Tuesday, September 15, 2026
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5 झुठ जो प्रधानमंत्री मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को सम्बोधन में बोले

 

 

यू तो मोदी जी देश की जनता को बेवकूफ बनाने के लिए कई झूट बोलते आये है पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र को सम्बोधन में भी इतने झूट बोल दिए मोदी जी ने शर्म की बात है आकड़ो सहित देखे

दावा नंबर 1 – स्वच्छ भारत अभियान से तीन लाख बच्चों की जान बच गई.

सच्चाई – विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक अगर स्वच्छ भारत अभियान को 100% लागू कर दिया जाए तो 2019 तक डायरिया और प्रोटीन एनर्जी की कमी से होने वाली करीब 3 लाख बच्चों की मौतों को टाला जा सकता है. तो WHO ने किसी लक्ष्य के तय होने की बात नहीं की थी. उन्होंने महज़ एक अनुमान लगाया भविष्य (अक्टूबर 2019) के लिए. तो मोदी जी पूरे एक साल एडवांस चल रहे थे. फिर WHO की बात में शर्त थी कि स्वच्छ भारत अभियान के 100% टार्गेट पूरे हों. भारत कितना स्वच्छ हुआ है, मोदी जी ही जानते हैं. लेकिन हम इतना जानते हैं कि 100% नहीं हुआ है. तो बच्चों की जान बचने का दावा झूठा है.

 

दावा नंबर 2 – भारत का पासपोर्ट अब दुनिया के सबसे ज्यादा ‘इज्जतदार’ पासपोर्ट्स में से एक है. अब सब जगह इसका स्वागत होता है.

सच्चाई- पासपोर्ट की ‘इज्जत’ के माप के लिए दुनियाभर में एक रैंकिंग होती है. ‘ग्लोबल पासपोर्ट पावर इंडेक्स’ में किसी देश का पासपोर्ट जहां जगह पाता है, उसे ‘ग्लोबल पासपोर्ट पावर रैंक’ कहते हैं. यदि आपके पास अच्छे रैंक का पासपोर्ट हो तो आपको दुनिया के ज़्यादातर देशों (खासतौर पर यूरोप और अमरीकी महाद्वीप में) में जाने के लिए वीज़ा की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. आप फ्लाइट पकड़कर सीधा उस देश पहुंचें और आपको ‘वीज़ा ऑन अराइवल’ मिल जाएगा. पासपोर्ट का ‘स्वागत’ इसी संदर्भ में होता है. जैसे-जैसे नीचे की रैंकिंग वाले पासपोर्ट पर जाते हैं, वीज़ा ऑन अराइवल देने वाले देश कम होते जाते हैं. ज़्यादा नीचे की रैंकिंग हुई तो विकसित देश जाने के लिए वीज़ा मिलना ही मुश्किल हो जाता है.

दावा नंबर 3 – भारत का शहद निर्यात दोगुना हो गया है.

सच्चाई – गांधी जी वाला सच (माने तथ्य) ये है कि वित्त वर्ष 2016-17 में भारत ने 55,73.903 करोड़ टन था. 2017-18 में यह बढ़कर 65,35.758 करोड़ टन हो गया. यह बढ़ोत्तरी करीब 17% है. भारत भूमि पर हुए महान गणितज्ञ आर्यभट के अनुसार दोगुना तभी कहा जा सकता है जब 100% की बढ़ोत्तरी हो जाए. हमने अभी कैलकुलेटर में हिसाब किया तो 17, 100 से 83 कम निकला. सो मोदी जी का शहद वाला दावा भी झूठा निकला. जीके के लिए बता दें कि भारत शहद निर्यात के मामले में 11वें नंबर पर है.

दावा नंबर 4 – मुद्रा योजना में बंटे 13 करोड़ लोन से देश में नौकरियां और अपना बिज़नेस (आंत्रप्रन्योरशिप) बढ़ी है.

सच्चाई – इंडिया टुडे द्वारा लगाई गई एक RTI के जवाब में सरकार ने खुद बताया है कि मुद्रा योजना में बांटे गए सभी लोन में से सिर्फ और सिर्फ 1.45% लोन ही 5 लाख से ज्यादा के हैं. 90% से ज्यादा लोन 50,000 से कम के हैं. अर्थशास्त्री अजीत रानाडे के मुताबिक इतने पैसों में लोन लेने वाला कोई बहुत छोटा धंधा (जैसे पकौड़े या चाय का ठेला) तो शुरू किर सकता है लेकिन व्यापक पैमाने पर रोज़गार पैदा नहीं हो सकता.

दावा नंबर 5 – 2013 में जिस रफ्तार से इलेक्ट्रिफिकेशन यानी विद्युतीकरण हो रहा था, उसी रफ्तार से काम पूरा करने में (सभी गावों तक बिजली पहुंचाने में) एक दशक लग जाता.

सच्चाई – एनडीए सरकार के चार सालों में 18,374 गांवों में बिजली पहुंचाई गई. इंडिया स्पेंड के मुताबिक साल 2005-06 से 2013-14 के बीच राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत 1,08,280 गांवों में बिजली पहुंचाई गई. इसका मतलब कि यूपीए राज में हर साल 14,528 गांवों का औसत रहा. वहीं मोदी सरकार के चार साल में 18,374 मतलब 4,594 गांव हर साल का औसत है.

अनाम विद्रोही (अनिल मरमट)

अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन भी था दागदार, कई घोटालों और विवादों में आया था नाम :

कल मैंने जो भी पोस्ट्स लिखीं वो सब इतिहास में दर्ज़ तथ्यों पर आधारित थीं. आप कह सकते हैं कि कल अटल पर सच बोलने का मौका नहीं था लेकिन सच तो सच है ..वही अटल है..
दिन भर टीवी पर इतना झूठ परोसा जा रहा था कि मुझे अंतत: सच लिखना ही पड़ा.
एक बात और गौर करें… राजीव जी का शव क्षत विक्षत था फिर भी दर्शनार्थ तीन दिन रखा गया .. इंदिरा जी गोलियों से छलनी हुईं लेकिन शव तीन दिन रखा गया..क्या कारण है कि अटल जी का शव मृत्यु के सिर्फ 24 घण्टे में ही अन्तिम क्रिया के लिए भेजा जाना प्रस्तावित है?
दरअसल उनकी मौत 14 की रात को हो गयी थी लेकिन 15 का भाषण शो ख़राब न हो इसलिये इस बात को गोपनीय रखा गया. 16 के दिन का इस्तेमाल देश में माहौल बनाने के लिए किया गया. इस स्थिति में शव पहले ही सड़ने लगा और एक दिन में अंतिम संस्कार के अलावा कोई चारा नहीं बच रहा है.
दूरदर्शन ने कल दोपहर 2.40 पर उनकी मौत की ख़बर चला दी थी जिसका विडिओ उपलब्ध है लेकिन पीएमओ के दबाव में उस ख़बर को हटा दिया गया. गौरतलब है कि सिर्फ दूरदर्शन के संवाददाता ही AIIMS के अंदर थे और उनकी ख़बर पक्की थी.. लेकिन अब वो सब ससपेंड कर दिए जायेंगे.
कल से मीडिया यह झूठ परोस रहा है कि अटल जी ने चीन से सम्बन्ध सुधारने में बहुत काम किया लेकिन यह किसी ने नहीं बताया कि उन्होंने ही घुटने टेककर तिब्बत को चीन का अभिन्न अंग स्वीकार किया और बदले में अरुणाचल पर चीन को मनाने में नाकाम रहे. चीन आज भी स्टेपल वीसा ही देता है अरुणाचल के निवासियों को. ये महान कूटनीतिक पराजय थी..
यहीं उतावला पन कारगिल में भी दिखाया गया जब बिना सोचे समझे नवाज़ को गले लगाया..और बाद में अमेरिकी दबाव में LOC पार न कर के सैकड़ों जवानों को मौत के मुँह में झोंका गया. कारगिल की कई पहाड़ियाँ आज भी पाकिस्तान के कब्ज़े में हैं जो कभी भारतीय थीं..अमेरिकी दबाव में एकतरफा युद्ध विराम किया गया और अपनी मातृभूमि पकिस्तान को सौंप दी गयी.
परमाणु विस्फोटों के सम्बन्ध में उन्हें बहुत निर्णायक नेता बताया जा रहा है लेकिन गौरतलब है कि भारत 1974 में पोखरण प्रथम के समय ही परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बन गया था .. 1998 के परिक्षण इस मायने में नाकाम माने जायेंगे क्यूँ कि इनके एक माह के भीतर ही पकिस्तान ने अपने कच्चे पक्के बम फोड़कर परमाणु शक्ति का स्टेटस हासिल कर लिया और जो कहीं टिकता न था वो कूटनीतिक रूप से वो बराबरी पर आ गया.
अटल जी से मुझे कोई वैमनस्य नहीं है ..साथ ही उन में मेरी कोई श्रद्धा नहीं है.. और समालोचना मेरा अधिकार भी है ..
एक व्यक्ति जो किसी बम, गोली से नहीं मरा है अपितु भरपूर जीवन जीने के बाद गया है ..उसे शहीदों से महान बताने के षड्यंत्र का मैं विरोध करता हूँ.
अटल बिहारी जी का नाम जब भी आएगा तो मोरारजी सरकार की जनता सरकार के पतन पर सुब्रमण्यम स्वामी के लेख भी सामने आयेंगे, उतावले पन में गँवाए हुए तिब्बत और कारगिल भी याद आयेंगे, अकर्मण्यता की पराकाष्ठा संसद पर हमला भी याद आएगा, आतंक के आगे घुटने टेकने वाला और देश को लज्जित करने वाला कंधार भी याद आयेगा..
याद आएगी संसद हमले के बाद अमेरिकी दबाव में पकिस्तान को मुँह तोड़ जवाब न दे पाने की विफलता.. याद आयेगा नवरत्न कम्पनियों का अंधाधुंध विनिवेश और बेचवाली..याद आएगा कि जिस कीमत में वेदांता ने हिन्दुस्तान जिंक को खरीदा उस से तिगुने मूल्य का स्क्रैप बेचा ठीक अगले दिन ,, याद आएगा बीएसएनएल को पीछे कर के रिलायंस कम्युनिकेशन को “कर लो भारत मुट्ठी में” की परवानगी देना….
याद आयेंगे कारगिल के कफ़न जिन में दलाली खायी गयी और याद आयेंगे बीजेपी के अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण जो इसी दौरान डॉलर में रिश्वत लेते हुए रँगे हाथों गिरफ्तार हुए और बाद में दोषी भी पाए गए.
याद आयेंगे मुग़ल सराय पर लावारिस लाश के रूप में पड़े दीनदयाल उपाध्याय और उस से सम्बंधित आरोप, याद आएगी जनसंघ संस्थापक बलराज मधोक की जीवनी और अटल जी के चरित्र पर उठे प्रश्न.. और याद आएगी लाहौर की प्रसिद्द बीफ कचौरी ..
लिखने को और भी बहुत कुछ है लेकिन इससे अधिक न लिखूँगा..
ये लेख सिर्फ इस यह जताने के लिए है कि जब आप शोकाकुल हों और आपके दिवंगत पर कोई अभद्र टिप्पणी करे तो कैसा महसूस होता है..
राजीव जी पर अमित मालवीय की टिप्पणी हो या गाँधी के हत्यारे गोडसे को महिमा मंडित करती प्रीती गाँधी की टिप्पणी हो..या फिर इंदिरा जी, संजय जी और नेहरु जी के निधन के बाद उनका लागातार किया गया चरित्र हनन हो..मेरा लेख उतना घटिया नहीं है.. मेरे लेख के तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे जा सकते हैं..
अंतत: कुत्ते का पिल्ला भी मर जाय तो हमें दुःख होता है ..
(ये लेख मेरा नहीं है… मैं ऐसा नहीं हूँ.. लेकिन मेरे अन्दर पिछले 4 साल से जो मोदी घुसा हुआ है ये उसकी जीत का परिचायक है,, ये मेरे अन्दर के गाँधी की हार का वीभत्स संगीत है…
तुम मुझे अपने जैसा देखना चाहते थे न भक्तों… लो मैं तुम्हारे जैसा हो गया..
निष्ठुर, अमानवीय, संवेदनाशून्य)

