Saturday, August 15, 2026
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2024 Lok Sabha Election: क्या अब भी 2024 में मोदी को हराया जा सकता है?

2024 Lok Sabha Election Rahul Modi
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2024 Lok Sabha Election: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान को नया मुख्यमंत्री मिल चुका है. तीनों ही चेहरे एकदम नए हैं और बीजेपी ने सारे सूत्रों को दरकिनार करते हुए एकदम नए चेहरों को मुख्यमंत्री बनाया है. बीजेपी ने जातिगत समीकरण को देखते हुए तीनों के नाम आगे किए हैं.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव (2024 Lok Sabha Election) की तैयारीयों के लिहाज से बीजेपी ने यह मास्टर स्ट्रोक खेला है, जिसमें तमाम जातिय समीकरण को साधते हुए एक तरह से विपक्षी गठबंधन को अभी से धराशाई करने की कोशिश बीजेपी की तरफ से की गई है.

सवाल यह भी उठने लगा है कांग्रेस को लेकर कि, अगर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनती तो क्या भूपेश बघेल, कमलनाथ और अशोक गहलोत को दरकिनार करते हुए दूसरे चेहरों को कांग्रेस नेतृत्व मुख्यमंत्री बन पाता? और अगर बना भी देता तो क्या कांग्रेस में बगावत नहीं होती. शांति से कांग्रेस के सीनियर नेता नेतृत्व की बातों को तवज्जो देते और शांत रहते, मर्यादा में रहते, अनुशासन में रहते?

तीनों ही राज्यों में कांग्रेस हार के कारणो पर समीक्षा बैठक करने के बाद कोई बड़ा निर्णय अभी तक नहीं कर पाई है. क्या पुराने चेहरों को पीछे करते हुए नए चेहरों को आगे लाने का प्रयास अभी भी कांग्रेस कर पाएगी? कांग्रेस का नेतृत्व इतनी हिम्मत दिखा पाएगा?

इसके अलावा अभी भी कांग्रेस के सामने सवाल यह है कि अगर अगले साल हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब होती है तो क्या वह अपने सीनियर लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नजरअंदाज करके नया चेहरा ला पाएगी?

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद से ही बीजेपी ने कई राज्यों में बड़े स्तर पर बदलाव किया है और बीजेपी में बगावत देखने को नहीं मिली है. बीजेपी के सीनियर नेता भी अनुशासन में रहते हैं, अपने नेतृत्व के खिलाफ बयान बाजी नहीं करते हैं. लेकिन ठीक इसके उलट कांग्रेस का सीनियर नेता हो या फिर प्रदेश स्तर का नेता हो, अगर उसके मन मुताबिक फैसला नहीं होते हैं तो मीडिया में बयान बाजी होती है और नेतृत्व के खिलाफ बगावत देखने को मिलती है.

इस वक्त देखने को यहीं मिल रहा है कि बीजेपी नेतृत्व का अपने नेताओं पर पूरा कंट्रोल है. बीजेपी का कोई भी नेता मोदी और शाह के खिलाफ, उनके फैसलों के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. वहीं कांग्रेस का नेतृत्व काफी लाचार नजर आता है अपने नेताओं के सामने.

2024 Lok Sabha Election

क्या ऐसे 2024 का लोकसभा चुनाव (2024 Lok Sabha Election BJP vs Congress) कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष जीत पाएगा? एक सच्चाई यह भी है कि बिना कांग्रेस के विपक्ष बीजेपी को हरा भी नहीं सकता है. इसलिए जरूरी है कि कांग्रेस अपने अंदर बड़े बदलाव करें. उन कार्यकर्ताओं को तवज्जो देना शुरू करें जिनके दम पर कांग्रेस है, ना कि उन नेताओं के दम पर जिनकी कोई विचारधारा नहीं है, जो खुद पद के लिए पार्टी से जुड़े हुए हैं.

कांग्रेस का समर्थन करने वाली जनता और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को यह उम्मीद थी कि तीनों राज्यों में हार के बाद पार्टी कुछ बड़ा फैसला लेगी, हार के लिए जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ एक्शन लेगी. लेकिन समीक्षा बैठक तक मामला सीमित रहा. इससे समर्थक और कार्यकर्ता काफी निराश हैं. इन्हें भी ऐसा लग रहा कि पार्टी जीतने के लिए कुछ कर नहीं रही है.

