें में ही आता है।

ऐसी बहुत सी बातें और जुमले है जो बता नही सकते मेरे से जितना हुआ मोदीजी के जुमले शेयर किया। अगले ब्लॉग में नया कुछ लेके आऊँगी।

✍ सिंह शिल्पी

राजीव की गाथा

श्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को बम्बई में हुआ था।

वे सिर्फ तीन वर्ष के थे जब भारत स्वतंत्र हुआ और उनके दादा स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। उनके माता-पिता लखनऊ से नई दिल्ली आकर बस गए। उनके पिता फिरोज गांधी सांसद बने एवं जिन्होंने एक निडर तथा मेहनती सांसद के रूप में ख्याति अर्जित की।

40 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाले श्री राजीव गांधी भारत के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री थे। और संभवतः दुनिया के उन युवा राजनेताओं में से एक हैं जिन्होंने सरकार का नेतृत्व किया है। उनके महान नानाजी पंडित जवाहरलाल नेहरू 58 वर्ष के थे जब उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में 17 साल की लंबी पारी शुरू की थी।

देश में पीढ़ीगत बदलाव के अग्रदूत श्री गांधी को देश के इतिहास में सबसे बड़ा जनादेश प्राप्त हुआ था। 1984अपनी मां की हत्या के शोक से उबरने के बाद उन्होंने लोकसभा के लिए चुनाव कराने का आदेश दिया। उस चुनाव में कांग्रेस को पिछले सात चुनावों की तुलना में लोकप्रिय वोट अधिक अनुपात में मिले और पार्टी ने 508 में से रिकॉर्ड 401 सीटें हासिल कीं इस तरह की शानदार शुरुआत किसी भी परिस्थिति में उल्लेखनीय मानी जाती है। यह इसलिए भी अद्भुत है क्योंकि वे उस राजनीतिक परिवार से संबंधित थे जिसकी चार पीढ़ियों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एवं इसके बाद भारत की सेवा की थी, इसके बावजूद श्री गांधी राजनीति में अपने प्रवेश को लेकर अनिच्छुक थे एवं उन्होंने राजनीति में देर से प्रवेश भी किया।
राजीव गांधी ने अपना बचपन अपने दादा के साथ तीन मूर्ति हाउस में बिताया जहाँ इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री की परिचारिका के रूप में कार्य किया। वे कुछ समय के लिए देहरादून के वेल्हम स्कूल गए लेकिन जल्द ही उन्हें हिमालय की तलहटी में स्थित आवासीय दून स्कूल में भेज दिया गया। वहां उनके कई मित्र बने जिनके साथ उनकी आजीवन दोस्ती बनी रही। बाद में उनके छोटे भाई संजय गाँधी को भी इसी स्कूल में भेजा गया जहाँ दोनों साथ रहे।
स्कूल से निकलने के बाद श्री गाँधी कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए लेकिन जल्द ही वे वहां से हटकर लन्दन के इम्पीरियल कॉलेज चले गए। उन्होंने वहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
यह तो स्पष्ट था कि राजनीति में अपना करियर बनाने में उनकी कोई रूचि नहीं थी। उनके सहपाठियों के अनुसार उनके पास दर्शन, राजनीति या इतिहास से संबंधित पुस्तकें न होकर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग की कई पुस्तकें हुआ करती थीं। हालांकि संगीत में उनकी बहुत रुचि थी। उन्हें पश्चिमी और हिन्दुस्तानी शास्त्रीय एवं आधुनिक संगीत पसंद था। उन्हें फोटोग्राफी एवं रेडियो सुनने का भी शौक था।

हवाई उड़ान उनका सबसे बड़ा जुनून था। उन्होंने दिल्ली फ्लाइंग क्लब की प्रवेश परीक्षा पास की एवं वाणिज्यिक पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया। जल्द ही वे घरेलू राष्ट्रीय जहाज कंपनी इंडियन एयरलाइंस के पायलट बन गए।

कैम्ब्रिज में उनकी मुलाकात इतालवी सोनिया मैनो से हुई थी जो उस समय वहां अंग्रेजी की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने 1968 में नई दिल्ली में शादी कर ली। वे अपने दोनों बच्चों, राहुल और प्रियंका के साथ नई दिल्ली में श्रीमती इंदिरा गांधी के निवास पर रहे। आस-पास राजनीतिक गतिविधियों की ऐसी हलचल के बावजूद वे अपना निजी जीवन जीते रहे।

