Thursday, October 1, 2026
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Bigg Boss 17 : बिग बॉस से बाहर हुईं सना रईस खान, दिखाया गया बाहर का रास्ता

Bigg Boss 17 Sana Raees Khan
Photo credit: Social media

Bigg Boss 17- रियलिटी टीवी शो बिग बॉस 17 (Bigg Boss 17) के घर से एक और कंटेस्टेंट्स बाहर हो चुका है. इस हफ्ते हुए नॉमिनेशन में 8 कंटेस्टेंट्स नॉमिनेट हुए थे.

बिग बॉस 17 के घर से सना रईस खान (Sana Raees Khan) बाहर हो गई हैं. सना एक वकील है और आर्यन खान शीना बोरा जैसे हाई प्रोफाइल केस से उनका नाम जुड़ गया था.

बता दें कि सना को बिग बॉस के इस सीजन का सबसे कमजोर खिलाड़ी माना जा रहा था और इस वजह से सभी ने भी उन्हें हल्के में लिया था. लेकिन वकील सना ने बिग बॉस के घर में अपना दिमाग चलाया और शादीशुदा विक्की जैन के साथ दोस्ती करके उन्होंने दर्शकों को अपनी तरफ आकर्षित किया था.

Bigg Boss 17

 

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हालांकि पिछले हफ्ते विक्की और सना के बीच हुए झगड़े की वजह से लोगों ने सना में दिलचस्पी दिखाना कम कर दिया था और वह यही बाजी हार गईं थीं.

सलमान खान द्वारा घोषित किया गया की जनता द्वारा कम वोट दिए जाने की वजह से सना को बिग बॉस के घर से बाहर किया जा रहा है.

Toxic Title Teaser: यश ने अपनी अपकमिंग फिल्म टॉक्सिक का किया ऐलान

Yash New Movie Toxic Title Teaser
Photo credit Social media

Toxic Title Teaser- केजीएफ (KGF) फेम एक्टर यश (Yash) जल्द ही अपनी आने वाली फिल्म ‘टॉक्सिक- ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स’ (Toxic) मे नजर आएंगे. बता दें कि यश ने अपने फैंस को जबरदस्त सरप्राइज दिया है. उनकी अगली फिल्म का ऐलान उन्होंने कर दिया है. इसके साथ ही फिल्म की रिलीज डेट भी सामने आई है.

सुपरस्टार यश (Super Star Yash) के फैंस का इंतजार अब खत्म हो गया है. पिछले कुछ समय से फैंस उनकी नई फिल्म की अनाउंसमेंट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और अब यश की नई फिल्म का ऐलान हो गया है. उनकी अगली मूवी का नाम टॉक्सिक है.

फिल्म के निर्माताओं ने टाइटल टीजर (Toxic Title Teaser Release) भी जारी कर दिया है, जिसे देखकर फैंस खुशी से झूम उठे हैं. इसके अलावा फिल्म की रिलीज डेट भी बता दी गई है. यश ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें आधे जले प्लेइंग कार्ड दिख रहे हैं. बैकग्राउंड में एक कैची ट्यूंन सुनने को मिल रही है.

Toxic Title Teaser

 

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आपको बता दें कि सुपरस्टार यश की यह फिल्म 10 अप्रैल 2025 को सिनेमाघर में दर्शकों के लिए दस्तक देगी. इस फिल्म के डायरेक्टर नेशनल अवॉर्ड विनर गीतू मोहनदास (Geetu Mohandas) हैं. हालांकि फिल्म की बाकी स्टार कास्ट को लेकर अभी कोई डिटेल सामने नहीं आई है.

इस फिल्म के संबंध में बात करते हुए फिल्म के डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने कहा है कि, मैं हमेशा अपनी नैरेटिव स्टाइल्स के साथ एक्सपेरिमेंट किया है. हालांकि ‘लायर्स डाइस’ और ‘मूथॉन’ को इंटरनेशनल लेवल पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली. यह प्रोजेक्ट इसी विचार से उपजा है. यह फिल्म दो विपरीत दुनियाओं कहानी कहने के एसथेटिक को एक साथ लाने का मिश्रण है.

आपको बताने की यश पिछली बार फिल्म ‘केजीएफ चैप्टर 2’ (K.G.F: Chapter 2) में नजर आए थे, जो साल 2022 में रिलीज हुई थी. सिर्फ 100 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था.

मध्य प्रदेश में बीजेपी क्या खेल कर रही है?