कुछ लोग ईवीएम का भी मामला है उठा रहे हैं. अगर मामला वाकई में ईवीएम धांधली का है तो फिर इस पर भी पार्टी को सड़कों पर उतरना होगा. इसके खिलाफ भी ठोस आंदोलन करना होगा. पार्टी के बड़े नेताओं को बोलना होगा. अगर ऐसा नहीं कर रहे हैं तो फिर ईवीएम के बहानों तले अपनी नाकामी को छुपाया नहीं जा सकता, अपने नेताओं के नकारेपन को दूर किए बिना कांग्रेस केंद्र की सत्ता में नहीं आ सकती.

अगर 2024 में कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती देना चाहती है या फिर सत्ता से बेदखल करना चाहती है तो उसे कठोर फैसले लेने होंगे, अपने अंदर बड़े स्तर पर बदलाव करना होगा. कार्यकर्ताओं को तवज्जो देनी होगी. उन नेताओं के हाथों में राज्यों की कमान देनी होगी जो जनता के बीच जनाधार रखते हैं सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने का माद्दा रखते हैं. जनता के बीच जाकर परिवर्तन लाना होगा, ना की बयान बाजी से क्रांति की उम्मीद करनी होगी.

Bhajan Lal Sharma: भजनलाल शर्मा होंगे राजस्थान के नए मुख्यमंत्री

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तमाम तरह के कयासों को दरकिनार करते हुए भाजपा ने मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में नए नाम का ऐलान कर दिया है. इसी कड़ी में आज राजस्थान में मुख्यमंत्री (Bhajan Lal Sharma) के नाम का ऐलान हुआ है. आपको बता दें कि भजनलाल शर्मा संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं.

राजस्थान में मुख्यमंत्री को लेकर लगातार सस्पेंस बना हुआ था. तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे थे. यह भी कहा जा रहा था कि क्या महारानी की राजस्थान में वापसी होगी या उन्हें दरकिनार कर दिया जाएगा.

अब इन तमाम कयासों को विराम देते हुए भाजपा ने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया है. भजनलाल शर्मा को भाजपा ने राजस्थान का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया है. भजनलाल शर्मा अमित शाह की काफी करीबी माने जाते हैं. ब्राह्मण चेहरे को राजस्थान में बीजेपी ने आगे किया है.

विधायक दल की बैठक के बाद भाजपा ने भजनलाल शर्मा को राजस्थान का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया है. यह भी एक तरह से बीजेपी का चौंकाने वाला फैसला है. क्योंकि कई नाम सामने आ रहे थे. तमाम नामो पर कयास लगाया जा रहे थे. लेकिन बीजेपी ने एक बार फिर से तमाम सूत्रों को दरकिनार करते हुए भजनलाल शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बना दिया है.

भजन लाल शर्मा पहली बार विधायक चुनकर आए हैं और उन्हें भाजपा ने मुख्यमंत्री बना दिया है. इसके अलावा राजस्थान में बीजेपी ने दो उपमुख्यमंत्री बीजेपी ने बनाया है. दिया सिंह को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है. प्रेमचंद बैरवा दूसरे उपमुख्यमंत्री होंगे.

छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश के बाद अब राजस्थान में क्या होगा?

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मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने तस्वीर साफ कर दी है. रमन सिंह और शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री न बना कर भाजपा ने कई बड़े संकेत भी दे दिए हैं और अब राजस्थान पर फैसला आना बाकी है.

क्या वसुंधरा राजे को भी दरकिनार करके किसी नए चेहरे को भाजपा आलाकमान मुख्यमंत्री बनाएगा इसको लेकर सस्पेंस बना हुआ है.

भाजपा नेतृत्व ने जिस तरह से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में फैसला लिया है उससे राजस्थान के भाजपा के दिग्गज नेताओं की नींद उड़ गई है. इसकी वजह पुराने चेहरों को रिप्लेस कर नए चेहरे को जिम्मेदारी सौपना है.