लेकिन 1980 में एक विमान दुर्घटना में उनके भाई संजय गाँधी की मौत ने सारी परिस्थितियां बदल कर रख दीं। उनपर राजनीति में प्रवेश करने एवं अपनी माँ को राजनीतिक कार्यों में सहयोग करने का दवाब बन गया। ना चाहते हुए भी उनको राजनीति में आना पढ़ा अपनी माँ इंदिराजी के लिए।गांधी से ज्यादा दुखद एवं कष्टकर परिस्थिति में कोई सत्ता में क्या आ सकता है जब 31 अक्टूबर 1984 को अपनी मां की क्रूर हत्या के बाद वे कांग्रेस अध्यक्ष एवं देश के प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन व्यक्तिगत रूप से इतने दु:खी होने के बावजूद उन्होंने संतुलन, मर्यादा एवं संयम के साथ राष्ट्रीय जिम्मेदारी का अच्छे से निर्वहन किया।21 मई, 1991 की रात दस बज कर 21 मिनट पर तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में ऐसा ही हुआ. तीस साल की एक लड़की चंदन का एक हार ले कर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की तरफ़ बढ़ी. जैसे ही वो उनके पैर छूने के लिए झुकी, कानों को बहरा कर देने वाला धमाका हुआ।श्रीपेरंबदूर में उस भयंकर धमाके के समय तमिलनाडु कांग्रेस के तीनों चोटी के नेता जी के मूपनार, जयंती नटराजन और राममूर्ति मौजूद थे. जब धुआँ छटा तो राजीव गाँधी की तलाश शुरू हुई. उनके शरीर का एक हिस्सा औंधे मुंह पड़ा हुआ था।इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव रहे पीसी एलेक्ज़ेंडर ने अपनी किताब ‘माई डेज़ विद इंदिरा गांधी’ में लिखा है कि इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ घंटों के भीतर उन्होंने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट के गलियारे में सोनिया और राजीव को लड़ते हुए देखा था.सात वर्ष बाद राजीव के बोले वो शब्द सही सिद्ध हुए थे।स्वभाव से गंभीर लेकिन आधुनिक सोच एवं निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता वाले श्री गांधी देश को दुनिया की उच्च तकनीकों से पूर्ण करना चाहते थे और जैसा कि वे बार-बार कहते थे कि भारत की एकता को बनाये रखने के उद्देश्य के अलावा उनके अन्य प्रमुख उद्देश्यों में से एक है –इक्कीसवीं सदी के भारत का निर्माण।

महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मोदी महिलाओं का इज्जत करना सीखें

भारत की सभ्यता संस्कृति जो विश्व भर में पहचानी गई है उसमें महिलाओं का सम्मान और महिलाओं को लेकर इज्जत ऐसा माना गया है कि यह विश्व में कहीं नहीं है।

मगर नई संस्कृति जो भारत में उभर रही है जिसको कहीं ना कहीं भारतीय सरकार का समर्थन प्राप्त है वह अब महिलाओं का सम्मान इज्जत करने के बजाए उनको अपमानित करने में अधिक विश्वास रख रही है और यह हो भी क्यों ना जब देश का प्रधानमंत्री महिलाओं पर ऊंची अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी करें तो फिर उनके समर्थक उनके विधायक उनके सांसद ऐसी टिप्पणी करते हैं तो इसमें किसी को आपत्ति क्यों हो जाएगी ?