 

  • अनिल मरमट उर्फ अनाम विद्रोही

पुराने घोषणाओं को भूलकर नई घोषणा करने वाले असफल PM हैं मोदी

प्रधानमंत्री महोदय ! आप हर बार जो नई घोषणाओं की झड़ी सी लगा देते हैं, पिछली घोषणाओं/योजनाओं से क्या लाभ हुआ क्या कभी इसका हिसाब भी दिया है? आपने कल कहा कि चार करोड़ बैरोज़गार नौजवानों ने अपना कारोबार चलाने के लिए कर्ज लिया है तो लगे हाथ यह भी बता देते कितनों ने वह कारोबार चलाया भी है ! यह भी बता देते कि देश का खून चूसते कार्पोरेटस का 48 खरब रुपए का कर्जा माफ करके आपने बैंकिंग व्यवस्था को कैसे खोखला कर दिया है ! आप तो उनके लिए पलक- पांवड़े बिछाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते ! उलटे जनता को ही दो बात सुना जाते हैं जैसे आपने लखनऊ में यह कह कर किया, ‘देश को बनाने में उद्योगपतियों की अहम भूमिका है। क्या हम उन्हें अपमानित करेंगे, चोर- उचक्के कहेंगे?’ तो कोई अहसान किया है क्या उन्होंने? यही काम है उनका ! मोटा मुनाफा कमाया है उन्होंने यह भूमिका निभा कर !!

खैर कुछ सवाल तो बनते ही है आपके इस रवैये को देख कर ! बता दें कि व्यक्तिगत आलोचना में मेरा कभी विश्वास नहीं रहा, लेकिन लोकशाही में अपने प्रधानमंत्री से सवाल करने अधिकार तो मुझे है ही ;

  1. अच्छे दिन : पांच साल बीतने को हैं अब तो अच्छे दिनों की अपनी परिभाषा बता दो भाई ! वो आ गए हैं या आने वाले हैं? वैसे दिखने में कैसे लगते हैं वे?

हिसाब कहां है मेक इन इंडिया में कितनी विदेशी पूंजी भारत आई, स्किल इंडिया से कितने नौजवानों को लाभ हुआ उनमें से कितने काम धंधो में लगे, नमामि गंगे पर लगे बीस हजार करोड़ रुपए का हिसाब तो दो ! गंगा साफ हुई या नहीं ? या सिर्फ लोगों की जेब ही साफ हुई है ! इतना समय पहले तीन गुणा कीमत में हुए रॉफेल सौदे के बावजूद आज तक एक भी विमान अभी तक क्यों नहीं आया? का वर्षा जब कृषि सुखाने !

काला धन इसका रंग बदला या नहीं…
विकीलीक्स और पैराडाइज़ पेपरस पर आपकी चुप्पी का क्या अर्थ लिया जाए जबकि इन्हीं के चलते आपके परम मित्र नवाब शरीफ की शराफत सरेआम नीलाम कर दी गई गद्दी से सीधा जेल भेज कर !

FCRA के राज के बारे में भी तो कभी देश को बताओ कैसे आपने अपनी और दूसरी पार्टियों के पाप को छिपाने के लिए चालाकी से कानून ही बदल दिया था। थोड़ी चूक तो फिर भी हो ही गई तारीख़ बदलने को लेकर! तो फिर महाशय यह भी बताइए न देश को कि आज भी कांग्रेस के साथ आपकी पार्टी कानून की नज़र में मुजरिम है !

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बलात्कार के तेजी से बढ़ते हादसों, आपकी पार्टी के कई नेताओं का उसमें लिप्त होना, बलात्कारी बाबाओं को संरक्षण आदि की तो मैं बात ही नहीं कर रहा, बिहार, यूपी के और जो प्रकाश में नहीं आए उन सुधार गृहों में बालिकाओं से करवाई जा रही जबरन वेश्यावृत्ति और मानव अंगों की तस्करी पर आपकी चुप्पी का क्या अर्थ लगाया जाए। बताते चले कि ऐसे अपराध संगठित अपराधों की श्रेणी में आते हैं !

खैर, जाने दीजिए। आप तो सिर्फ़ सवाल करते हैं, जवाब तो आपने कभी दिया ही नहीं। तो इस बार जनता आपको सब जवाब एक साथ दे देगी। अब तो लगता है साहिब 15 अगस्त के दिन लाल किले से अपनी बात फेकने का दिन बन गया।तमाम चर्चाओं में आत्मग्लानि तनिक भी नहीं कि देश में बहन बेटियों के लिये कौन जिम्मेदार है,संविधान जलाने वाले गिरफ्तार क्यों नही हुए,जीडीपी निचले स्तर पर किसलिये आ गई,विश्व भ्रमण से देश को कितना आगे ले आये,डॉलर 70 के पार क्यों,कानून व्यवस्था ध्वस्त क्यों?
सिर्फ RULE OF LAW की बात ही करनी है या थोड़ा बहुत बचा भी है।वहां इकट्ठी भीड़ ताली बजाने का लड्डू खा लेना स्वतंत्रता मान बैठी देश की बड़ी आबादी के लिये स्वतंत्रता आज भी सपना है।

कर्नाटक के बीदर में मोदी पर जमकर बरसे राहुल गाँधी, महिला सुरक्षा को लेकर घेरा

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक के बीदर जिले में एक किसान रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने हाल ही में पीएम मोदी द्वारा सुनाए गए एक किस्से को लेकर उनपर करारा तंज कसा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन उनका यह वादा जुमला बनकर रह गया। उन्होंने कहा, “उनका वादा तो पूरा नहीं हुआ, लेकिन अब वह युवाओं को पकौड़े बनाने के लिए कह रहे हैं। लेकिन ये भी कह रहे हैं कि हम आपको गैस नहीं देंगे, गैस भी आपको नाले से निकाल कर कूकर में डालनी पड़ेगी

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को चुनौती देते हुए कहा, “चुनाव में हमने कहा था कि जैसे ही कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार आएगी, हमारा पहला काम किसानों का कर्जा माफ करने का होगा। जो हमने कहा था, करके दिखा दिया। लेकिन नरेंद्र मोदी जी किसानों का कर्जा माफ नहीं कर सकते हैं। बड़े-बड़े भाषण करेंगे। मैं मोदी जी को चुनौती देता हूं कि कर्नाटक की सरकार ने किसानों का जितना कर्ज माफ किया है, वह उसका आधा कर्ज हिंदुस्तान के किसानों का माफ करके दिखा दें।”

राहुल गाँधी ने राफेल डील को लेकर भी मोदीजी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी की कंपनी ने कभी हवाई जहाज नहीं बनाया। जिस कंपनी को नरेंद्र मोदी ने ठेका दिलवाया वह 10 दिन पहले बनाई गई थी। ये हवाई जहाज भारत में नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा, “ये सारी बातें मैंने लोकसभा में पीएम मोदी के सामने कहा। मैंने बताया कि किस तरह रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने झूठ बोला कि हवाई जहाज के दाम बताये नहीं जा सकते, क्योंकि एक गुप्त समझौता हुआ है। लेकिन जब मैंने फ्रांस के राष्ट्रपति से ऐसे किसी समझौते के बारे में पूछा तो उन्होंने मना कर दिया।”
नरेन्द्र मोदी जी नया नारा लाये थे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, लेकिन मोदी जी ने ये नहीं बताया कि किससे बचाओ| प्रधानमंत्री बीजेपी के नेताओं को बचाने में लगे हैं।
यूपी और बिहार में हाल ही में हुई रेप की घटनाओं पर भी सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि “नरेंद्र मोदी जी यूपी में रेप हुआ और बीजेपी विधायक पर आरोप लगा। पीएम मोदी बिहार और यूपी की रेप घटनाओं पर एक शब्द भी नहीं बोले।

राहुल गाँधी के राजस्थान दौरे से कांग्रेस में उत्साह, भाजपा के लिये खतरे की घँटी

 

कल कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने राजस्थान चुनाव का शंखनाद जयपुर मे मेगारोड शो से किया बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट से शुरू हुआ ये रोड शो रामलीला मैदान तक करीब 13 किमी तक चला इसमे लगभग 6 लाख से अधिक की जनता ने भाग लेकर बता दिया कि कांग्रेस आज भी जिंदा हैं ।

राहुल के इस रोड शो मे हर 200 मीटर बाद अलग अलग प्रकोष्ठो द्वारा स्वागत किया गया जिसमे युवा कांग्रेस का स्वागत सत्कार बहुत ही चर्चित रहा युवा कांग्रेस की नई टीम ने एकजुटता दिखाते हुए तकरीबन 2500 बुलेट बाइक से राहुल जी का स्वागत कर ” हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो, राहुल जी जैसा हो ” के नारे लगाये.