राजस्थान में अभी मुख्यमंत्री का ऐलान होना बाकी है. आगे क्या होने वाला है इसकी जानकारी अभी भाजपा नेतृत्व के अलावा किसी के पास नहीं है. कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा राजस्थान में भी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की तरह ही प्रयोग कर सकती है और किसी नए चेहरे को राजस्थान की कमान दे सकती है. पुराने चेहरों की छुट्टी तय मानी जा रही है.

राजस्थान के नतीजे आने के बाद से ही वसुंधरा राजे की सक्रियता बढ़ी हुई दिखाई दे रही है. लेकिन जिस तरह से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में फैसला हुआ है उससे ऐसा मालूम होता है कि शायद ही भाजपा का नेतृत्व उन्हें राजस्थान की जिम्मेदारी दें. लेकिन सवाल यह भी है कि क्या वसुंधरा इतनी आसानी से मान जाएगी?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव देखते हुए तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर रही है. जातीय समीकरण को मध्य में रखकर बीजेपी 2024 का चुनाव जीतने की तैयारी कर रही है. इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान भी काफी मंथन के बाद हो रहा है.

Akash Anand: मायावती ने घोषित किया अपना उत्तराधिकारी

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बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीम लीडर मायावती (Mayawati) ने आज लखनऊ में आयोजित पार्टी बैठक के दौरान एक बहुत बड़ा फैसला (Akash Anand) ले लिया है. सूत्रों के मुताबिक बीएसपी की मीटिंग में मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand) को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है.

आकाश आनंद लंदन से मास्टर आफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) कर चुके हैं. आकाश की राजनीति में एंट्री 2017 में हुई थी, जब वह सहारनपुर रैली में पहली बार मायावती के साथ मंच साझा करते हुए नजर आए थे. आकाश फिलहाल पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर भी हैं.

आकाश आनंद के सियासी सफर की बात करें तो वह 2017 में राजनीति में आए थे. मायावती ने 2017 में एक बड़ी रैली कर आकाश आनंद को राजनीति में लॉन्च किया था. आपको बता दें की आकाश आनंद की लांचिंग के बाद यूपी में बहुजन समाज पार्टी लगातार कमजोर हुई है.

2017 और 2019 में पार्टी को बड़ी हार झेलनी पड़ी, वहीं 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव में बहुजन समाज पार्टी महज एक सीट पर सिमट गई. बहुजन समाज पार्टी पर यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि वह बीजेपी के दबाव में फैसला लेती है अभी तक आकाश आनंद पार्टी के लिए कोई बड़ा करिश्मा नहीं कर पाए हैं.

उत्तर प्रदेश में लगातार बहुजन समाज पार्टी सिमटती जा रही है और पिछले कुछ फैसले ऐसे हुए हैं जिन पर आरोप लगे हैं कि यह सब कुछ बीजेपी के दबाव में हुआ है. अब देखना यह होगा कि बहुजन समाज पार्टी को फिर से नई ऊंचाइयां देने के लिए आकाश आनंद क्या तरीके अपनाते हैं.

MP CM: शिवराज सिंह चौहान क्या मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं?

MP CM
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मध्य प्रदेश के विधानसभा (M.P. Election) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 163 सीटों पर जीत दर्ज की है, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री (MP CM) का चेहरा सामने नहीं आया है. मध्य प्रदेश में क्या शिवराज सिंह चौहान ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे या कोई नए चेहरे के साथ बीजेपी आएगी इसको लेकर अभी संदेह बना हुआ है.

दूसरी तरफ शिवराज सिंह चौहान लोगों से लगातार संपर्क कर रहे हैं और सोशल मीडिया के जरिए भी पोस्ट साझा कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ और राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश की सियासत पर भी लोगों की नज़रें टिकी हुई है और सस्पेंस भी बना हुआ है.

शिवराज सिंह चौहान सोशल मीडिया पर पोस्ट कविता और तस्वीरों के जरिए भी अपने केंद्रीय नेतृत्व को संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वही मध्य प्रदेश के लोकप्रिय नेता है और 2024 में बीजेपी के एजेंडे में फिट बैठते हैं.