क्योंकि कहा जाता है कि देश का राष्ट्रपति प्रधानमंत्री या किसी राज्य का मुख्यमंत्री देश और राज्य को एक दिशा देता है अपने भाषणों से अपने विचारों से अपने आने वाले कार्यों से लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में लगातार महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है अभी हाल ही में कर्नाटक चुनाव के प्रचार में पहुंचे नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से सोनिया गांधी के विदेशी होने पर आपत्तिजनक टिप्पणी की वह भी उनकी मानसिकता को दर्शाता है राहुल गांधी अपने भाषणों में इस बात का जिक्र करते हैं कि rss महिला विरोधी मानसिकता को आगे बढ़ाती है और यह बात कहीं ना कहीं सच साबित होती है जब RSS की शाखा से निकले हुए विधायक और सांसद महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं यहां तक कि Rss से जुड़ी संस्था और नेतागण बलात्कार जैसे संगीन जुर्म को भी सही ठहराने में और उनके समर्थन में रैली निकालने से भी नहीं चूकते हैं चाहे वह कठुआ का मामला हो उन्नाव का मामला हो या फिर हरियाणा राजस्थान बिहार जैसी जगहों पर नेताओं का टिप्पणी हो महिलाओं को लेकर लगातार नरेंद्र मोदी ने जो टिप्पणी की है उसमें अगर हम कहें तो महिलाओं का अचार बेचने वाला टिप्पणी या फिर शशि थरूर जी के दिवंगत पत्नी सुनंदा पुष्कर को 50 लाख की गर्लफ्रेंड का नाम देना या फिर अन्य जगहों पर महिलाओं को लेकर ऐसे बयान दे देना जिससे महिलाओं को कहीं न कहीं असहज महसूस होता है जैसे कुछ दिन पहले कांग्रेस के एक सांसद को पीएम ने राक्षस से तुलना किया था। नरेंद्र मोदी के साथ RSS की शाखाओं में बताए गए सिद्धांतों के कारण होता है। मगर देश और विदेश में इसका गलत संदेश जाता है कि कहीं ना कहीं भारत महिलाओं से घृणा करने वाला और महिलाओं के लिए असुरक्षित देश हो गया है। जिस देश को लक्ष्मीबाई इंदिरा गांधी सरोजिनी नायडू जैसी महिलाओं ने कहीं ना कहीं संजोया आगे बढ़ाया उसके लिए शहादत दी उस देश में महिलाओं के खिलाफ जिस तरह से एक नया विचारधारा उत्पन्न हो रहा है उसके लिए कहीं न कहीं भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम्मेवार हैं क्योंकि जिस तरह से भाजपा के नेता लगातार विरोधी दलों के महिला नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं वह प्रधानमंत्री के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं है कहीं ना कहीं उनको उनका पूरा आशीर्वाद और सहयोग प्राप्त है।

ऐसे में अब महिलाओं को भी जो देश की आधी आबादी लोकतंत्र में आधी संख्या में मतदाता होने के कारण सोचना चाहिए कि क्या वह एक ऐसे नेता को चुनेगी या फिर ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाएगी जिस का एकमात्र काम महिलाओं का अपमान करना है महिलाओं को खुद सोचना होगा कि क्या वह एक ऐसे दल को ऐसे संस्थान को मदद करेगी जिसका प्राथमिक काम महिलाओं का अपमान करना है। RSS की विचारधारा के बारे में राहुल गांधी ने साफ कहा है कि यह महिला विरोधी संस्था है इसमें महिलाओं को कोई हक नहीं दिया जाता है आप भाजपा के नेताओं के बयान सुनिए उनके बयान में साफ झलकता है कि महिलाओं को या तो वह घरेलू कार्य करने वाली समझते हैं या फिर सिर्फ उनको पाबंदियों में जकड़ा हुआ समझते हैं उनके नजर में महिलाओं का कोई हक या कोई कार्य नहीं होता है इसलिए ऐसे में महिलाओं को आगे आकर अपने हक के लिए आवाज उठानी होगी और जो नेता उनके खिलाफ टिप्पणी करते हैं उनको सबक सिखाना होगा।

राहुल गाँधी का दो दिवसीय कर्नाटक दौरा आज से, मोदी को मिलेगा करारा जबाब

कर्नाटक चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है वैसे वैसे कर्नाटक में राष्ट्रीय नेताओं का जमावड़ा लगता जा रहा है पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कई दौरा और उसके बाद भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय प्रचार और अमित शाह का इसी बीच कई चरणों में में प्रचार करना अपने आप में कर्नाटक चुनाव के महत्व को दर्शाता है।

इसी चरण में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी आज से दो दिवसीय कर्नाटक दौरे पर जन आशीर्वाद यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए जा रहे हैं यात्रा के पहले दिन वह कर्नाटक के बीदर जिला के आसपास कई जनसभाओं को संबोधित कर वोटरों को कांग्रेस के उम्मीदवारों को वोट देने के लिए कहेंगे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद यह राहुल गांधी का पहला दौरा है।