MP Cm

मध्य प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसको लेकर सवाल अभी भी बना हुआ है. जहां एक तरफ कहा जा रहा है कि शिवराज की लाडली बहन योजना इन चुनावों में गेम चेंजर साबित हुई हैं. वहीं दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि सिर्फ मोदी मैजिक के कारण यह जीत मिली है.

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में बीजेपी ने मुख्यमंत्री के रूप में चुनावों के दौरान किसी का नाम प्रस्तावित नहीं किया था, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है की शानदार चुनाव परिणाम में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नीतियों पर मोहर लगाई है. चौहान समेत कई नेताओं ने दावा किया है कि उनकी लाडली बहन योजना गेम चेंजर साबित हुई है.

बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश में 7 सांसदों को चुनाव मैदान में उतारा था, इनमें से पांच ने जीत दर्ज की है. जिनमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी शामिल हैं. ऐसे में अब पार्टी के पास मुख्यमंत्री बनने के लिए पर्याप्त और योग्य उम्मीदवार मौजूद है. ऐसे में शिवराज सिंह चौहान की गाड़ी को चुनौती मिलने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है.

बताया जा रहा है कि चुनावों से पहले ही भाजपा नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान का विकल्प खोजना शुरू कर दिया था. शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश में मिली जीत के बाद खुलकर तो कुछ कह नहीं पा रहे हैं. वह सिर्फ इतना कह रहे हैं कि वह पार्टी के कार्यकर्ता है और पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी वह उसे निभाएंगे. लेकिन चौहान इतनी आसानी से मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने हाथों से जाते हुए देखते रहेंगे बड़ा सवाल यही है.

नतीजे आने के बाद से ही जिस तरह से शिवराज सिंह चौहान लगातार अलग-अलग जगहों के दौरे कर रहे हैं और बयान बाजी कर रहे हैं, उसे निश्चित तौर पर ऐसा लग रहा है कि अंदरूनी तौर पर दबाव वह मुख्यमंत्री पद के लिए बना रहे हैं. लेकिन क्या केंद्रीय नेतृत्व उनकी बात मानेगा?

शिवराज सिंह चौहान ने छिंदवाड़ा पहुंचकर एक बयान दिया है कि वह अपने कार्यकर्ताओं से मिलने आए हैं और लोकसभा 2024 की तैयारी यहीं से शुरू करेंगे. इन सब बयानों से निश्चित तौर पर यह आभास हो रहा है कि वह अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जाए. अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के लिए उनके नाम का ऐलान होता है या फिर कोई नया चेहरा मध्य प्रदेश को मिलता है.

Rajasthan Election Results 2023 : राजस्थान कांग्रेस की हार पर क्या बोले सचिन पायलट?

Rajasthan Election Results 2023

Rajasthan Election Results 2023 : राज्यों के विधानसभा चुनावों में तेलंगाना को छोड़कर कांग्रेस हर राज्य में बीजेपी से हार गई है. हालांकि वोट परसेंट की बात की जाए तो कांग्रेस बीजेपी से कुछ ज्यादा पीछे नहीं है. लेकिन जहां तक सीटों का सवाल है कांग्रेस सरकार बनाने में नाकाम रही है. छत्तीसगढ़ में तथा राजस्थान में वह अपनी सरकार गंवा चुकी है और मध्य प्रदेश में बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने में नाकाम रही है.

राजस्थान में कांग्रेस की हार पर अब सचिन पायलट (Sachin Pilot On Rajasthan Election Results 2023) की प्रतिक्रिया आई है. पायलट ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा है कि हम चुनाव डटकर लड़े हैं लेकिन जनता ने हमें विपक्ष में बिठाया है. हम विपक्ष में रहते हुए भी सरकार को काम करने के लिए मजबूर करेंगे तथा इस हार का मंथन करेंगे.

सचिन पायलट ने कहा है कि प्रदेश की जनता का निर्णय अंतिम है. हमे जो जनता ने जिम्मेदारी विपक्ष की दी है उसे निभाएंगे. दूसरी बार विधायक बनने के बाद सचिन पायलट सोमवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में हुई कार्यकर्ताओं की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे.

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सचिन पायलट ने कहा कि भले ही पार्टी की हार हुई है लेकिन तीनों राज्यों में वोट प्रतिशत बढ़ा है. सबका उद्देश्य था कि सरकार रिपीट करेंगे. अब जब हम बहुमत नहीं ला पाए तो आत्म विश्लेषण करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में हुई हार पर जयपुर तथा दिल्ली में आयोजित संगठन की बैठक में मंथन करेंगे.