इसके अलावा विधानसभा चुनाव जीतने के बाद से ही शिवराज सिंह चौहान लगातार मध्य प्रदेश के उन इलाकों का दौरा कर रहे हैं जहां पर भाजपा कमजोर है. चाहे वह छिंदवाड़ा कांग्रेस नेता कमलनाथ का गढ़ हो या फिर दिग्विजय सिंह के गढ़ राघवगढ़ ही क्यों ना हो.

शिवराज सिंह चौहान की गतिविधियों को देखकर साफ जाहिर हो रहा है कि वह किसी भी तरह मध्य प्रदेश का फिर से मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं और वह इसके लिए केंद्रीय नेतृत्व का ध्यान भी अपनी और आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं. अब देखना है यह होगा कि केंद्रीय नेतृत्व फिर से उन्हें मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी देता है या फिर किसी नए चेहरे को मौका मिलता है.

Bigg Boss 17 : बिग बॉस से बाहर हुईं सना रईस खान, दिखाया गया बाहर का रास्ता

Bigg Boss 17 Sana Raees Khan
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Bigg Boss 17- रियलिटी टीवी शो बिग बॉस 17 (Bigg Boss 17) के घर से एक और कंटेस्टेंट्स बाहर हो चुका है. इस हफ्ते हुए नॉमिनेशन में 8 कंटेस्टेंट्स नॉमिनेट हुए थे.

बिग बॉस 17 के घर से सना रईस खान (Sana Raees Khan) बाहर हो गई हैं. सना एक वकील है और आर्यन खान शीना बोरा जैसे हाई प्रोफाइल केस से उनका नाम जुड़ गया था.

बता दें कि सना को बिग बॉस के इस सीजन का सबसे कमजोर खिलाड़ी माना जा रहा था और इस वजह से सभी ने भी उन्हें हल्के में लिया था. लेकिन वकील सना ने बिग बॉस के घर में अपना दिमाग चलाया और शादीशुदा विक्की जैन के साथ दोस्ती करके उन्होंने दर्शकों को अपनी तरफ आकर्षित किया था.

Bigg Boss 17

 

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हालांकि पिछले हफ्ते विक्की और सना के बीच हुए झगड़े की वजह से लोगों ने सना में दिलचस्पी दिखाना कम कर दिया था और वह यही बाजी हार गईं थीं.

सलमान खान द्वारा घोषित किया गया की जनता द्वारा कम वोट दिए जाने की वजह से सना को बिग बॉस के घर से बाहर किया जा रहा है.

Toxic Title Teaser: यश ने अपनी अपकमिंग फिल्म टॉक्सिक का किया ऐलान

Yash New Movie Toxic Title Teaser
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Toxic Title Teaser- केजीएफ (KGF) फेम एक्टर यश (Yash) जल्द ही अपनी आने वाली फिल्म ‘टॉक्सिक- ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स’ (Toxic) मे नजर आएंगे. बता दें कि यश ने अपने फैंस को जबरदस्त सरप्राइज दिया है. उनकी अगली फिल्म का ऐलान उन्होंने कर दिया है. इसके साथ ही फिल्म की रिलीज डेट भी सामने आई है.

सुपरस्टार यश (Super Star Yash) के फैंस का इंतजार अब खत्म हो गया है. पिछले कुछ समय से फैंस उनकी नई फिल्म की अनाउंसमेंट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और अब यश की नई फिल्म का ऐलान हो गया है. उनकी अगली मूवी का नाम टॉक्सिक है.

फिल्म के निर्माताओं ने टाइटल टीजर (Toxic Title Teaser Release) भी जारी कर दिया है, जिसे देखकर फैंस खुशी से झूम उठे हैं. इसके अलावा फिल्म की रिलीज डेट भी बता दी गई है. यश ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें आधे जले प्लेइंग कार्ड दिख रहे हैं. बैकग्राउंड में एक कैची ट्यूंन सुनने को मिल रही है.

Toxic Title Teaser

 

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आपको बता दें कि सुपरस्टार यश की यह फिल्म 10 अप्रैल 2025 को सिनेमाघर में दर्शकों के लिए दस्तक देगी. इस फिल्म के डायरेक्टर नेशनल अवॉर्ड विनर गीतू मोहनदास (Geetu Mohandas) हैं. हालांकि फिल्म की बाकी स्टार कास्ट को लेकर अभी कोई डिटेल सामने नहीं आई है.