राहुल गांधी को ना सिर्फ अपनी बात कहनी है बल्कि नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए सवालों का भी उन्हें जवाब देना होगा ताकि जनता को यह विश्वास रहे कि नरेंद्र मोदी जी ने जो बात कहा वह कहीं ना कहीं सिर्फ जुमला और राजनीति से प्रेरित बातें थी चाहे वह 15 मिनट बोलने की बात हो या फिर कर्नाटक सरकार के 5 साल के कार्यकाल का वर्णन करने की बात हो हर मुद्दे पर आज राहुल गांधी बोलेंगे और क्योंकि पिछले 5 सालों में कांग्रेस सरकार ने कई योजनाओं को पूरा किया है और कई नई योजना की शुरुआत की है इसलिए राहुल गांधी को कहीं दिक्कत नहीं होने जा रही है मगर सिद्धारमैया ने नरेंद्र मोदी पर वार करते हुए येदुरप्पा के शासन के 5 सालों का काम कार्य का लेखा-जोखा बताने को कहा है। वो BJP के लिए परेशानी बन रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि आज राहुल गांधी पहले दिन और कल दूसरे दिन कैसे जनता को कांग्रेस के प्रति आकर्षित करते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि कांग्रेस की सरकार पुनः बनती है तो प्रदेश का विकास सतत आगे बढ़ता रहेगा।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम से भाजपा की बेचैनी बढ़ी हुई है, नए पद में नए तेवर में दिख रहे सिंधिया :

मध्यप्रदेश की राजनीति भारतीय जनता पार्टी के लिए 15 सालों से सुखद बनी हुई है। कारण चाहे कुछ भी रहा हो शायद कांग्रेस की गुटबाजी या फिर शिवराज सिंह और भाजपा का राजनीतिक प्रबंधन लेकिन भाजपा 3 बारो से जीत दर्ज करते आ रही है।

मगर 2018 का चुनाव लग रहा है भाजपा के लिए मुश्किल बन सकती है क्योंकि जिस तरह से कांग्रेस ने कमलनाथ और ज्योतिराज सिंधिया का एक नया राजनीतिक समीकरण बनाते हुए प्रदेश की बागडोर सौंपी है उससे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नया ऊर्जा आ गया है कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ जनता को भी एक उम्मीद हो गई है कि ज्योतिराज सिंधिया जैसा आक्रमक नेता जो जनता से जुड़े हुए मुद्दों पर काफी आक्रमक होकर सरकार के खिलाफ और जनता के साथ रहता है वह कहीं ना कहीं भाजपा और शिवराज सिंह की इस कुशासन को हरा सकता है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का युवाओं के साथ साथ हर वर्ग में जिस तरह से पकड़ है उसका फायदा निश्चित तौर पर कांग्रेस को होगी ज्योतिराज सिंधिया ने अटेर मुंगावली और कोलारस चुनावों में भी यह बात दिखा दिया था कि अगर ठीक ढंग से एकजुटता के साथ चुनाव लड़ते हैं न सिर्फ शिवराज सिंह की हार होगी बल्कि कांग्रेस मजबूती से पूरे प्रदेश में अपना सरकार बना सकती है मध्य प्रदेश में पिछले कई उपचुनाव और निकाय चुनाव में ज्योतिराज सिंधिया,अरुण यादव, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अजय सिंह की एकजुटता के कारण कांग्रेस जीत दर्ज करते जा रही है जिससे ना सिर्फ कांग्रेस का जनाधार बढ़ रहा है बल्कि भाजपा का बेचैनी भी बढ़ता चला जा रहा है।

ऐसे में ज्योतिराज सिंधिया को 2018 के चुनाव के लिए चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाना कहीं ना कहीं कांग्रेस के आने वाले रणनीति का साफ झलक है। कांग्रेस कहीं ना कहीं 2018 में ज्योतिदित्य सिंधिया के चेहरों पर चुनाव लड़ना चाह रही है।