लोकसभा चुनाव की तैयारी वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक है ऐसे में हमें वापस जनता के बीच जाना पड़ेगा, जनता की कसौटी पर खरा उतरने के लिए रणनीति बनानी होगी.

अशोक गहलोत के पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा द्वारा चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद लगाए गए आरोपों पर पायलट ने कहा कि आरोप चिंताजनक है. उम्मीद करता हूं कि कांग्रेस आलाकमान इस पर ध्यान देगी.

उन्होंने कहा कि ऐसा स्टेटमेंट देना आश्चर्यजनक है. इसलिए है कि वह निवर्तमान सीएम के ओएसडी है. ऐसे में चिंता का विषय है. इसमें क्या सच है, क्या झूठ है, यह तो देखा जाएगा. लेकिन पूरी उम्मीद है कि पार्टी इस पर कहीं ना कहीं ध्यान देगी. जो बोला है वह चिंता का विषय है.

Election Results 2023: फूंके हुए कारतूसों के दम पर सत्ता में वापसी मुश्किल

Election Results 2023

छत्तीसगढ़, राजस्थान तथा मध्य प्रदेश (Election Results 2023) में बीजेपी ने बड़ी चुनावी जीत दर्ज की है तथा कांग्रेस को बुरी तरह से पटकनी दी है. अगर देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी को एक मजाक में तब्दील करके रख दिया है. इन चुनावी नतीजे में कांग्रेस के लिए संदेश भी छुपे हुए हैं. सवाल यही है कि क्या कांग्रेस के लोग इन नतीजे से मिले संदेश को समझने की कोशिश करेंगे?

तीन राज्यों में चुनावी हार के बाद राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए जनता के जनादेश को स्वीकार किया. उन्होंने लिखा कि हम जनता के जनादेश को विनम्रता पूर्वक स्वीकार करते हैं तथा विचारधारा की लड़ाई निरंतर जारी रहेगी. लेकिन सवाल है की विचारधारा की लड़ाई किस तरह से जारी रहेगी?

कई बुद्धिजीवी तथा कांग्रेस के अंध समर्थक इस जनादेश के बाद ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं तथा इस हार में भी कई पॉजिटिव चीजों और कहानियों को जोड़कर 2024 में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने की कहानियां सुना रहे हैं.

कांग्रेस के कुछ समर्थकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस विधानसभा चुनाव कई राज्यों में जीत गई थी तथा लोकसभा चुनाव हार गई थी, अब 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इन राज्यों में बीजेपी जीत गई है. इसका मतलब है कि 2024 में भाजपा सत्ता से बाहर हो जाएगी.

इसी तरह कांग्रेस के नेता जयराम रमेश तथा कई कांग्रेस के समर्थकों का कहना है कि 2004 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी कई राज्यों में विधानसभा चुनाव जीत गई थी. उसके बाद 2004 का लोकसभा चुनाव हार गई थी. इस वजह से 2024 के लोकसभा चुनाव में मोदी की सरकार जा रही है और मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे.

ऐसी कहानियां और पुरानी बातें याद करके क्या इतिहास को बिना धरातल पर जनता से जुड़े दोहराया जा सकता है?

कांग्रेस तथा तमाम विपक्षी दलों और उनके समर्थकों को यह समझना होगा कि नज़रे चुराने से कुछ नहीं होगा. वास्तविकता को देखना होगा. आंखों पर बंधी हुई पट्टी को खोलना होगा. जमीन जनता तथा जनतंत्र की रूह को समझना होगा. जनता से जुड़ने की नियत पैदा करनी होगी.

राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के जरिए माहौल जरूर तैयार किया था. लेकिन उसे बने नैरेटीव को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में चुनावी जीत में तब्दील कांग्रेस नहीं कर पाई. जिस तरह से इन राज्यों में चुनाव प्रचार चल रहा था और चारों तरफ सोशल मीडिया से लेकर युट्युबर्स तक ने कांग्रेस को अंधेरे में रखा कि वह जीत रही है और इनका दिया गया भरोसा कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हुआ.