इस फिल्म के संबंध में बात करते हुए फिल्म के डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने कहा है कि, मैं हमेशा अपनी नैरेटिव स्टाइल्स के साथ एक्सपेरिमेंट किया है. हालांकि ‘लायर्स डाइस’ और ‘मूथॉन’ को इंटरनेशनल लेवल पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली. यह प्रोजेक्ट इसी विचार से उपजा है. यह फिल्म दो विपरीत दुनियाओं कहानी कहने के एसथेटिक को एक साथ लाने का मिश्रण है.

आपको बताने की यश पिछली बार फिल्म ‘केजीएफ चैप्टर 2’ (K.G.F: Chapter 2) में नजर आए थे, जो साल 2022 में रिलीज हुई थी. सिर्फ 100 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था.

मध्य प्रदेश में बीजेपी क्या खेल कर रही है?

MP Cm

मध्य प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसको लेकर सवाल अभी भी बना हुआ है. जहां एक तरफ कहा जा रहा है कि शिवराज की लाडली बहन योजना इन चुनावों में गेम चेंजर साबित हुई हैं. वहीं दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि सिर्फ मोदी मैजिक के कारण यह जीत मिली है.

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में बीजेपी ने मुख्यमंत्री के रूप में चुनावों के दौरान किसी का नाम प्रस्तावित नहीं किया था, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है की शानदार चुनाव परिणाम में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नीतियों पर मोहर लगाई है. चौहान समेत कई नेताओं ने दावा किया है कि उनकी लाडली बहन योजना गेम चेंजर साबित हुई है.

बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश में 7 सांसदों को चुनाव मैदान में उतारा था, इनमें से पांच ने जीत दर्ज की है. जिनमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी शामिल हैं. ऐसे में अब पार्टी के पास मुख्यमंत्री बनने के लिए पर्याप्त और योग्य उम्मीदवार मौजूद है. ऐसे में शिवराज सिंह चौहान की गाड़ी को चुनौती मिलने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है.

बताया जा रहा है कि चुनावों से पहले ही भाजपा नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान का विकल्प खोजना शुरू कर दिया था. शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश में मिली जीत के बाद खुलकर तो कुछ कह नहीं पा रहे हैं. वह सिर्फ इतना कह रहे हैं कि वह पार्टी के कार्यकर्ता है और पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी वह उसे निभाएंगे. लेकिन चौहान इतनी आसानी से मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने हाथों से जाते हुए देखते रहेंगे बड़ा सवाल यही है.

नतीजे आने के बाद से ही जिस तरह से शिवराज सिंह चौहान लगातार अलग-अलग जगहों के दौरे कर रहे हैं और बयान बाजी कर रहे हैं, उसे निश्चित तौर पर ऐसा लग रहा है कि अंदरूनी तौर पर दबाव वह मुख्यमंत्री पद के लिए बना रहे हैं. लेकिन क्या केंद्रीय नेतृत्व उनकी बात मानेगा?

शिवराज सिंह चौहान ने छिंदवाड़ा पहुंचकर एक बयान दिया है कि वह अपने कार्यकर्ताओं से मिलने आए हैं और लोकसभा 2024 की तैयारी यहीं से शुरू करेंगे. इन सब बयानों से निश्चित तौर पर यह आभास हो रहा है कि वह अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जाए. अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के लिए उनके नाम का ऐलान होता है या फिर कोई नया चेहरा मध्य प्रदेश को मिलता है.

Rajasthan Election Results 2023 : राजस्थान कांग्रेस की हार पर क्या बोले सचिन पायलट?

Rajasthan Election Results 2023

Rajasthan Election Results 2023 : राज्यों के विधानसभा चुनावों में तेलंगाना को छोड़कर कांग्रेस हर राज्य में बीजेपी से हार गई है. हालांकि वोट परसेंट की बात की जाए तो कांग्रेस बीजेपी से कुछ ज्यादा पीछे नहीं है. लेकिन जहां तक सीटों का सवाल है कांग्रेस सरकार बनाने में नाकाम रही है. छत्तीसगढ़ में तथा राजस्थान में वह अपनी सरकार गंवा चुकी है और मध्य प्रदेश में बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने में नाकाम रही है.

