
देश की बदहाल होती अर्थव्यवस्था और किसानों की लगातार बदतर स्थिति को देखते हुए कांग्रेस ने इस साल नया साल का जश्न मनाने के बजाय उपवास करने का फैसला किया है।
कुछ ही घंटों के बाद नया साल शुरू होने वाला है और हर जगह इसका जश्न मनाने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने नए साल का जश्न नहीं मनाने का फैसला किया है।
पार्टी का कहना है कि देश की हालत खराब है, अर्थव्यवस्था अपने निचले स्तर पर है और किसानों की हालत बदहाल है। ऐसे में नए साल का जश्न मनाना तकलीफ झेल रहे लोगों की तकलीफ पर नमक छिड़कने जैसा है, इसलिए पार्टी नए साल का जश्न नहीं मनाएगी।
जश्न मनाने की बजाय कांग्रेस पार्टी 31 दिसंबर शाम से एक जनवरी सुबह तक के उपवास का आयोजन करेगी। इस उपवास कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता भाग लेंगे।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी की कैंपेन कमेटी के चेयरमैन कीर्ति आजाद ने बताया कि इस उपवास के जरिए पार्टी केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में नोटबंदी, सीलिंग और जीएसटी जैसे केंद्र सरकार के उठाए गए कदमों के कारण लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
कांग्रेस इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून , एनपीआर और एनआरसी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही थी और अब जिस प्रकार से कांग्रेस आर्थिक मुद्दे और किसानों के मुद्दे को भी इसमें शामिल कर रही है इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ हर उस मुद्दे को भुनाने का प्रयास कर रही है जिससे जनता को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
































