साथ ही साथ श्री राहुल गांधी ने रामलीला मैदान मे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पैराशूट प्रत्याशी कांग्रेस से दूर रहे जो जमीन पर पसीना बहायेगा कांग्रेस उसे ही टिकट देगी तथा श्री राहुल गांधी ने मरुस्थलीकरण क्षेत्र की ज्वलंत समस्या बिजली का मुद्दा उठाते हुए भाजपा पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया तथा कहा कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिये बडे बडे वायदे करती है हकीकत मे वो सिर्फ दोषारोपण करना जानती हैं

इसके साथ साथ राहुल गांधी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता पायलट गहलोत को पहले हाथ मिलवाया फिर गले लगाकर कार्यकर्ताओं मे जोश भरने का काम किया ये तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल एकजुट कांग्रेस के नाम हो रही हैं.

राहुल के इस दौरे के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब भाजपा को काफी नुकसान होगा जिस तरह से राहुल ने कांग्रेस की गुटबाजी खत्म कर के नेताओ को एकजुट क़िया है इसका फायदा निश्चित तौर पर कांग्रेस को होगा।

राहुल ने साफ तौर पर कह दिया कि अबकी जमीन पर काम करने वाले को तरजीह दिया जायेगा और पैराशूट से आये नेताओ को तरजीह नही मिलेगी।

मोदी का राफेल घोटाला और PM पद की गरिमा

राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद में जबरदस्त घोटाला हुआ है। भला उस प्रधानमंत्री के राज में घोटाला कभी हो सकता है, जो न खाता हो, न खाने देता हो, सिर्फ़ योगा करता हो और करने देता हो! आप इसे बिगाड़ कर कहना चाहें तो कह सकते हैं, जो केवल-मात्र योगा को भोगा करता है, करवाता है। ऐसे ‘परम ईमानदार’ नेता की सरकार में – जिसकी पार्टी का अध्यक्ष उससे भी ज्यादा ईमानदार हो – घोटाला! छि: कितनी बदबू आ रही है, ये बात सुनकर भी! अरे राम मेरी तो नाक ही सड़ जाएगी इस बदबू से, कोई बचाओ मुझे! ऐसी गंदी बात आगे से मत करना मेरे सामने और करना हो तो मुझे पहले बता देना ताकि मैं यहां से चला जाऊं

पिछले सत्तर साल में आई है कभी ऐसी ईमानदारों की सिरमौर सरकार? फिर भी कहते हो, हर विमान पर एक हजार करोड़ का घोटाला हुआ है?

चलो मानने के लिए यह भी मान लेते हैं कि घोटाला हुआ! कितने का हुआ? 35000 करोड़ का हुआ!आप कहते हो, मोदीजी ने किया। मोदी जी कौन हैं? किसी ग्राम पंचायत के सदस्य हैं क्या? सरपंच हैं क्या? किसी नगरपालिका के अध्यक्ष, किसी नगरनिगम के महापौर हैं क्या? पुलिस चौकी के इंचार्ज हैं क्या? किसी विभाग के क्लर्क या सेक्शन आफिसर हैं क्या? बीडीओ, डिप्टी कलेक्टर, कलेक्टर, मंत्री-मुख्यमंत्री हैं क्या? क्या हैं देश के – प्रधानमंत्री हैं न! कोई छोटे-मोटे लल्लू टाइप पद पर तो नहीं हैं न! अब आए न लाइन पर। इतनी बड़ी हैसियत के इतने बड़े आदमी, जिनका कुछ पता नहीं, कब देश में रहते हैं, कब विदेश में –  क्या करोड़-दस करोड़-हजार करोड़ का घोटाला करेंगे? पद की गरिमा भी कोई चीज होती है या नहीं होती? होती है न! तब! मोदीजी ने एक बार भी – अपने वचनों से ही सही – पद की गरिमा गिरने दी है कभी? आप ऐसा कल्पना भी कर सकते हो कभी।

भाइयों-बहनों, गरीब मां के इस बेटे ने, इस चायवाले ने ऐसा किया कभी? वह  ऐसा कर सकते हैंं कभी? उनका खुला चैलेंज है कि कोई माई का लाल उनका एक भी भाषण दिखा दे, जिसमें एक भी शब्द पद की गरिमा के प्रतिकूल हो। उन्होंने एक भी काम किया हो कभी, कर्म से ही नहीं  बल्कि अपने वचनों से भी, जो पद की गरिमा को गिराता हो। विपक्ष एक भी उदाहरण दे दे, एक भी, तो अभी और यहीं भारत मां का यह लाल, यह लाड़ला, यह सपूत, यह भगत सिंह, यह चंद्रशेखर आजाद, अभी और यहीं फांसी पर चढ़ जाएगा। फंदा तैयार रखना रे भाइयों-बहनों। यह बात मैं उनकी तरफ से उनकी उपस्थिति में कह रहा हूं भाइयों-बहनों। उन्हें पुराना एक्सपीरियंस है फांसी के फंदे पर चढ़ने का। नोटबंदी के समय भी चढ़े थे या नहीं चढ़े थे? खुलेआम चढ़े थे कि छुपकर चढ़े थे? हुआ उनका एक भी बाल बांका और जो बाल पहले से आके-बांके थे, उनमें से एक भी सीधा हुआ? कोई चाहे तो पास आकर दूर से देख ले। उनकी चिंता करने की किसी को कोई जरूरत नहीं। वह स्वयं सक्षम है।

राहुल गाँधी ने कहा मोदीजी के दिल मे दलितों के लिये कोई जगह नही, भाजपा-आरएसएस की नीयत दलित विरोधी :

आज श्री राहुल गांधी ने जंतर मंतर दिल्ली मे दलितो के आंदोलन मे शामिल होकर कांग्रेस पार्टी की ओर से दलितो को समर्थन दिया, कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने कहा “प्रधानमंत्री के दिल मे दलितों के लिये कोई जगह नही है, भाजपा ऐसी सरकार है जिसकी नीयत दलित विरोधी हैं मोदी जी ने कहा था ” दलितो को सफाई करने मे धार्मिक आंनद मिलता हैं ” ये उनकी भाषणो की किताब मे लिखा है यही भाजपा की विचारधारा हैं मोदी जी की सोच के अनुसार हिंदुस्तान मे दलितों की कोई जगह नही होनी चाहिए ,मोदी जी तथा आरएसएस चाहते है कि चाहे वो शिक्षा हो या प्रगति हो कही पर भी दलितो को जगह नही मिलनी चाहिए प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने दलितों को एक्ट दिया था उस एक्ट को मोदी जी ने रद्द होने दिया उस पर आक्रामण किया इस एक्ट की रक्षा कांग्रेस करेगी और हम सब मिलकर करेगे रोहित वेमुला की हत्या की जाती है जहा भी दलित आगे बढने की कोशिश करेगे वहा मोदी जी तथा आरएसएस उन्हें रोकने की कोशिश करेगे भाजपा शासित राज्यों मे दलितों को पीटा जा रहा है मारा जा रहा है हमे ऐसा हिंदुस्तान नही चाहिये चाहे वो दलित हो या ओबीसी हो या फिर सामान्य वर्ग का हो सबको अपने अपने अधिकार मिलने चाहिये उनके अधिकारों का हनन करने वालो को सजा मिलनी चाहिए, कांग्रेस पार्टी दलितों के साथ मजबूती से खडी है तथा श्री राहुल गांधी ने साथ मे ये भी कहा कि 2019 मे इस संविधान विरोधी भाजपा को मिलकर पटखनी देगे

 

श्री राहुल गांधी ने बताया कि वो कल तमिलनाडु जाने के कारण इस आंदोलन मे शरीक नही हो पाये कांग्रेस पार्टी उनकी आवाज है जिनको दबाया जा रहा है कुचला जा रहा हैं श्री राहुल गांधी के भाषण के बाद कई भाजपा नेताओ की प्रतिक्रियाए सामने आ रही हैं श्री राहुल गांधी के साथ विपक्ष के अन्य नेता भी मौजूद रहे

एक था मोदी जो कही खो गया :

एक था मोदी कडुवा है पर सत्य है जिनको बुरा लगे खुल कर विरोध करे
एक था मोदी – जो सरहद पर होते हर हमले पर कहता था कि समस्या सरहद पर नहीं, दिल्ली में बैठी सरकार में है।
तथ्य: अब व PM बन गया तो अब समस्या सरहद और सरहद के पार है।
एक था मोदी – जो कहता था कि सरकार को लव लेटर लिखना बंद करना चाहिये, आंख में आंख डाल कर पाकिस्तान और चीन से बात करनी चाहिये।
तथ्य: पिछले तीन साल में पहले से कहीं ज्यादा सैनिक मारे जा रहे हैं, घुसपैठ भी बढ़ी है, चीन ने अपने नक्शे में सीमावर्ती इलाकों के नाम तक बदल डाले.. पर मोदी सरकार सिर्फ निंदा से काम चला रही है।
एक था मोदी – जो कहता था देश में किसानों की बेहतर स्थिति के लिये रियल टाईम डाटा कलेक्ट करके उन्हें आधुनिक और समर्थ बनाया जाये।
तथ्य: पिछले तीन साल में सबसे ज्यादा किसानों ने खुदकशी की कर्ज और भुखमरी से परेशान हो कर।
एक था मोदी – जो मनमोहन सिंह के दिये आधार कार्ड का मजाक उड़ाता था।
तथ्य: आज सरकार ने हर योजना के लिये आधार कार्ड जरूरी कर दिया गया है।
एक था मोदी – जो मनरेगा को कांग्रेस की विफलताओं की स्मारक, GST को घातक और FDI को देश विरोधी बताता था।
तथ्य: आज मनरेगा में पहले से ज्यादा पैसा लगाया जा रहा है, FDI और GST देश हित में बताये जा रहे हैं।
एक था मोदी – जो चाय पर चर्चा में लोगों को बताता था कि देश के बाहर इतना काला धन है कि वह आ जाये तो हर एक के खाते में 15-15 लाख आ जायें।
तथ्य: सुप्रीम कोर्ट के बार बार कहने के बावजूद मोदी सरकार में उन काले धन वालों के नाम तक सार्वजनिक करने की हिम्मत नहीं है जिनकी सूची विदेशी बैंकों ने सरकार को दी है।
एक था मोदी – जो माँ बेटे की सरकार को जम कर कोसता था कि उसकी सरकार आते ही सारे भ्रष्टाचारी कांग्रेसी जेल में होंगे।
तथ्य: तीन साल में किसी भी कांग्रेसी का एक कुत्ता तक भी जेल न भेजा जा सका, उल्टे सारे अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को अपनी BJP में भर्ती कर लिया।
एक था मोदी – जो मंहगाई को माँ बेटे की सरकार की देन बताता था और उसके मूर्ख चेले चपाटे मोदी सरकार आते ही डालर 32 रुपये का करवा रहे थे।
तथ्य: डालर अपने सबसे महंगे स्तर पर है, रुपया दिनोदिन कमजोर हो रहा है और तो और सभी अन्य देशों में पेट्रोल डीजल की कीमतें आधी हो गई पर भारत में पैट्रोल अब भी 84 रुपये तक बिक रहा है, सभी रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ते जा रहे हैं, सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी और नया सेस टैक्स लगने की वजह से सब कुछ मंहगा हो गया है, मगर अब इसे ही विकास बताया जा रहा है।