भले कांग्रेस अभी इस बात का ऐलान नहीं कर रही हो लेकिन भाजपा अब जिस तरह से सिंधिया के खिलाफ चुनाव लड़ने जैसा माहौल बनाने लगी है और सोशल मीडिया पर वो जिस तरह से वह दिखा रही है वह बता रहा है कि वह सिंधिया के नए तेवर और नए पद से बेचैन हैं उसे कहीं ना कहीं लगने लगा है कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में अच्छा कर रही है और इसी तरह आगे बढ़ती रही तो निश्चित तौर पर 2018 में कांग्रेस सरकार बना लेगी।

सरकार की गुलामी कर देश को सत्ता का गुलाम बना रही गोदी मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ नही रही है :

एक अरब की आबादी वाले बेमिसाल मुल्क हिन्दुस्तान के ये पांच पचीस एंकर ग़ुलाम हो चुके हैं। इनकी आज़ादी की दुआ कीजिए। इनके मालिकों की आज़ादी की दुआ कीजिए। ये हाथ में तिरंगा लेकर आपसे दिन रात झूठ बोल रहे हैं। तिरंगे की शान को हर दिन कम कर रहे हैं। जिस तिरंगे को लहराने के लिए लोग सीने पर गोलियां खा गए, उस तिरंगे को हाथ में लेकर ये टीवी चैनल के एंकर सत्ता की खुशी के लिए आपसे झूठ बोल रहे हैं। भारत में मुख्यधारा की मीडिया का कभी इतना स्तर नहीं गिरा, जितना आजकल गिरा हुआ है. मीडिया लगभग समाज विरोधी हो चुका है. वह सत्ता की भाषा बोलता है. मीडिया एक तरह से सरकार-सत्ता का प्रवक्ता बन गया है. वह सत्ता की सुंदर तस्वीर गढ़ने में व्यस्त रहता है.
वक्त बदल चुका है। खबरों की दुनिया में इंटरनेट और सोशल मीडिया का इतना बोलबाला हो गया है कि यह पहचान कर पाना मुश्किल है की कौन सी खबर सच्ची है झूटी है।
पत्रकारिता जगत में एक वाक्य अक्सर सुना जाता था, ‘यह प्रोपेगंडा है, खबर नहीं’। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। खबरों की दुनिया में सोशल मीडिया ने हर किसी को जुबान दे दी है’। यह इसका लोकतांत्रिक पहलू है। लेकिन यह भी सच है कि सोशल मीडिया अफवाहों और फर्जी खबरों का वाहक बन गया है। और हर बात को बड़ा चढ़ा कर सत्ता पार्टी के पक्ष में रात-दिन झूट बोलना।ऐसा लगता है कि मीडिया, खासकर टेलीविजन झूठ को छुपाने में सरकार के लिए एक अभेद कवच का काम कर रहा है। वो सारे लोग, जिन्हें इस स्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमें कहां-कहां मात मिल रही है, इन सबको नजरअंदाज कर ऐसा माहौल बनाने में लगे हैं कि हम सर्वशक्तिमान हैं और रोज पाकिस्तान को और चीन को पीट रहे हैं। पाकिस्तान और चीन को पीटते देख आम भारतीय के मन में एक सुखद अनुभूति पैदा होती है। सरकार को भी ऐसी अनुभूति पैदा करने में कोई हिचक नहीं महसूस हो रही है। फेसबुक पर जिन्हें हम भक्तगण कहते हैं, वो तो पागलों की तरह देश को बेवकूफ बनाने के अपने राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। शायद यही उनके लिए राष्ट्रधर्म है और यही उनका राष्ट्रप्रेम है। मानो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन्हें सीधे सारी सच्चाई बताई हो। अगर सीएजी रिपोर्ट जैसी कोई सच्चाई सामने आती है, तब ये कह देते हैं कि ये कांग्रेस ने करवाया है। इस समय भारतीय जनता पार्टी के नियंत्रण में पूरा देश है इसके बावजूद फेसबुकिये भक्त लोग अपराधियों के जरिए ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि कांग्रेस देश का मनोबल तोड़ने का काम कर रही है और कुछ पत्रकार जो सच्चाई सामने ला रहे हैं, वो देश का मनोबल तोड़ रहे हैं। सरकार उन लोगों को नहीं पकड़ पा रही है, जो देश का मनोबल तोड़ रहे हैं। हालांकि इनकम टैक्स और ईडी के छापे हर जगह पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ, आरोप लगाने में कुछ नहीं जाता, क्योंकि आरोप लगाने वाले बेहैसियत के, बेदिमाग के, बेसमझ लोग हैं, जिन्हें सिर्फ और सिर्फ देशद्रोही कहा जा सकता है। ये ऐसे देशद्रोही हैं, जो देश को कमजोर बनाने में अपनी शान समझते हैं, अपना सर्वज्ञान समझते।सचमुच फेक न्यूज हमारे दौर की एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। जाने-माने लोग भी इसके जरिए पब्लिक मूड को मनचाही दिशा में मोड़ने की कोशिश करने लगे हैं। बहरहाल,

