
मध्य प्रदेश में सियासी घमासान तेज है कांग्रेस ज्योतिरादित्य के पार्टी छोड़ने के बाबजूद भी हार मानने को तैयार नही है और सरकार बचाने का दावा कर रही है।
यही कारण है कि कांग्रेस में बगावत का बाद भी भारतीय जनता पार्टी के पाले में गेंद अब भी पूरी तरह से आती हुई नहीं दिख रही है।
मिली जानकारी के अनुसार बेंगलुरू में ठहरे ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के 10 विधायक और 2 मंत्री भाजपा में जाने को तैयार नहीं हो रहे हैं. उनका कहना है कि हम लोग ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए आए थे, भाजपा में जाने के लिए नहीं.
वहीं बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश भाजपा में भी अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई है। भाजपा कार्यालय में नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में नारे लगे थे, जिसे लेकर अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई. इसके साथ ही पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. बताया जा रहा है कि बेंगलुरु में रुके हुए कांग्रेस विधायक भी अपने भूमिको को लेकर पसोपेश में हैं.
इससे पहले कांग्रेस को जबरदस्त झटका देते हुए पार्टी के प्रमुख युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया. सिंधिया के साथ ही उनके समर्थक पार्टी के 22 विधायकों के इस्तीफे से राज्य की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
































