एक था मोदी – जो भरोसा दिलाता था कि उसके आते ही आतंकवाद दम तोड़ देगा।

तथ्य: दिनों दिन आतंकी घटनाओं में तेजी वृद्धि होती जा रही है, पिछले सालों में शांत रहा कश्मीर आज बीजेपी की सरकार आने के बाद हर रोज सुलग रहा है लेकिन इसे ऑल इज वेल की श्रेणी में रख दिया गया गया है।

कितनी बेशर्मी से कस कर आंखें बंद कर रखी हैं इस मोदी ने
अब तो जागो देशवासियों ।

NRC पर देश को गुमराह कर रही भाजपा, NRC का सत्य कुछ और है

अमित शाह ने आज राज्यसभा में बयान दिया कि #कांग्रेस में एनआरसी अपडेट करने की हिम्मत नहीं थी, इसलिए भाजपा ये काम कर रही है। भाजपा अध्यक्ष ने यह सवाल भी किया है कि क्या विपक्षी पार्टियां “बांग्लादेशी घुसपैठियों” को बचाना चाह रही हैं?

तो अब जरा तथ्यों पर गौर फरमाएं और तय करें कि किस पार्टी ने एनआरसी अपडेट करने की दिशा में कितने काम किए।

— 1985 — #कांग्रेस नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और आॅल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) ने 1985 में असम समझौते पर दस्तखत किए थे, जिसमें अवैध बांग्लादेशियों की पहचान के लिए एनआरसी अपडेट करने पर सहमति बनी थी। तय किया गया था कि 24 मार्च 1971 की आधी रात के बाद से अवैध रूप से राज्य में घुस आए बांग्लादेशी नागरिकों का पता लगाने की कोशिश जाएगी।

— 2005 — #कांग्रेस नेता एवं असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और केंद्र सरकार के बीच एक अन्य समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें एनआरसी जारी करने का निर्णय लिया गया। गोगोई सरकार ने कुछ जिलों में पायलट परियोजना के रूप में एनआरसी अपडेट करने का काम शुरू किया था, लेकिन राज्य के कुछ हिस्सों में हिंसा के बाद इस पर रोक लगा दी गई।

— 2009 — जुलाई 2009 में असम पब्लिक वर्क नाम के एनजीओ ने राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने और मतदाताओं की सूची से उनके नामों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद कोर्ट ने इस काम को जल्द पूरा करने का आदेश दिया।

— 2013 — सुप्रीम कोर्ट ने 1951 के एनआरसी को अपडेट करने के आदेश दिए। केंद्र और असम की #कांग्रेस सरकारों ने जरूरी तैयारियां शुरू की।

— 2014 — केंद्र में भाजपा की सरकार आ गई।

— 2015 — असम में तरुण गोगोई की #कांग्रेस सरकार ने औपचारिक रूप से एनआरसी अपडेट करने का काम शुरू किया। आवेदन फॉर्म बांटे गए। फॉर्म जमा भी लिए गए।

— 2016 — साल की शुरुआत में असम की #कांग्रेस सरकार ने वेरीफिकेशन यानी सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। फिर कुछ ही महीने बाद राज्य में भाजपा की सरकार बन गई और यह प्रक्रिया जारी रही। जाहिर है, सुप्रीम कोर्ट का आदेश होने के कारण इसे जारी रखना ही था।

— 2017 — 31 दिसंबर की आधी रात को एनआरसी के मसौदे का पहला हिस्सा प्रकाशित किया गया।

— 2018 — 17 फरवरी से 6 जून तक हर परिवार की वंशावली (फैमि​ली ट्री) की वेरीफिकेशन शुरू हुई।

2 अप्रैल से 7 जुलाई तक विशेष सत्यापन प्र​क्रिया चली।

30 जुलाई 2018 — एनआरसी का पूरा मसौदा प्रकाशित किया  गया

 

 

अमित शाह ने आज राज्यसभा में बयान दिया कि #कांग्रेस में एनआरसी अपडेट करने की हिम्मत नहीं थी, इसलिए भाजपा ये काम कर रही है। भाजपा अध्यक्ष ने यह सवाल भी किया है कि क्या विपक्षी पार्टियां “बांग्लादेशी घुसपैठियों” को बचाना चाह रही हैं?

तो अब जरा तथ्यों पर गौर फरमाएं और तय करें कि किस पार्टी ने एनआरसी अपडेट करने की दिशा में कितने काम किए।

— 1985 — #कांग्रेस नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और आॅल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) ने 1985 में असम समझौते पर दस्तखत किए थे, जिसमें अवैध बांग्लादेशियों की पहचान के लिए एनआरसी अपडेट करने पर सहमति बनी थी। तय किया गया था कि 24 मार्च 1971 की आधी रात के बाद से अवैध रूप से राज्य में घुस आए बांग्लादेशी नागरिकों का पता लगाने की कोशिश जाएगी।

— 2005 — #कांग्रेस नेता एवं असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और केंद्र सरकार के बीच एक अन्य समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें एनआरसी जारी करने का निर्णय लिया गया। गोगोई सरकार ने कुछ जिलों में पायलट परियोजना के रूप में एनआरसी अपडेट करने का काम शुरू किया था, लेकिन राज्य के कुछ हिस्सों में हिंसा के बाद इस पर रोक लगा दी गई।

— 2009 — जुलाई 2009 में असम पब्लिक वर्क नाम के एनजीओ ने राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने और मतदाताओं की सूची से उनके नामों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद कोर्ट ने इस काम को जल्द पूरा करने का आदेश दिया।

— 2013 — सुप्रीम कोर्ट ने 1951 के एनआरसी को अपडेट करने के आदेश दिए। केंद्र और असम की #कांग्रेस सरकारों ने जरूरी तैयारियां शुरू की।

— 2014 — केंद्र में भाजपा की सरकार आ गई।

— 2015 — असम में तरुण गोगोई की #कांग्रेस सरकार ने औपचारिक रूप से एनआरसी अपडेट करने का काम शुरू किया। आवेदन फॉर्म बांटे गए। फॉर्म जमा भी लिए गए।

— 2016 — साल की शुरुआत में असम की #कांग्रेस सरकार ने वेरीफिकेशन यानी सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। फिर कुछ ही महीने बाद राज्य में भाजपा की सरकार बन गई और यह प्रक्रिया जारी रही। जाहिर है, सुप्रीम कोर्ट का आदेश होने के कारण इसे जारी रखना ही था।

— 2017 — 31 दिसंबर की आधी रात को एनआरसी के मसौदे का पहला हिस्सा प्रकाशित किया गया।

— 2018 — 17 फरवरी से 6 जून तक हर परिवार की वंशावली (फैमि​ली ट्री) की वेरीफिकेशन शुरू हुई।

2 अप्रैल से 7 जुलाई तक विशेष सत्यापन प्र​क्रिया चली।

30 जुलाई 2018 — एनआरसी का पूरा मसौदा प्रकाशित किया गया।

 

शर्मनाक : बिहार में 40 लड़कियों के बलात्कारी पर मेहरबान नीतीश सरकार

बिहार के मुज्ज़फरपुर में बालिका गृह में 40 बच्चियों के साथ रेप करने की पुष्टि हुई। बच्चियों को दवा देकर उनके साथ दुष्कर्म करने की बात सामने आई। उसके बाद बालिका गृह को चलाने वाले ब्रजेश ठाकुर का नाम सामने आया वो जिसकी पहुँच सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक है।
वो शख्स जिसने अपने उसी रुतबे का इस्तेमाल करते हुए करोड़ो रुपए सरकार से बालिका गृह के नाम पर लेता रहा, उसे कानून का कैसा डर वो तो मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ ऐसे नज़र आ रहा है जैसे वो कह रहा हो कर लो करते बने क्योंकि बिहार में बहार है और मेरी जेब में नीतीश कुमार है।

मुज्ज़फरपुर में एक नारी निकेतन में बच्चियों को नशा देकर लम्बे समय तक रेप होने का आरोप लग रहा है। इसे बालिका गृह है जो एक एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति की तरफ से चलाया जाता था जिसमें 42 लड़कियां रह रही थी।

देश भर की महिलाएं बिहार के मुजफ्फरपुर कांड के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। मुजफ्फरपुर में सेवा संकल्प एंव विकास समिति नाम के एक एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे लड़कियों के संरक्षण गृह में दिल दहला देने वाली जानकारियां सामने आई हैं। यहां रहने वाली लड़कियों के यौन शोषण के साथ ही भयानक यातनाएं देने के सनसनीखेज़ खुलासे हुए हैं। और अब इसी किस्म की जानकारियां बिहार सरकार की मदद से चल रहे दूसरे संरक्षण गृहों के बारे में भी सामने आ रही हैं।

बिहार की राजनीति में भूचाल ला देने वाले मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. बालिका गृह में रखी गईं 29 नाबालिग लड़कियों में से 6 लड़कियां गर्भवती गई थीं. जिसमें से तीन लड़कियों का गर्भपात करवाया गया था, ये बातें मेडिकल जांच में सामने आई हैं. मेडिकल जांच में की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गर्भवती हुई लड़कियों की उम्र महज़ सात से 14 वर्ष के बीच है।
मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराने के दौरान एक दस साल की बच्ची ने कहा कि शाम होते ही बालिका गृह की लड़कियों के बीच खौफ फैल जाता थी. बालिका गृह में उनकी रातें आतंक की तरह बीतती थीं. दस साल की ही एक और पीड़िता ने बताया कि कहना नहीं मानने वाली बच्चियों की वे डंडों से पिटाई करते थे. वहीं 14 साल की एक दूसरी बच्ची के मुताबिक बृजेश के बालिका गृह आते ही कई लड़कियां तो खौफ से कांपने लगती थीं. लड़कियां उसे हंटरवाला अंकल कहती थीं।
इतनी बड़ी घटना के बाद भी सरकार नींद से नही जाग रही है।