सोशल मीडिया के प्रवाह को रोक पाना तो संभव नहीं है, पर संस्थागत मीडिया ने झूठ और सच में फर्क न किया तो वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दर्जा जरूर खो देगा।

नरेंद्र मोदी : झूठ बोलने वाला एक झूठा मशीन, देश को कर रहा बर्बाद

मोदीजी और उनकी सरकार द्वारा बोले गये झूठ पर एक मोटी किताब लिखी जा सकती है,मोदीजी का एक 15 अगस्त का भाषण बेहद प्रसिद्ध है और वो उनके बोले गये झूठो के कारण। लाल किले से जो भाषण दिया उसमें अर्थव्यवस्था पर, किसानों की जीवनस्थिति पर ग़लत तथ्य दिये गये थे; गाँवों की बिजली के बारे में जो तथ्य दिये गये थे, वे भी ग़लत थे |
मोदी सरकार आज जिन योजनाओं की उपलब्धियों के बल पर तारीफ बटोर रही है वो उनकी नहीं बल्कि पिछली सरकार की है बहरहाल मोदी जी के जिन झूठो के बारे में, पहला झूठ: “किसानों का 99 प्रतिशत गन्ना भुगतान हो चुका है।”

दूसरा झूठ: 70 साल बाद बिजली पहुंचाने का दावा!

तीसरा जूठ: 350 रुपये में मिलने वाला LED बल्ब आज 50 रुपये में।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नाम पर असम में संघ द्वारा लड़कियों की तस्करी का मामला हो या किसानों को आगे बढ़ाने की बात हो, नरेन्द्र मोदी ने अपने हर वायदे के उलट हर तरफ़ बर्बादी का जो मंज़र खड़ा किया है, उसे ढँकने के लिए झूठों का अम्बार खड़ा किया गया है और पूँजीपतियों के ग़ुलाम मीडिया के ज़रिए इन झूठों के धुुआँधार प्रचार ने लोगों को ठहरकर इस पर कभी सोचने का मौक़़ा ही नहीं दिया है।

लेकिन यह काम क्रान्तिकारी ताक़तों का है कि इस फासीवादी प्रचार का पर्दाफ़ाश किया जाये। मोदी सरकार द्वारा देशभक्ति के नाम पर जेएनयू और हैदराबाद विश्वविद्यालय में छात्रों पर पुलिसिया लाठीचार्ज और मुक़दमे दर्ज करवाये गये।

नोटबन्दी के दौर में वायदा किया कि काला धन ख़त्म होगा और आतंकवाद रुक जायेगा परन्तु यह भी कोरा झूठ निकला। मोदी जी ने बोला कि 31 मार्च तक आरबीआई की खिड़कियों पर पुराना नोट बदला जायेगा और 31 दिसम्बर तक बैंकों और पोस्ट ऑफि़सों में बदला जायेगा परन्तु सभी जानते हैं कि मोदी ने कितनी बेशर्मी से इस बात को भुला ि‍दया और दर्जनों बार नये नियम घोषित किये जिसने आम ग़रीब जनता को भयंकर परेशानी में धकेल दिया।

प्रधानमन्त्री जी की डिग्री में भी गड़बड़ी है, जिस वजह से मोदी जी ने इस पर भी मौन धारण कर रखा।

अब नरेन्द्र मोदी की प्रचार नीतियों को देखा जाये तो इनमें भयंकर समानता दिखाई देती है। सिर्फ़ रेडियो की जगह सोशल मीडिया, टीवी, रेडियो लगभग हर तकनीकी माध्यम से मोदी के नाम को लोगों तक पहुँचाया गया है। ट्विटर पर संघ के आईटी सेल द्वारा प्रचार व ज़ी न्यूज़, इण्डिया टीवी, दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी सरीखे मुख्य टीवी चैनलों द्वारा प्रचार गोएबल्स का फासीवादी एजेण्डा ही दिखाता है। वहीं यहूदियों की जगह मुस्लिम आबादी के ख़िलाफ़ चलाया जा रहा कभी खुला तो कभी छिपा प्रचार उनके ख़िलाफ़ लगातार समाज में उनकी छवि गढ़ता है।