राजस्थान में कांग्रेस की हार पर अब सचिन पायलट (Sachin Pilot On Rajasthan Election Results 2023) की प्रतिक्रिया आई है. पायलट ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा है कि हम चुनाव डटकर लड़े हैं लेकिन जनता ने हमें विपक्ष में बिठाया है. हम विपक्ष में रहते हुए भी सरकार को काम करने के लिए मजबूर करेंगे तथा इस हार का मंथन करेंगे.

सचिन पायलट ने कहा है कि प्रदेश की जनता का निर्णय अंतिम है. हमे जो जनता ने जिम्मेदारी विपक्ष की दी है उसे निभाएंगे. दूसरी बार विधायक बनने के बाद सचिन पायलट सोमवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में हुई कार्यकर्ताओं की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे.

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सचिन पायलट ने कहा कि भले ही पार्टी की हार हुई है लेकिन तीनों राज्यों में वोट प्रतिशत बढ़ा है. सबका उद्देश्य था कि सरकार रिपीट करेंगे. अब जब हम बहुमत नहीं ला पाए तो आत्म विश्लेषण करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में हुई हार पर जयपुर तथा दिल्ली में आयोजित संगठन की बैठक में मंथन करेंगे.

लोकसभा चुनाव की तैयारी वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक है ऐसे में हमें वापस जनता के बीच जाना पड़ेगा, जनता की कसौटी पर खरा उतरने के लिए रणनीति बनानी होगी.

अशोक गहलोत के पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा द्वारा चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद लगाए गए आरोपों पर पायलट ने कहा कि आरोप चिंताजनक है. उम्मीद करता हूं कि कांग्रेस आलाकमान इस पर ध्यान देगी.

उन्होंने कहा कि ऐसा स्टेटमेंट देना आश्चर्यजनक है. इसलिए है कि वह निवर्तमान सीएम के ओएसडी है. ऐसे में चिंता का विषय है. इसमें क्या सच है, क्या झूठ है, यह तो देखा जाएगा. लेकिन पूरी उम्मीद है कि पार्टी इस पर कहीं ना कहीं ध्यान देगी. जो बोला है वह चिंता का विषय है.

Election Results 2023: फूंके हुए कारतूसों के दम पर सत्ता में वापसी मुश्किल

Election Results 2023

छत्तीसगढ़, राजस्थान तथा मध्य प्रदेश (Election Results 2023) में बीजेपी ने बड़ी चुनावी जीत दर्ज की है तथा कांग्रेस को बुरी तरह से पटकनी दी है. अगर देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी को एक मजाक में तब्दील करके रख दिया है. इन चुनावी नतीजे में कांग्रेस के लिए संदेश भी छुपे हुए हैं. सवाल यही है कि क्या कांग्रेस के लोग इन नतीजे से मिले संदेश को समझने की कोशिश करेंगे?

तीन राज्यों में चुनावी हार के बाद राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए जनता के जनादेश को स्वीकार किया. उन्होंने लिखा कि हम जनता के जनादेश को विनम्रता पूर्वक स्वीकार करते हैं तथा विचारधारा की लड़ाई निरंतर जारी रहेगी. लेकिन सवाल है की विचारधारा की लड़ाई किस तरह से जारी रहेगी?

कई बुद्धिजीवी तथा कांग्रेस के अंध समर्थक इस जनादेश के बाद ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं तथा इस हार में भी कई पॉजिटिव चीजों और कहानियों को जोड़कर 2024 में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने की कहानियां सुना रहे हैं.

कांग्रेस के कुछ समर्थकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस विधानसभा चुनाव कई राज्यों में जीत गई थी तथा लोकसभा चुनाव हार गई थी, अब 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इन राज्यों में बीजेपी जीत गई है. इसका मतलब है कि 2024 में भाजपा सत्ता से बाहर हो जाएगी.