इंसान की दरिंदगी का शिकार हुईं इन बच्चियों ने बताया जब वह तोंदवाला और मूंछवाला नेताजी वहां होते थे तो किसी को भी कमरे में आने की इजाजत नहीं होती थी. बच्चियों ने अदालत को बताया कि वहां काम करने वाली किरण हमारी शिकायतों को बार-बार नजरअंदाज कर देती थी, और दूसरी कर्मचारी नेहा ऐसी शिकायत करने पर वह बुरी इन बच्चियों को बुरी तरह प्रताड़ित करती थी. बता दें कि किरण और नेहा को भी इस मामले में 10 आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया है।
बालिका गृह के सारे गुनहगार लोगों के सामने होने चाहिए।और इनकी सजा सिर्फ मौत होनी चाहिए।बालिका गृह के मुखिया जो ड्यूटी पर होते है सभी लोगों रेपिस्ट को जानते हैं।एक भी गुनहगार छुप नही सकता।अगर इस पर न्याय नहीं हुआ तो वहां सारे नेताओं को डूब मरना चाहिए।

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भाजपा का घिनौनापन फिर हुआ बेनकाब, राहुल गाँधी के तस्वीरों से छेड़छाड़ कर फैलाया झूठ

भाजपा it सेल देश मे फोटोशॉप के माध्यम से दंगा भड़काने में तो आगे रहती है थी अब चरित्रहनन करने के लिये भी फोटोशॉप का सहारा लेकर देश के विपक्षी नेताओं को नीचा दिखाने का प्रयास कर रही है।

जैसा कि भाजपा आईटी सेल फेक फोटो, फेक विडियो एडिटिंग के मामले मे लगातार विवादो मे रहती है वैसे ही आज एक बार फिर से सोशल मीडिया पर एक राहुल गांधी फोटो वायरल भाजपा सोशल मीडिया के टीम द्वारा हो रहा है जिसमे दिखाया जा रहा है कि वो ” पोर्न विडियो देख रहे है ” लेकिन जब हमने हकीकत जानने की कोशिश की तो हमने पाया कि ये राहुल गांधी की तस्वीर एडिटिंग है असली तस्वीर नोटबंदी के वक्त नोट गिनते की है, इसकी ओरिजिनल तस्वीर आपको भी गूगल पर आसानी से मिल जायेगी

इसमे एक और बात सामने आयी है कि राहुल गांधी का फोटो तो एडिट कर लिया लेकिन इसमें अंगूठा सही स्पष्ट तौर पर दिखाई नही दे रहा है मतलब साफ है अगर कोई भी जिम्मेदार यूजर अगर तस्वीर को ठीक से देखेगा तो फर्जीवाडा यही सामने आ जायेगा

भाजपा द्वारा फोटोशॉप कर फैलाया जा रहा झूठा फोटो

 

नोटबन्दी के दौरान एक बैंक के लाइन में लगे राहुल गाँधी का ओरिजनल तस्वीर

आज की राजनीति मूल मुद्दो से भटक फेक फोटो, विडियो एडिटिग तक ही सीमित रह गई आईटी सेल का काम फोटोशॉप करना, किसी की छवि को खराब करना ही मात्र रह गई जो लोकतंत्र के लिये ठीक नही हैं

सवाल पूछने वाले नेताओं का चरित्रहनन कर चुप करवाने की सोच रखने वाली भाजपा को ये अब पता चल गया हो कि सोशल मीडिया में अगर झूठ फैलाया जा सकता है तो उस झूठ को बेनकाब करके उसका सच्चाई भी लोगो तक पहुंचाया जा सकता है।

जो भाजपा वाले बिहार के 40 बच्चियों के बलात्कार पर कुछ ना बोल पाए वो झूठी फोटो के सहारे खुद को बचाने का नाकामयाब प्रयास कर रहे हैं जिसे सामने लाना हम भारतीयों का दायित्व है।

लुटेरे उद्योगपतियों के साथ खड़े होने वाले मोदी किसानों के साथ खड़े होने में क्यों डरते हैं ?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि हिन्दुस्तान को बनाने में उद्योगपतियों की भी भूमिका होती है और उन्हें चोर लुटेरा कहना या अपमानित करना पूर्णतया गलत है।
    मोदीजी ने साढ़े चार साल बाद यह जवाब खोजा है कि वे उद्योगपतियों के साथ खुले में मिलते हैं। फोटो खींचाते हैं। उनकी नीयत साफ है। गांधी जी की तरह नीयत साफ है। गांधी जी भी बिड़ला जी के साथ जाकर रहते थे क्योंकि उनकी नीयत साफ थी। बिड़ला जी और अदानी जी और अंबानी जी की तुलना हो सकती है या नहीं हो सकती है इसका जवाब एक लाइन में नहीं दिया जा सकता है।
    कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, “प्रधानमंत्री को ऐसे लोगों के साथ तस्वीर खिंचाने में कोई समस्या नहीं है जिन पर बैंकों को ठगने और एंटीगुआ, लंदन या शायद धरती से गायब होने का आरोप है, तो मैं उनकी सच्चाई और प्रतिष्ठा को ऐसे उद्योगपतियों को देने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री मोदी की समझ पर छोड़ता हूं।”
    मोदीजी द्वारा खुद की तुलना महात्मा गांधी से कर ली “इससे ज्यादा चौंकाने वाला क्या होगा कि प्रधानमंत्री ने अपनी तुलना महात्मा गांधी से की।” वे उद्योगपति महात्मा गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ थे और उनका लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता थी। ऐसे उद्योगपति नहीं जिन्होंने देश के बैंकिंग तंत्र को ठगकर जनता के हजारों करोड़ रुपये लेकर भाग गए

    सरकार की नीतियों को उद्योग के अनुकूल होना चाहिए, लेकिन सिर्फ कुछ उद्योगपतियों के अनुकूल नहीं होना चाहिए। पीएम को उद्योग के पक्ष में खड़ा होना चाहिए, लेकिन सिर्फ कुछ उद्योगपतियों के हितों के साथ खड़ा होना चाहिए। कोई भी बता सकता है कि कौन से उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा है।

    बहरहाल, यह बात छोड़कर यह पूछें कि एक निजी कंपनी को बिना अनुभव के आधार पर करोड़ों का यह कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया गया क्या इसलिए कि प्रधानमंत्री जैसा कहते हैं – उनके उद्योगपतियों से रिश्ते हैं और उनके मुताबिक उद्योगपति देश की तरक्की में बड़ी भूमिका अदा करते हैं…? क्या यह कॉन्ट्रैक्ट रिश्तों का खेल है…?
    सरकारें ऐसे खेल खेलती रहती हैं, इसका एक और सबूत पिछले दिनों तब दिखा, जब सर्वोत्कृष्ट संस्थानों के चयन में रिलायंस के जियो इंस्टीट्यूट को देश के गिने-चुने संस्थानों में शामिल किया गया. जब यह बात सामने आई कि जियो इंस्टीट्यूट तो अभी बना ही नहीं है, तब बताया गया कि उन्हें संभावनाशील संस्थानों की सूची में रखा गया है. ज़ाहिर है, यह भी अपनों के प्रति ममत्व का एक और उदाहरण है.
    लेकिन मामला सिर्फ नेताओं-उद्योगपतियों के रिश्तों का नहीं है, उस दृष्टि का भी है, जो प्रधानमंत्री की बात में दिखाई पड़ती है. वह इस बात को रेखांकित करते हैं कि देश के विकास में उद्योगपतियों का भी योगदान है. निश्चय ही यह योगदान होगा, लेकिन क्या भारत के उद्योगपति इस देश के गरीबों के मुकाबले देश का ज़्यादा भला कर रहे हैं…? बिलकुल नही वो भला सिर्फ अपना कर रहे है ये बात शायद हमारे प्रधानमंत्री जी को समझ नही आ रही है… या जानकर आंखे बंद किये हुए है बहरहाल अब देश का जो होना वो तो होके रहेगा। हर आंकड़ा इसी बात की तसदीक करता है कि इस देश में पिछले कुछ वक्त से अमीरों की अमीरी भी बढ़ती गई है और गरीबों की गरीबी भी. ज़ाहिर है, देश का जो भी विकास हुआ हो, उसके सबसे ज़्यादा फ़ायदे उद्योगपतियों ने लिए हैं. ऑक्सफैम की रिपोर्ट बताती है कि इस देश की 73 फ़ीसदी दौलत पर बस एक फ़ीसदी आबादी का कब्ज़ा है. बीते साल यह कब्ज़ा 58 फ़ीसदी का था. इस एक साल में इस एक फ़ीसदी आबादी की दौलत 20 लाख करोड़ बढ़ गई।

शर्मनाक : अमित शाह का विरोध करने पर छात्राओं के साथ यूपी पुलिस ने किया बर्बरतापूर्ण व्यवहार

 

 

अमित शाह की इलाहाबाद रैली के दौरान छात्राओं ने उन्हें काले झण्डे दिखाए। इसके बाद मौज़ूद पुलिसकर्मी ने लड़कियों पर लाठियाँ बरसाई। महिला पुलिसकर्मियों का कोई नामोनिशान नहीं दिखा बाद में छात्राओं को जेल भेज दिया गया। उन पर शांतिभंग की धारा 147 आदि लगाई गई है।

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को काले झंडे दिखाने में उत्तर प्रदेश के छात्रों ने रिकॉर्ड बनाया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने लड़कियों पर लाठी चलाई, उनके बाल खींचे, घसीटते हुए जीप में डाला और उन्हें गिरफ्तार करके थाने ले गई। ये छात्र-छात्राएं अमित शाह से मांग कर रहे थे कि उत्तर प्रदेश में छात्रों के ऊपर जो कहर बरपाया जा रहा है, उसे बंद किया जाये।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 27 जुलाई को इलाहाबाद हवाईअड्डे से जैसे ही बाहर निकले तो उनके कारवां को काला झंडा दिखाने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय की दो छात्राएं नेहा यादव और रमा यादव सड़क पर आ गई बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह संगमनगरी इलाहाबाद के दौरे पर थे। इसी दौरान शाह के काफिले के आगे दो छात्राए अचानक काले झंडे लेकर उनका विरोध करने लगी इससे पहले की कोई कुछ समझ पाता योगी सरकार की पुलिस ने बेहद ही शर्मनाक तरीके से लाठियां मारनी शुरू कर दी और बाल खीचते हुए पुलिस की जीप में ठूस दिया।