इसके अलावा कांग्रेस के दगे हुए कारतूसों के दिए गए भरोसे ने राहुल गांधी की मेहनत पर पानी फेर दिया. मध्य प्रदेश में कमलनाथ और राजस्थान में अशोक गहलोत ने कांग्रेस की लुटिया डूबने में कोई कसर नहीं छोड़ी. जब से कमलनाथ की सरकार गई थी उसी वक्त से कमलनाथ 2023 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए थे. लेकिन नतीजा बता रहे हैं की कमलनाथ ने जनता से जुड़ने की कोशिश नहीं की.

मध्य प्रदेश के चुनावी रिजल्ट बता रहे हैं कि कमलनाथ किसी की सुन नहीं रहे थे. कांग्रेस नेतृत्व द्वारा बनाए गए इंडिया गठबंधन को भी तवज्जो नहीं दे रहे थे. मध्य प्रदेश में चुनावी प्रचार इंडिया गठबंधन के तमाम नेताओं के साथ भोपाल में शुरू होना था, लेकिन कमलनाथ ने इसे होने नहीं दिया.

बागेश्वर बाबा के चरणों में लेटकर कमलनाथ सोच रहे थे कि वह मध्य प्रदेश का चुनाव जीत जाएंगे. लेकिन उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस को एक तरह से खत्म कर दिया है. नई लीडरशिप को मौका नहीं दिया. मध्य प्रदेश में राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के जरिए अच्छा माहौल तैयार किया था लेकिन उसका लाभ भी कांग्रेस को नहीं मिल सका.

इंडिया गठबंधन द्वारा कुछ चैनलों और एंकर्स को बैन कर दिया गया था और उन्ही चैनलों और एंकर्स को कमलनाथ इंटरव्यू देते हुए नजर आए विधानसभा चुनाव प्रचार में. यह एक तरह से कमलनाथ द्वारा कांग्रेस नेतृत्व का मजाक उड़ाना ही कहा जाएगा. कमलनाथ पूरे विधानसभा चुनाव प्रचार में अपनी ही चलाते रहे, किसी की उन्होंने सुनी नहीं. नतीजा सामने है, कमलनाथ का ओवर कॉन्फिडेंस कांग्रेस को ले डूबा.

ठीक इसी तरह राजस्थान में अशोक गहलोत कह रहे थे की कुर्सी उन्हें छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. वह सचिन पायलट को किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाह रहे थे, यह पिछले पांच सालों में देखा गया. लेकिन राज्यपाल को इस्तीफा देते हुए उन्हें बिल्कुल भी शर्म नहीं आई. बीजेपी राजस्थान में बंपर जीत दर्ज करने में कामयाब हो गई और गहलोत को जबरदस्ती कुर्सी से उतरना पड़ा.

सचिन पायलट को लेकर गहलोत का रवैया किसी से छुपा हुआ नहीं है. सोनिया गांधी तक के फैसले के खिलाफ गहलोत ने बगावत कर दी थी और उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ी थी. लेकिन राज्यपाल को इस्तीफा देते हुए खुलकर हंसने और मुस्कुराते हुए नजर आए गहलोत जिसकी काफी आलोचना भी हो रही है और कहा जा रहा है कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया और अब खुशी-खुशी बीजेपी की सरकार स्वीकार करने में उन्हें तकलीफ नहीं हुई.

ठीक इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस बुरी तरह हारी है. छत्तीसगढ़ में किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि बीजेपी की सरकार बनेगी लेकिन बीजेपी ने दमखम के साथ छत्तीसगढ़ में वापसी की है. छत्तीसगढ़ भूपेश बघेल के हाथों में था, वह ओवर कॉन्फिडेंस में थे. गांधी परिवार का करीबी बताने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन उनका ओवर कॉन्फिडेंस ले डूबा और आज छत्तीसगढ़ से भी कांग्रेस सत्ता से बेदखल हो गई.

कांग्रेस को सोचना होगा कि दगे हुए कारतूसों के भरोसे क्या वह 2024 का लोकसभा चुनाव जीत पाएगी या फिर किसी भी राज्य का विधानसभा चुनाव वह दगे हुए कारतूसों के दम पर जीत पाएगी? तेलंगाना में एक युवा और नए चेहरे को कांग्रेस ने कमान दी थी और तेलंगाना में कांग्रेस ने बंपर जीत दर्ज की है.