मोदी के प्रचार में कुछ फ़िल्में भी बनी लेकिन वे बेहद खराब थीं। हर मीटिंग या सभा को आयोजित करने से पहले तमाम राज्यों से लोगों को बुलाया जाता है, सभा को बड़े से बड़ा करने की कोशिश की जाती है।औऱ साथ ही हर बार झूट की दुनिया बना देते है कांग्रेस द्वारा पिछले 60 सालों में जो प्रतीक गढ़े गये थे, उन्हें ज़रूर मोदी ने 5 साल में चुनौती दी है और असल में मोदी सरकार का मक़सद भी यही है।

हिटलर और गोएबल्स की तरह प्रधानमन्त्री मोदी भी ज़रूर शीशे के आगे अपने भाषण तैयार करते हैं बल्कि बाकायदा भाषणों की पुरानी वीडियो देखकर एक-एक शब्द पर ज़ोर और चेहरे के भाव की तैयारी करते होंगे। ऐसे कि एक झूठ को सौ बार दोहराने पर वह सच में तब्दील हो जाता है।मोदी और संघ लगातार इसी छवि को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रधानमन्त्री मोदी झूठ बोलते रहेंगे, क्योंकि वे झूठ बोलने की मशीन हैं और झूठ बोले बिना उनका काम नहीं चल सकता है।

कर्नाटक में कांग्रेस की बनती बढ़त, भाजपा के लिये परेशानी बनी हुई है :

कर्नाटक में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है यह साफ होते जा रहा है कि भाजपा इस चुनाव में काफी पिछड़ चुकी है।

सिद्धरमैया के 5 सालों के कामकाज का लेखा जोखा देखा जाए और उसके बाद जिस तरह से सिद्धरमैया आक्रमक प्रचार कर रहे हैं और उन्हें निरंतर राहुल गांधी और अन्य नेताओं का साथ मिल रहा है इससे कांग्रेस की स्थिति मजबूत होते जा रही है चाहे भाजपा कितना भी झूठा आरोप लगा ले मगर सिद्धरमैया ने अपने 5 साल के कार्यकाल में रोजगार और किसानों पर जिस तरह से ध्यान दिया वह उनको इस चुनाव में काफी फायदा पहुंचा रहा है सिद्धारमैया ने इन 5 सालों में कानून व्यवस्था को भी काफी सुधारा है। अब भी कानून व्यवस्था में सुधार की जरूरत है क्योंकि 5 साल पहले भाजपा सरकार में कानून व्यवस्था काफी लाचार थी। जिसे कई हद तक कांग्रेस सरकार ने सुधार लिया है।

अब अगर भाजपा की बात करें तो भाजपा में पहले गुटबाजी और येदुरप्पा जैसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री का चेहरा के साथ साथ रेड्डी ब्रदर्स को टिकट देना पोर्न वीडियो देखने वालों को टिकट देना और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी के अनर्गल बयानबाजी भी कर्नाटका में भाजपा के लिए मुश्किल खड़ा कर रही है। कर्नाटक के लोग काफी पढ़े लिखे और समझदार माने जाते हैं उनका राजनीतिक सोच देश से हमेशा अलग होती है क्योंकि जब 2013-14 में पूरा देश मोदी लहर में हुआ था तब भी कर्नाटक ने कांग्रेस का साथ दिया था और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि कर्नाटक देश की परिस्थितियों को देखकर सरकार में बदलाव करता है वह हमेशा अपने राज्य को और राज्य की स्थिति को देखता है इसलिए भाजपा नेता चाहे देश की अलग-अलग कोनों की स्थिति बता कर कांग्रेस को घेरने की और अपने आप को महान बनाने की कोशिश करते रहे मगर कर्नाटक की जनता उसी चीज को तवज्जो अधिक देती है जिससे कर्नाटक की जनता को अपना फायदा होता है ऐसे में अगर हम कहें कि कांग्रेस ने लिंगायत और कावेरी नदी जैसे मुद्दों को सुलझाने का जो प्रयास किया है उससे कहीं ना कहीं कांग्रेस को एक बड़ा फायदा मिलेगा वहीं कांग्रेस के सारे नेताओं का गुटबाजी छोड़ राहुल के नेतृत्व में सिद्धरमैया को समर्थन देना भी कांग्रेस के लिए एक बड़ा फायदा साबित होगा ऐसे में हम कह सकते हैं कि कांग्रेस कर्नाटका में काफी अच्छी स्थिति में है जो भाजपा के लिए चिंता का विषय अब तक बना हुआ है।