अमित शाह को काले झंडे दिखाने वाली लड़कियों के साथ योगी की पुलिस लगातार ज्यादती कर रही है। प्रदर्शन के दौरान पहले बाल पकड़कर घसीटा, पुरुष पुलिस वालों ने लाठियां बरसाई और उसके बाद गिरफ्तार कर लिया।
सामान्य धाराओं के तहत गिरफ्तार लड़कियों को जमानत नहीं दी गई। दो बेटियों की खुले विरोध के बाद घबराई योगी सरकार उनके दमन की साजिश रच रही है। तमाम कोशिशों के बाद नेहा वर्मा को जमानत नहीं दी गई बल्कि उन्हें नैनी जेल भेज दिया है।

जिस तरह से पुलिस ने अपनी बर्बरता दिखाई है वो कहीं से भी पुलिस का काम नज़र नहीं आता। क्योंकि एक महिला पर पुरुष पुलिस वाले का लाठियां बरसना पूरी तरह से गलत है। मगर इस मुद्दे पर कभी डिबेट नहीं होगी क्योंकि ये मुद्दा हिन्दू मुसलमान का नहीं है ये बीजेपी विरोधियों की श्रेणी में आता है और टीवी का मीडिया पुलिस के इस चेहरे को कभी भी बहस का मुद्दा नहीं बनाएगा।

इस दौरान आनन-फानन में अमित शाह के सुरक्षाकर्मियों ने सुरक्षा के लिहाज से तुरंत ही प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान पुलिस के वाहन में बैठाने के पहले एक सुरक्षागार्ड एक छात्रा के पैर पर लाठी से प्रहार कर देता है। वहीं, इस वीडियो में दिख रहा है कि इन दौरान इस पुलिसकर्मी एक छात्रा के बाल पकड़कर उसे गाड़ी में बैठा रहा है। बता दें कि इस घटना के वजह से कुछ देर के लिए काफिले की गाड़ियों को रुकना भी पड़ा।

साल 2015 की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने 22 जनवरी को ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना की शुरुआत की। इस योजना की शुरुआत को एक अच्छी पहल माना गया।

पीएम मोदी ने उस वक़्त दिए अपने भाषण में कहा था कि बेटियों के जन्म पर उनकों बोझ न समझे बल्कि उनको बेहतर शिक्षा देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए ताकि वह भी सिर उठाकर समाज के साथ चल सकें।

मगर उसके बाद से हालत बद से बदतर होते चले गए और मीडिया या कहा जाये गोदी मीडिया शांत रहा वो अब भी शांत है जब छात्राओं को गिरफ्तार कर जेल में ठूस दिया है तब भी। जिस तरह से पुलिस ने अपनी बर्बरता दिखाई है वो कहीं से भी पुलिस का काम नज़र नहीं आता। क्योंकि एक महिला पर पुरुष पुलिस वाले का लाठियां बरसना पूरी तरह से गलत है। मगर इस मुद्दे पर कभी डिबेट नहीं होगी क्योंकि ये मुद्दा हिन्दू मुसलमान का नहीं है ये बीजेपी विरोधियों की श्रेणी में आता है और टीवी का मीडिया पुलिस के इस चेहरे को कभी भी बहस का मुद्दा नहीं बनाएगा।

राहुल के दावा सही राफेल पर झूठ बोल रही मोदी सरकार, ये रहे सबूत

तफ़्रांस के साथ गोपनीयता समझौता 2008 में UPA सरकार ने किया और उस समझौते के रहते हुए भी अपनी डील में प्लेन की कीमत सार्वजनिक की.. तब फ़्रांस को कोई आपत्ति नहीं थी.
मोदी ने वो डील अपने दोस्त को लाभ पहुँचाने के लिए रद्द कर दी और तीन गुना अधिक कीमत पर बिना टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर के जहाज़ खरीदने की बात की..
इस डील के साथ कोई गोपनीयता समझौता नहीं हुआ है, UPA वाला गोपनीयता समझौता डील के रद्द होते ही स्वयमेव रद्द हो गया है. जिसे रक्षा मंत्री बार बार दुहरा रही हैं वो समझौता स्वयं मोदी ने रद्द किया है..
मोदी जी साफ़ साफ़ बताएं कि कितने अरब रूपये की दलाली बीजेपी ने खाई और एक नाकाम धन्धेबाज़ जिस पर 3500000000000 का क़र्ज़ है उसे इतना महत्वपूर्ण ठेका बिना अनुभव के कैसे दिया गया?
राहुल जी ने सटीक चेतावनी दी है कि 2019 में सत्ता से बाहर जाते ही तुम पर कार्यवाही होगी और सच सामने आएगा.
पहली बार.. 70 साल में पहली बार कमज़ोर विपक्ष ने .. जिस के सिर्फ 48 सांसद हैं, ने एक पूर्ण बहुमत के PM पर कार्यवाही की बात की है.. ये अपने आप में राहुल के कॉन्फिडेंस और देश के मूड को परिलक्षित करता है.
अबकी तिहाड़ में मेला लगेगा..

राहुल गाँधी का लड़ाई झूठ और नफरत से है

राहुल तुम्हारा मुक़ाबला झूठो से है……..

जिस पार्टी ने 49 साल के शासन काल में देश को एक भी मुस्लिम प्रधानमंत्री नहीं दिया हो, देश के वर्तमान प्रधानमंत्री बड़ी सफाई के साथ उसे मुसलमानों की पार्टी करार देते हुए ये ऐलान कर देते हैं की भले ही (कथित रूप से) उनकी सरकार ने चार सालों में इतना काम किया है जितना आज़ादी के बाद से लेकर उनकी सरकार बनने तक़ सब सरकारों ने मिलकर भी नहीं किया है फिर भी वो 2019 का आम चुनाव हिंदू मुसलमान करते-करते ही लड़ेंगे।

सत्तर सालों के इतिहास में शायद पहली बार देश ने ऐसा प्रधानमंत्री देखा होगा जिसने झूठ पर विजय पा लिया है, जो तथ्य खुद ही गढ़ लेता हो। और तो और गोदी मीडिया में भी उनके मूंह से निकले हर वाक्य को सच की कसौटी पर परखे बिना ही सच की तरह पेश कर डालने की एक होड़ सी मची हुई है। उनके भाषणों की टीवी चैनल और अखबारों के पन्नों पर दिखाते और लिखते समय सवालिया निशान (?) का इतनी चालाकी से इस्तेमाल किया जाता है की आप शक़ भी नहीं कर पाएंगे और उनके किसी कथित दावे को और झूठी बातों को सच बनाकर आपके ज़हन में उतार दिया जायेगा।

सबसे तेज़ रहने की होड़ में अखबारों और चैनलों को इतनी फुर्सत ही नहीं बची है की वो प्रधानमंत्री जी के भाषणों का विश्लेषण करके सच और झूठ को अलग-अलग करके जनता के सामने पेश करने के अपने फर्ज को ईमानदारी से अंजाम दे सके। लिहाज़ा सच और झूठ की मिली जुली खिचड़ी पर ही ब्रेकिंग न्यूज़ का तड़का लगाकर धड़ा-धड़ परोसा जा रहा है। पतंजलि से लेकर जियो के विज्ञापनों के शोर में उनके भाषणों में ज़ोर-ज़ोर से बोला गया झूठ इतनी आसानी से दबा दिया जाता है की जनता को भनक भी नहीं लग पाती।

चुनाव नज़दीक आते ही नये नवेले तथ्यों को गढ़कर उसे सच की चाशनी में डुबोकर जनता के सामने पेश करने का सिलसिला बड़ी तेज़ी से शुरू हो जाता है। और लाजवाब भाषण शैली और मोदी मोदी मोदी के शोर के बेहतरीन कांबिनेशन के बीच उसे इस तरह से सजा धजाकर जनता की अदालत में पेश किया जाता है की उसके सामने अच्छा खासा सच भी बौना नज़र आने लगता है। मोदी जी की कल की आजमगढ़ की रैली में कही गयी दो प्रमुख बातों “कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी और चार सालों में 70 सालों से ज़्यादा काम” के बारे में किसी जानकार व्यक्ति से पूछेंगें तो हंसते हंसते इन दोनों बातों को सिरे से झूठ करार देने में दो पल भी नहीं लगाएगा।

दरअसल मोदी जी ने देश की 125 करोड़ जनता को किसी वाट्सएप ग्रूप का सदस्य समझ कर उसे उसी तरह से ट्रीट करना शुरू कर दिया है। कि जिसे (किसी कथित मैसेज की) सही और गलत की पहचान करने ज़्यादा ये चिंता रहती है की कितनी जल्दी इसे दूसरों तक़ पहुँचाकर पुण्य हासिल किया जाए या उसे कथित तौर पर किसी ऐसी घटना के प्रति अवेयर करा दिया जाय जिसका अस्तित्व ही नहीं है। पिछले चार सालों में वाट्सएप के जिस सड़ांध मारते कचरे (कथित ज्ञान) के ज़रिये लोगों के ज़हनों को संक्रमित किया गया है वो कचरा ज्ञान अब चुनावी मंचों से पूरे देश को परोसा जा रहा है क्योंकि अब हमारा दिमाग उस चीज़ का आदि हो चुका लिहाज़ा हमें इससे कोई मतलब नहीं की परोसा जा रहा तथ्य सही है या नहीं हमें तो बस उसे आगे फाॅरवर्ड करके लोगों का कथित रूप से भला करना है।

राहुल गांधी को अब ये अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए की उनका मुकाबला एक ऐसे नेता है जिसे सच और झूठ से कोई मतलब नहीं है। वो मंचों पर कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी भी बता सकता है और राहुल गांधी को राहिल खान साबित करने में उसे तनिक भी देर नहीं लगेगी क्योंकि अब लोकतंत्र का चौथा खंभा सत्ताधारी नेताओं की रखवाली ना करके विपक्षी नेताओं का बोरिया-बिस्तर बांधने की उनके सपने को पूरा करने की मुहिम का हिस्सा बन चुका है। लिहाज़ा राहुल को अपनी और अपनी पार्टी की स्ट्रेटजी बदलनी होगी वरना ये झूठ बोल-बोल कर सच को यूं ही सरेआम परेशान करते रहेंगे। और राहुल और उनकी कांग्रेस सब कुछ छोड़कर अपना और अपने नेता का बचाव करने में ही खुद को खपाती रहेगी और उनका मक़सद भी बस इतना सा ही है।

