रीवा। मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में सामने आ रही कथित लापरवाही के विरोध में आदिवासी कांग्रेस ने रीवा में स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। आंदोलन का नेतृत्व मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया कर रहे हैं। वहीं, धरना में आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम और स्थानीय नेताओं के अलावा आदिवासी विधायक भी शामिल हैं।
आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ से कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने धरना स्थल पर पहुंचने से पहले रीवा आदिवासी कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष रहे दिवंगत अमित कोल के परिजनों से उनके निवास पर मुलाकात की।
इन घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना
आदिवासी कांग्रेस ने बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत, इंदौर के सरकारी अस्पताल में नवजात बच्चों को चूहों द्वारा कुतरे जाने की घटना, सतना में कथित तौर पर एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले और छिंदवाड़ा के कफ सिरप प्रकरण को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लगातार गंभीर लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं और इसके बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग
आदिवासी कांग्रेस ने इन घटनाओं की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के कारण किसी परिवार को अपने बच्चों की जान नहीं गंवानी चाहिए।
मृत बच्चों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग
आंदोलनकारियों ने बालाघाट में जान गंवाने वाले आदिवासी बच्चों के प्रत्येक परिवार को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों में कम से कम एक सदस्य को स्थायी रोजगार देने की मांग भी रखी गई है।
आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाने की भी मांग की गई है। संगठन ने अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग और मेडिकल स्टाफ, जरूरी दवाइयां, जांच सुविधाएं, ब्लड बैंक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग
आदिवासी कांग्रेस का कहना है कि केवल जांच की घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को घटनाओं की जिम्मेदारी तय करने के साथ प्रभावित परिवारों को न्याय और उचित मुआवजा देना होगा। साथ ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करती, तब तक रीवा में अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।