इसी तरह कांग्रेस के नेता जयराम रमेश तथा कई कांग्रेस के समर्थकों का कहना है कि 2004 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी कई राज्यों में विधानसभा चुनाव जीत गई थी. उसके बाद 2004 का लोकसभा चुनाव हार गई थी. इस वजह से 2024 के लोकसभा चुनाव में मोदी की सरकार जा रही है और मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे.

ऐसी कहानियां और पुरानी बातें याद करके क्या इतिहास को बिना धरातल पर जनता से जुड़े दोहराया जा सकता है?

कांग्रेस तथा तमाम विपक्षी दलों और उनके समर्थकों को यह समझना होगा कि नज़रे चुराने से कुछ नहीं होगा. वास्तविकता को देखना होगा. आंखों पर बंधी हुई पट्टी को खोलना होगा. जमीन जनता तथा जनतंत्र की रूह को समझना होगा. जनता से जुड़ने की नियत पैदा करनी होगी.

राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के जरिए माहौल जरूर तैयार किया था. लेकिन उसे बने नैरेटीव को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में चुनावी जीत में तब्दील कांग्रेस नहीं कर पाई. जिस तरह से इन राज्यों में चुनाव प्रचार चल रहा था और चारों तरफ सोशल मीडिया से लेकर युट्युबर्स तक ने कांग्रेस को अंधेरे में रखा कि वह जीत रही है और इनका दिया गया भरोसा कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हुआ.

इसके अलावा कांग्रेस के दगे हुए कारतूसों के दिए गए भरोसे ने राहुल गांधी की मेहनत पर पानी फेर दिया. मध्य प्रदेश में कमलनाथ और राजस्थान में अशोक गहलोत ने कांग्रेस की लुटिया डूबने में कोई कसर नहीं छोड़ी. जब से कमलनाथ की सरकार गई थी उसी वक्त से कमलनाथ 2023 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए थे. लेकिन नतीजा बता रहे हैं की कमलनाथ ने जनता से जुड़ने की कोशिश नहीं की.

मध्य प्रदेश के चुनावी रिजल्ट बता रहे हैं कि कमलनाथ किसी की सुन नहीं रहे थे. कांग्रेस नेतृत्व द्वारा बनाए गए इंडिया गठबंधन को भी तवज्जो नहीं दे रहे थे. मध्य प्रदेश में चुनावी प्रचार इंडिया गठबंधन के तमाम नेताओं के साथ भोपाल में शुरू होना था, लेकिन कमलनाथ ने इसे होने नहीं दिया.

बागेश्वर बाबा के चरणों में लेटकर कमलनाथ सोच रहे थे कि वह मध्य प्रदेश का चुनाव जीत जाएंगे. लेकिन उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस को एक तरह से खत्म कर दिया है. नई लीडरशिप को मौका नहीं दिया. मध्य प्रदेश में राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के जरिए अच्छा माहौल तैयार किया था लेकिन उसका लाभ भी कांग्रेस को नहीं मिल सका.

इंडिया गठबंधन द्वारा कुछ चैनलों और एंकर्स को बैन कर दिया गया था और उन्ही चैनलों और एंकर्स को कमलनाथ इंटरव्यू देते हुए नजर आए विधानसभा चुनाव प्रचार में. यह एक तरह से कमलनाथ द्वारा कांग्रेस नेतृत्व का मजाक उड़ाना ही कहा जाएगा. कमलनाथ पूरे विधानसभा चुनाव प्रचार में अपनी ही चलाते रहे, किसी की उन्होंने सुनी नहीं. नतीजा सामने है, कमलनाथ का ओवर कॉन्फिडेंस कांग्रेस को ले डूबा.

ठीक इसी तरह राजस्थान में अशोक गहलोत कह रहे थे की कुर्सी उन्हें छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. वह सचिन पायलट को किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाह रहे थे, यह पिछले पांच सालों में देखा गया. लेकिन राज्यपाल को इस्तीफा देते हुए उन्हें बिल्कुल भी शर्म नहीं आई. बीजेपी राजस्थान में बंपर जीत दर्ज करने में कामयाब हो गई और गहलोत को जबरदस्ती कुर्सी से उतरना पड़ा.