 

शिवराज जी को आशीर्वाद क्यो दे ये

 

शिवराज जी को आशीर्वाद क्यों दें ?
आशीर्वाद के हकदार शिवराज आपके द्वार
का पोस्टर देख कर मन में विचार आया कि आखिर ऐसा किया क्या है शिवराज जी ने पिछले 14 सालों में जो यह हकदार बन रहे हैं मुझे याद आता है यह वही शिवराज है जिन्होंने मां नर्मदा की गोद में खड़े होकर कसम खाई थी कि मैं जीवनभर अविवाहित रहूंगा खैर ये उनका व्यक्तिगत मामला है
मध्य प्रदेश की जनता ने जिस पर विश्वास कर वोट देकर चुनाव जिताया उमा भारती जी को षड्यंत्र पूर्वक हटवाया गया फिर मध्य प्रदेश के विधायक रहे बाबूलाल गौर जी को वृद्ध होने का कहकर पद से हटाकर स्वयं आकर बैठ गए
फिर लगातार झूठ भ्रम और फरेब की चालों से भोली भाली जनता को छल छल कर दो बार और जीत गए प्रदेश के हजारों युवाओं के भविष्य की हत्या करने वाला व्यापम घोटाला ( हजारों होनहार छात्र इससे प्रभावित हुए,)जो हमको शर्मसार करता है इनके मुख्यमंत्रित्व काल मे ही हुआ है!
आज प्रदेश 2 लाख करोड़ के कर्ज में है प्रदेश का हर नागरिक ₹18000 के कर्ज में दबा पड़ा है प्रदेश में किसानों की गोली मारकर हत्या की जा रही है किसान आत्महत्या हो रही है मध्य प्रदेश का नाम छोटी बच्चियों के बलात्कार से पूरे विश्व में बदनाम हो चुका है छोटे-छोटे बच्चे कुपोषण का शिकार है ऐसा कौन सा वर्ग है ,चाहे महिला हो, युवा हो ,सरकारी कर्मचारी हो व्यापारि ,मजदूर,किसान, शिक्षक हो हर वर्ग त्रस्त, परेशान है पूरे देश में सबसे महंगा पेट्रोल डीजल मध्यप्रदेश में बिकता है ऐसा कौन सा क्षेत्र है जिसमें भ्रष्टाचार अंतिम चरम तक ना हो रहा हो ?चाहे वह पर्यावरण के साथ धोखा हो (नर्मदा वृक्षारोपण वाला मामला) चाहे वह धर्म हो (सिहस्थ का घोटाला और महाकालेश्वर पर अघोषित कब्जा हो ) जंहा शिवराज जी के शासन में बच्चे कुपोषण से मरे, किसान आत्महत्या करें छोटी बच्चियों पर दुष्कर्म लगातार होते रहे वहां जनकल्याण की बात करना बेमानी है
इनकी पार्टी के अध्यक्ष को कुर्सी के लालच में प्रभावित करने के लिए जन आशीर्वाद वह भी बसों में भरकर लाया जाएगा हर मंडल और पार्षद को सड़कों पर येन केन प्रकारेण भीड़ लाने की जवाबदारी दी गई है यह कैसा जन आशीर्वाद चाहते हैं
मेरी अपील है उज्जैन वासियों से कि घर में बैठे युवाओं की बेरोजगारी नित बढ़ती हुई महंगाई अन्नदाता किसानों की फजीहत व्यापारियों की परेशानी और प्रदेश का नाम बलात्कार में नंबर 1 करने के मुद्दों को याद कर विचार अवश्य करें कि क्या यह आपके आशीर्वाद के हकदार हैं आपका,,,

विवेक यादव ^विक्की^
अध्यक्ष शहर कांग्रेस उज्जैन( activ)

मोदी के विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (7 जुलाई) को राजस्थान के अपने एक दिवसीय दौरे के तहत सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद किया। इसके लिए प्रधानमंत्री-लाभार्थी जनसंवाद नाम से रैली का आयोजन किया गया लेकिन इस मौके पर वे लोग रैली पंडाल में कथित तौर पर प्रवेश नहीं पा सके जिन्होंने काले कपड़े पहने हुए थे। जिन लोगों ने काली शर्ट, काली पैंट या काली बनियान में से कोई भी कपड़ा पहना हुआ, उन्हें भी एंट्री नहीं मिली। कुछ लोगों ने दावा किया कि प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच के दौरान उनकी काली बनियान तक को उतरवाकर देखा गया और फिर लौटा दिया गया। काले कपड़े पहनकर आने वाले लोगों ने रैली में शामिल न हो पाने पर मायूसी बयां की। किसी ने कहा कि उनके साथ आए बाकी लोग पंडाल में प्रवेश पा गए हैं लेकिन काले कपड़े पहने होने के कारण उन्हें बाहर रोक दिया गया। कुछ एक लोगों ने यहां तक दावा किया के उन्होंने शर्ट बदल ली लेकिन पेंट काली होने कारण उन्हें लौटा दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी वर्ष झुंझनू में एक रैली के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की रैली में कुछ लोगों ने विरोध स्वरूप काले झंडे दिखाए थे। इसी आशंका के चलते इस बार पहले से एहतियात बरती गई और रैली पंडाल में काले कपड़ों पर बैन लगा दिया गया। बता दें कि रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान को करीब 2100 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का उपहार दिया। पीएम मोदी ने 13 शहरी परियोजनाओं के शिलान्यास का अनावरण किया। इस दौरान सूबे की सरकार की 12 योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों के अनुभवों को भी ऑडियो विजुअल माध्यम से दिखाया गया, जिसका संचालन खुद सीएम राजे ने किया। अपने एक दिवसीय दौरे के तहत सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद किया। इसके लिए प्रधानमंत्री-लाभार्थी जनसंवाद नाम से रैली का आयोजन किया गया लेकिन इस मौके पर वे लोग रैली पंडाल में कथित तौर पर प्रवेश नहीं पा सके जिन्होंने काले कपड़े पहने हुए थे। भव्य मंच, विशाल शामियाना, मंझे कलाकार, अभिभूत करने वाली कहानियां और ढाई लाख दर्शक. मजमून देखकर लग रहा है कि किसी बड़े नाटक के मंचन की बात हो रही है, लेकिन यह कथानक है जयपुर में हुए ‘प्रधानमंत्री लाभार्थी जनसंवाद’ का. इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार की 12 फ्लैगशिप योजनाओं के लाभार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रूबरू होना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. कार्यक्रम में मोदी ने तो लच्छेदार भाषण दिया मगर राजस्थान के 33 ज़िलों से आए लगभग 2.5 लाख लाभार्थियों में से एक को भी अपने मन की बात कहने का मौका नहीं मिला। कार्यक्रम में मुखालफत का खौफ सरकार पर किस हद तक हावी रहा इसका अंदाज़ा सभा स्थल पर काले रंग की सभी चीज़ों के निषेध से लगाया जा सकता है. काले कपड़े पहने किसी भी व्यक्ति को कार्यक्रम में प्रवेश नहीं मिला. सुरक्षाकर्मियों ने लोगों से काली बनियान और मोजे तक उतरवा लिए. काली पगड़ी पहने एक सिख लाभार्थी को तो अंदर जाने के लिए ऊपर भाजपा का दुपट्टा लपेटना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचे हुए है। इस मौके पर उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधते हुए उसे बैलगाड़ी करार दिया है। जिस वक़्त मोदी भाषण दे रहे थे ठीक उसी वक़्त कुछ लोगों ने उन्हें काले झंडे दिखाए।
ऐसा तब हुआ जब जनसभा में जाने वालों लोगों पर काला कपड़ा पहनने तक पर कड़ी नज़र रखी हुई थी और उसपर प्रतिबंध लगा दिया था। तब भी उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा और उनके खिलाफ वापस जाओ के नारे भी लगे

मोदी के विरोध के डर से लोगो को रैली के अंदर ही नही जाने दी राजस्थान पुलिस, शर्मनाक :

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (7 जुलाई) को राजस्थान के अपने एक दिवसीय दौरे के तहत सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद किया। इसके लिए प्रधानमंत्री-लाभार्थी जनसंवाद नाम से रैली का आयोजन किया गया लेकिन इस मौके पर वे लोग रैली पंडाल में कथित तौर पर प्रवेश नहीं पा सके जिन्होंने काले कपड़े पहने हुए थे। जिन लोगों ने काली शर्ट, काली पैंट या काली बनियान में से कोई भी कपड़ा पहना हुआ, उन्हें भी एंट्री नहीं मिली। कुछ लोगों ने दावा किया कि प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच के दौरान उनकी काली बनियान तक को उतरवाकर देखा गया और फिर लौटा दिया गया। काले कपड़े पहनकर आने वाले लोगों ने रैली में शामिल न हो पाने पर मायूसी बयां की। किसी ने कहा कि उनके साथ आए बाकी लोग पंडाल में प्रवेश पा गए हैं लेकिन काले कपड़े पहने होने के कारण उन्हें बाहर रोक दिया गया। कुछ एक लोगों ने यहां तक दावा किया के उन्होंने शर्ट बदल ली लेकिन पेंट काली होने कारण उन्हें लौटा दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी वर्ष झुंझनू में एक रैली के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की रैली में कुछ लोगों ने विरोध स्वरूप काले झंडे दिखाए थे। इसी आशंका के चलते इस बार पहले से एहतियात बरती गई और रैली पंडाल में काले कपड़ों पर बैन लगा दिया गया। बता दें कि रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान को करीब 2100 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का उपहार दिया। पीएम मोदी ने 13 शहरी परियोजनाओं के शिलान्यास का अनावरण किया। इस दौरान सूबे की सरकार की 12 योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों के अनुभवों को भी ऑडियो विजुअल माध्यम से दिखाया गया, जिसका संचालन खुद सीएम राजे ने किया। अपने एक दिवसीय दौरे के तहत सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद किया। इसके लिए प्रधानमंत्री-लाभार्थी जनसंवाद नाम से रैली का आयोजन किया गया लेकिन इस मौके पर वे लोग रैली पंडाल में कथित तौर पर प्रवेश नहीं पा सके जिन्होंने काले कपड़े पहने हुए थे। भव्य मंच, विशाल शामियाना, मंझे कलाकार, अभिभूत करने वाली कहानियां और ढाई लाख दर्शक. मजमून देखकर लग रहा है कि किसी बड़े नाटक के मंचन की बात हो रही है, लेकिन यह कथानक है जयपुर में हुए ‘प्रधानमंत्री लाभार्थी जनसंवाद’ का. इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार की 12 फ्लैगशिप योजनाओं के लाभार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रूबरू होना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. कार्यक्रम में मोदी ने तो लच्छेदार भाषण दिया मगर राजस्थान के 33 ज़िलों से आए लगभग 2.5 लाख लाभार्थियों में से एक को भी अपने मन की बात कहने का मौका नहीं मिला। कार्यक्रम में मुखालफत का खौफ सरकार पर किस हद तक हावी रहा इसका अंदाज़ा सभा स्थल पर काले रंग की सभी चीज़ों के निषेध से लगाया जा सकता है. काले कपड़े पहने किसी भी व्यक्ति को कार्यक्रम में प्रवेश नहीं मिला. सुरक्षाकर्मियों ने लोगों से काली बनियान और मोजे तक उतरवा लिए. काली पगड़ी पहने एक सिख लाभार्थी को तो अंदर जाने के लिए ऊपर भाजपा का दुपट्टा लपेटना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचे हुए है। इस मौके पर उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधते हुए उसे बैलगाड़ी करार दिया है। जिस वक़्त मोदी भाषण दे रहे थे ठीक उसी वक़्त कुछ लोगों ने उन्हें काले झंडे दिखाए।
ऐसा तब हुआ जब जनसभा में जाने वालों लोगों पर काला कपड़ा पहनने तक पर कड़ी नज़र रखी हुई थी और उसपर प्रतिबंध लगा दिया था। तब भी उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा और उनके खिलाफ वापस जाओ के नारे भी लगे

