हरियाणा सरकार का तुगलकी फरमान,अब एक साल तक नही हो सकेगी कोई भी सरकारी भर्ती

एक ऐसे राज्‍य में, जहां पहले ही बेरोजगारी के आंकड़े 28 फीसदी थे, बेरोजगारों के लिए सरकार का यह फैसला किसी गाज से कम नहीं हैं। कांग्रेस ने इसे खट्टर सरकार का तुगलकी फरमान बताया है। अब यह बात बिल्‍कुल साफ हो गई है कि कोरोना संकट में अर्थव्‍यवस्‍था अब तक की सबसे मुश्किल स्थिति में है। इसी कड़ी में सोमवार का दिन रोजगार की बाट जोह रहे हरियाणा के युवाओं के लिए बुरी खबर लेकर आया। खट्टर सरकार ने फरमान सुना दिया कि अब एक साल तक कोई सरकारी भर्ती नहीं होगी। हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा है कि कर्मचारियों को एलटीसी देने पर भी रोक लगा दी गई है।

मुख्‍यमंत्री ने कहा है कि इस साल हमने अपने खर्च भी कम किए हैं, लेकिन हम कर्मचारियों का वेतन देते रहेंगे। साथ ही आवश्यक काम चलते रहेंगे। उन्‍होंने यह भी कहा कि हरियाणा में हम शीघ्र अच्छे समय में आ जाएंगे।

उधर, कांग्रेस ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के एक साल तक भर्ती पर रोक के फैसले को तुगलकी फरमान बताया है। अखिल भारतीय कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ”खट्टर साहब अब आपने एक नया तुगलकी फरमान जारी कर यह कह दिया कि 1 साल तक हरियाणा के नौजवानों को नौकरी नहीं दी जाएगी। आज कोरोना व लॉक डाउन का संकट है और आर्थिक संकट में नौजवान दर-दर की ठोकरें खा रहा है। नौजवानों के पास गुण है, शिक्षा है और क़ाबिलियत है पर रोजगार नहीं है। पहले ही पिछले साढे़ पांच साल में आपने रोजगार के नाम पर केवल लॉलीपॉप हरियाणा के युवाओं को थमा रखा है। हजारों नौजवान नौकरी खो चुके हैं। ऊपर से अब एक नया तुगलकी फरमान जारी कर दिया कि 1 साल तक हरियाणा सरकार कोई नई नौकरी नहीं देगी।”

सुरजेवाला ने सवाल किया है कि हरियाणा का पढ़ा लिखा युवा जाएगा कहां? मां-बाप बच्चे को रोजगार, रोटी व अच्छा भविष्य कैसे देंगे? कृपा करके हमारी आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि इस प्रकार का अमानवीय, असंवेदनशील व अन्यायपूर्ण निर्णय हरियाणा के युवाओं से मत कीजिए। हरियाणा के युवाओं की नौकरियों पर प्रतिबंध और रोक मत लगाइए। नहीं तो हरियाणा का युवा जाएगा कहां? और फिर आप सरकार में बैठे क्यों हैं? क्या इस बात का जवाब देंगे कि आप एक पिता की मुश्किल को समझ सकते हैं? एक बेरोजगार नौजवान की मुश्किलात को समझ सकते हैं? एक मां की तकलीफ को समझ सकते हैं, जिसका पढ़ा-लिखा बेटा या बेटी घर में बैठा है? भगवान के लिए इस निर्णय को फौरन वापस लीजिए।

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