सचिन पायलट को लेकर गहलोत का रवैया किसी से छुपा हुआ नहीं है. सोनिया गांधी तक के फैसले के खिलाफ गहलोत ने बगावत कर दी थी और उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ी थी. लेकिन राज्यपाल को इस्तीफा देते हुए खुलकर हंसने और मुस्कुराते हुए नजर आए गहलोत जिसकी काफी आलोचना भी हो रही है और कहा जा रहा है कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया और अब खुशी-खुशी बीजेपी की सरकार स्वीकार करने में उन्हें तकलीफ नहीं हुई.

ठीक इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस बुरी तरह हारी है. छत्तीसगढ़ में किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि बीजेपी की सरकार बनेगी लेकिन बीजेपी ने दमखम के साथ छत्तीसगढ़ में वापसी की है. छत्तीसगढ़ भूपेश बघेल के हाथों में था, वह ओवर कॉन्फिडेंस में थे. गांधी परिवार का करीबी बताने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन उनका ओवर कॉन्फिडेंस ले डूबा और आज छत्तीसगढ़ से भी कांग्रेस सत्ता से बेदखल हो गई.

कांग्रेस को सोचना होगा कि दगे हुए कारतूसों के भरोसे क्या वह 2024 का लोकसभा चुनाव जीत पाएगी या फिर किसी भी राज्य का विधानसभा चुनाव वह दगे हुए कारतूसों के दम पर जीत पाएगी? तेलंगाना में एक युवा और नए चेहरे को कांग्रेस ने कमान दी थी और तेलंगाना में कांग्रेस ने बंपर जीत दर्ज की है.

कमलनाथ, अशोक गहलोत जैसे नेताओं ने युवाओं को आगे आने नहीं दिया. नया नेतृत्व पैदा नहीं हुआ और आज कांग्रेस हिंदी बेल्ट में लगभग साफ होती जा रही है. हिंदी बेल्ट में कांग्रेस के पास जनता को आकर्षित करने वाले और जमीन से जुड़े हुए नेताओं की कमी साफ दिखाई दे रही है और जो पुराने नेता है वह युवाओं को आगे नहीं याद नहीं दे रहे हैं, कांग्रेस नेतृत्व की चलने नहीं दे रहे हैं, सिर्फ अपनी चला रहे हैं.

जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है उन राज्यों से गोदी मीडिया को भर भर के विज्ञापन दिए जाते हैं. लेकिन क्या यह गोदी मीडिया चुनावी माहौल में कांग्रेस को जनता तक पहुंचाने के लिए समय देता है? कांग्रेस की नीतियों का प्रचार करता है? यह बात भी कांग्रेस नेतृत्व को गंभीरता से सोचनी होगी. अगर गोदी मीडिया का बहिष्कार किया ही है तो फिर विज्ञापन के जरिए गोदी मीडिया पर पानी की तरह कांग्रेस की राज्य सरकारें पैसा क्यों बहा रही थी या बहाती हैं?

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान कांग्रेस हार चुकी है लेकिन अभी तक इन राज्यों की कमान जिनके हाथों में थी उन्होंने इस हार की जिम्मेदारी नहीं ली है और अभी तक कोई इस्तीफा भी नहीं हुआ है. इसके क्या मायने हैं? जीत हुई तो उनके नाम पर हुई और हार हुई तो गांधी परिवार जिम्मेदार?

2024 से ठीक पहले कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका है और इस झटके से उबर में कांग्रेस को काफी समय लगेगा. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में अधिक वक्त बचा नहीं है. क्या कोई बड़ा फैसला कांग्रेस लगी ऐसी उम्मीद की जा सकती है?

मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ और बाकी के हिंदी बेल्ट में अगर कांग्रेस द्वारा नया नेतृत्व पैदा नहीं किया गया. जमीन से जुड़े हुए और जनता को आकर्षित करने वाले नेताओं की फौज खड़ी नहीं की गई तो 2024 में भी मोदी को सत्ता में वापसी करने से नहीं रोका जा सकता है, यह बात कांग्रेस जितनी जल्दी समझ जाए उतना ही उनके लिए अच्छा है.

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