रिपोर्ट से शर्मसार हुआ मध्यप्रदेश, भाजपा सरकार मे हर दिन हो रहे 13 बलात्कार :

मध्य प्रदेश में बीजेपी की 15 सालों से सरकार है। बीजेपी महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे भी करती है और ‘बेटी बचाओ’ जैसे नारे बुलंद करती है। लेकिन आंकड़ों पर ग़ौर करें तो मध्य प्रदेश में हर साल रेप के मामलों में बढ़ौतरी हुई है। ऐसे में यह कहना मुश्किल नहीं कि राज्य की शिवराज सरकार रेप की वारदातों को रोकने में नाकाम रही है।

खबरों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में पिछले 120 दिन में 1,554 रेप की घटनाएं हुईं। साल 2018 में एक जनवरी से 30 अप्रैल तक महिलाओं और नाबालिगों से 1,554 ज्यादती के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। यानी प्रदेश में हर दिन करीब 13 रेप की घटनाएं हो रही हैं।

मध्यप्रदेश के मंदसौर मे रेप के मामले को लेकर पहले देश मे बड़ा गुस्सा है। अब राज्य के धार जिले मे 12 साल की एक मासूम के साथ ऐसी ही हैवानियत का मामला सामने आया है।

जानकारी के अनुसार, धार जिले के धामनोद थानाक्षेत्र के साला गांव मे बच्ची के साथ ये दरिंदगी किसी और ने नहीं बल्कि उसके ही मामा ने की है। मामा उदय सिंह ने चुपके से घर में दाखिल होकर पहले बच्ची का मुंह दबाया, फिर उसे पास ही स्थित ईंट के एक भट्टे में सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बड़वानी जिले के सेंधवा में रहने वाली लड़की का ये कलयुगी मामा पर पहले भी रेप का आरोप लग चुका है। इस मामले में उदयसिंह 10 साल की सजा काटने के बाद अभी दो महीने पहले ही जेल से छूट कर घर आय़ा था।

बता दें कि नाबालिग से बलात्कार के मामलों मे मध्यप्रदेश अव्वल स्थान पर है। जिसको लेकर शिवराज सरकार हमेशा विपक्ष के निशाने पर रही है। सतना के पन्ना गांव में 4 साल की बच्ची रेप की शिकार हुई थी। आरोप है कि गांव का ही रहने वाला महेंद्र सिंह नाम का युवक बच्ची को उस वक्त उठा ले गया था, जब वह रात में सो रही थी। गांव से कुछ देर ले जाने के बाद उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और मौके पर ही मासूम को छोड़कर फरार हो गया।
वारदात को अंजाम देने से पहले बच्ची के पिता से मिलने आरोपी उनके घर पहुंचा था। बच्ची के पिता से मिलने के बाद वह चला गया था। बताया जा रहा है उसी दिन आरोपी दूसरी बार करीब रात को 11:30 बजे दोबारा बच्ची के घर पहुंचा और सोती हुई मासूम को उठा ले गया और घर से कुछ दूर लेजाकर घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

आंकड़ों के मुताबिक, इन चार महीनों में सबसे ज्यादा भोपाल में 105 रेप के केस दर्ज किए गए हैं। इसके बाद इंदौर में 82, जबलपुर में 72 और ग्वालियर में 69 मामले सामने आए हैं। यह आंकड़े द थॉमसन रॉयटर्स के सर्वे को गलत ठहराने वालों के लिए ज़रूर चौंकाने वाले हो सकते हैं।

सूबे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए डायल-100 से लेकर मैत्री मोबाइल, शक्ति स्क्वाड, महिला पीसीआर, वी केयर फॉर यू, महिला थाना व अन्य फोरम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन इसके बावजूद मध्य प्रदेश रेप के मामले में देश का नंबर वन राज्य है। 15 साल होने को है मामा ने पूरे प्रदेश को बरबाद कर के रख दिया हिंदुस्तान का दिल हुआ करता था मध्यप्रदेश अब बरबादी के ढेर पे खड़ा है।

✍ शिल्पी सिंह

श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंग्रेजो के तरफ झुकने वाले और स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहने वाले नेता थे :

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उनके कृत्यों का विश्लेषण करें तो वह ना केवल अंग्रेजों की तरफ झुकाव वाला बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की राह में गतिरोध खडा करने वाला दिखाई देता है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भी जिन्ना की तरह अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत कांग्रेस से की थी। वह कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर पहली बार बंगाल प्रांतीय परिषद के सदस्य चुने गये थे। उसके बाद वह आगे चलकर 1939 में सावरकर के प्रभाव में आकर हिंदू महासभा के साथ जुड गये। श्यामा प्रसाद मुखर्जी और सावरकर को भाजपा और संघ के नेता महान राष्ट्रवादी नेता के तौर पर पेश करते हैं। परंतु यदि भारतीय स्वतंत्रता संगाम में उनकी भूमिका को देखें तो किसी भी तरह से जिन्ना से कम विवादास्पद नही थी बल्कि कईं अर्थों में वह जिन्ना से भी विवादास्पद और अंग्रेज परस्ती की दिखाई पड़ती है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उन्होंने जमकर विरोध किया यहां तक बंगाल के गवर्नर जाॅन हरबर्ट को 26 जुलाई 1942 को एक पत्र लिखा और उसमें गांधी और कांग्रेस के भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध करते हुए उसे विफल बनाने के लिए भरपूर सहयोग देने का वादा भी किया था। उन्होंने अपने पत्र में साफ लिखा था कि आपके मंत्री हाने के नाते हम भारत छोड़ों आंदोलन को विफल करने के लिए पूरा सक्रिय सहयोग करेंगे।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल इतने पर ही नही ठहरे बल्कि जब गांधी और कांग्रेस करो या मरो के नारे के तहत अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन चला रहे थे उस समय श्यामा प्रसाद मुखर्जी सावरकर के साथ मिलकर अंग्रेजों का सहयोग कर रहे थे। कांग्रेस और गांधी ने अंग्रेजों द्वारा भारत को दूसरे विश्व युद्ध में शामिल करने की घोषणा का विरोध किया तो वहीं सावरकर पूरे भारत में घूमकर अंग्रेजी फौज में भारतीयों को भर्ती होने के लिए प्रेरित कर रहे थे। जाहिर है बंगाल के वित्तमंत्री और भाजपा और संघ के आदर्श नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी इसमें शामिल थे। वास्तव में श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत छोड़ों आंदोलन के विरोध का कारण सावरकर द्वारा सभी हिंदू महासभा सदस्यों को लिखे गये पत्र का जवाब था जिसमें उन्होंने गांधी द्वारा पद त्याग का विरोध करते हुए लिखा था कि अपने पद पर बने रहो। सावरकार का यह प्रसिद्ध पत्र “स्टिक टू दि पोस्ट” नाम से मशहूर है।

इस से भी शर्मनाक स्थिति वह थी कि जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस देश को आजाद करवाने के लिए आजाद हिंद फौज के साथ जान की बाजी लगा रहे थे तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी मुस्लिम लीग के नेतृत्व में बंगाल में बनी सरकार के उप प्रधानमंत्री (उप मुख्यमंत्री) थे। वहीं दूसरी तरफ नेताजी देश को नारा दे रहे थे कि तुम मुझे खुन दो और मैं तुम्हे आजादी दूंगा तो दूसरी तरफ मुस्लिम लीग और संघ-हिंदू महासभा मिलकर ब्रिटिश फौज के लिए भर्ती कैंप चला रहे थे।

इसके अलावा जिन्ना, सावरकर और श्यामा प्रसाद की दोस्ती और सहयोग का सबसे अनौखा उदाहरण 1939 में दिखाई देता है। अंग्रेजों द्वारा भारत को दूसरे विश्व युद्ध में शामिल करने की घोषणा पर 1939 में गांधी के आहवान पर कांग्रेस के विधायकों ओर मन्त्रियों ने अंतरिम सरकार के अपने पदों से इस्तीफा दे दिया तो जिन्ना ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए इसे मुक्ति का दिन बताया और इस मुक्ति के दिन में मुखर्जी ने मंत्री पद छोडने की अपेक्षा कांग्रेस छोड़कर जिन्ना की खुशी में शामिल होकर मुस्लिम लीग सरकार में साझेदारी करना बेहतर माना था। ध्यान रहे कि जहां श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस मुक्ति के दिन का समारोह मनाते हुए मुस्लिम लीग सरकार में शामिल हो रहे थे तो वहीं अब्दुर रहमान सिदद्की नामक एक ऐसे लीगी मुस्लिम नेता भी थे जिन्होंने जिन्ना की घोषण का विरोध करते हुए लीग की वर्किंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया था और जिन्ना की घोषणा को राष्ट्रीय गरिमा का अपमान और अंग्रेजों की चाकरी बताया था। परंतु राष्ट्रवादी नेता मुखर्जी और सावरकर को इसी चाकरी में राष्ट्रवाद दिखाई पड़ रहा था।

✍ शिल्पी सिंह

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