राहुल गांधी : पूंजीपतियों के षड्यंत्र के बाबजूद सत्य के लिये लड़ता योद्धा

हम ये कहें कि पूंजीपतियों के षड्यंत्र और मीडिया की चालबाजी का शिकार किसी भी भारतीय नेता बनाया गया है तो वो नाम राहुल गाँधी का है।

राहुल गाँधी के खिलाफ पूंजीवादी मीडिया ने जिस तरह से प्रोपगंडा चलाया और उनके छवि को धूमिल किया उसी का नतीजा था कि 2014 में नरेंद्र मोदी भारत के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे अन्यथा जिन्होने 2006 से 2011की राजनीति पर नजर बनाई होगी उसे अब भी याद होगा कि राहुल ने देश को उन मुद्दे को बहुत पहले उठाया था जिसके सहारे मोदी और केजरीवाल ने कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाया। अगर कहा जाए कि राहुल की योजनाओं और विचारों को चोरी करके मोदी और केजरीवाल सहित अखिलेश यादव ने अपनी राजनीति को चमकाया तो गलत नही होगा।

राहुल ने 2004 में राजनीति में आने के बाद 2 साल पहले इसे समझा और फिर 2006 से देश मे बदलाव लाने के लिये देश के हर क्षेत्र में दौरा करके उनके हालो को जाना और अपनी सरकार से बात कर कई तरह के अधिकार उन्हें दिये जिसका फायदा कांग्रेस को 2009 में हुआ और कांग्रेस 1990 के बाद पहली बार 200 से अधिक लोकसभा सीट में जीत दर्ज की।

राहुल की बढ़ती लोकप्रियता और युवाओ मे राहुल के कारण बढ़ती राजनैतिक दिलचस्पी को देखकर पूंजीपति वर्ग , आरएसएस और देशविरोधी ताकतों मे बेचैनी बढ़ने लगी जिसको धूमिल करने के लिये पूँजीवादी लोगो ने मीडिया के माध्यम से राहुल पर हमला किया और उनकी छवि को धूमिल किया इसमें कही न कही कांग्रेस के कुछ नेताओं का भी योगदान रहा जो राहुल और कांग्रेस सहित देश के बारे में अनर्गल बयानबाजी करते थे।

2014 के आमचुनाव के दौरान मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से राहुल के खिलाफ झूठा, आपत्तिजनक और अश्लीलता पूर्ण प्रचार किया गया जो आरएसएस जैसे संस्थानों की सोच थी।

2014 में कांग्रेस के हारने के बाद 3 साल तक लगातार राहुल ने सँघर्ष करते हुए पार्टी और पार्टी के बाहर लोगो के बीच कांग्रेस को स्थापित करने का प्रयास की मगर उन्हें वैसी सफलता नही मिली जैसी सफलता उन्हें गुजरात चुनाव और अध्यक्ष बनने के बाद मिल रही है।

राहुल ने बदलाव के इस दौर पर देश को नया सन्देश दिया है कि चाहे उनका विपक्ष कितना भी झूठा,चालबाज और नीच हो मगर वो सत्य और सादगी के साथ उनको हरायेंगे क्योंकि सत्य ही भारत की ताकत है। उनका हौसला लगतार बढ़ रहा है जिससे मोदी सरकार की परेशानी कही न कही बढ़ रही है जिस कारण से जो पहले कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे अब वो कांग्रेस की बातों को आगे बढ़कर सवाल-जबाब कर रहे हैं।

राहुल को इसी तरह सत्य के साथ आगे बढ़ता रहना चाहिये जिससे लोगो को एक वर्तमान सरकार से अलग एक नई उम्मीद की किरण दिखे।

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