कमलनाथ, अशोक गहलोत जैसे नेताओं ने युवाओं को आगे आने नहीं दिया. नया नेतृत्व पैदा नहीं हुआ और आज कांग्रेस हिंदी बेल्ट में लगभग साफ होती जा रही है. हिंदी बेल्ट में कांग्रेस के पास जनता को आकर्षित करने वाले और जमीन से जुड़े हुए नेताओं की कमी साफ दिखाई दे रही है और जो पुराने नेता है वह युवाओं को आगे नहीं याद नहीं दे रहे हैं, कांग्रेस नेतृत्व की चलने नहीं दे रहे हैं, सिर्फ अपनी चला रहे हैं.

जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है उन राज्यों से गोदी मीडिया को भर भर के विज्ञापन दिए जाते हैं. लेकिन क्या यह गोदी मीडिया चुनावी माहौल में कांग्रेस को जनता तक पहुंचाने के लिए समय देता है? कांग्रेस की नीतियों का प्रचार करता है? यह बात भी कांग्रेस नेतृत्व को गंभीरता से सोचनी होगी. अगर गोदी मीडिया का बहिष्कार किया ही है तो फिर विज्ञापन के जरिए गोदी मीडिया पर पानी की तरह कांग्रेस की राज्य सरकारें पैसा क्यों बहा रही थी या बहाती हैं?

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान कांग्रेस हार चुकी है लेकिन अभी तक इन राज्यों की कमान जिनके हाथों में थी उन्होंने इस हार की जिम्मेदारी नहीं ली है और अभी तक कोई इस्तीफा भी नहीं हुआ है. इसके क्या मायने हैं? जीत हुई तो उनके नाम पर हुई और हार हुई तो गांधी परिवार जिम्मेदार?

2024 से ठीक पहले कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका है और इस झटके से उबर में कांग्रेस को काफी समय लगेगा. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में अधिक वक्त बचा नहीं है. क्या कोई बड़ा फैसला कांग्रेस लगी ऐसी उम्मीद की जा सकती है?

मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ और बाकी के हिंदी बेल्ट में अगर कांग्रेस द्वारा नया नेतृत्व पैदा नहीं किया गया. जमीन से जुड़े हुए और जनता को आकर्षित करने वाले नेताओं की फौज खड़ी नहीं की गई तो 2024 में भी मोदी को सत्ता में वापसी करने से नहीं रोका जा सकता है, यह बात कांग्रेस जितनी जल्दी समझ जाए उतना ही उनके लिए अच्छा है.

Madhya Pradesh Assembly Election 2023 Result: चुनावी नतीजे के बाद मध्य प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन?

madhya pradesh assembly election 2023

चार राज्यों के चुनावी नतीजे 3 दिसंबर को सामने आ जाएंगे. तमाम राजनीतिक दल अपने-अपने जीत के दावे कर रहे हैं. वहीं पिछले दिनों एग्जिट पोल में देखा गया कि कोई भी तस्वीर साफ नजर नहीं आई. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh Assembly Election 2023 Result) में जहां कांग्रेस कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं वहीं बीजेपी के नेता भी इसको लेकर अपनी बात रख रहे हैं.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कई सवालों के जवाब दिए. आपको बता दें कि कैलाश विजयवर्गीय को भी इस बार बीजेपी नेतृत्व ने चुनाव मैदान में उतारा है हालांकि उनकी टक्कर कांग्रेस के संजय शुक्ला के साथ है और कैलाश विजयवर्गीय भी आज आसानी से जीतते नजर नहीं आ रहा है.

मीडिया ने कैलाश विजयवर्गीय से कई तरह के सवाल किए, जिसमें एक सवाल अहम था कि क्या केंद्रीय नेतृत्व एक बार फिर से शिवराज सिंह चौहान को मौका देगा या फिर उनसे नाराज है?

कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब देते हुए कहा है कि उनका नेतृत्व फैसला करेगा कि मध्य प्रदेश में सरकार बनाने की स्थिति में अगर उनकी पार्टी आती है तो मुख्यमंत्री कौन होगा. उन्होंने कहा कि यहां हर कोई कार्यकर्ता है तथा शिवराज सिंह चौहान से नेतृत्व के नाराजगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है, यह सिर्फ कहानी है नेतृत्व के पास किसी से नाराज होने का समय नहीं है.

आपको बता दें कि तीन दिसंबर को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के भी नतीजे आ जाएंगे. कमलनाथ मध्य प्रदेश में अगली सरकार कांग्रेस की बनने के दावे कर रहे हैं तो वहीं बीजेपी एक बार फिर से सत्ता पर काबिज होने के लिए बेकरार नजर आ रही है.

हालांकि सरकार किसकी बनती है यह तो नतीजे के बाद ही साफ होगा.

Abhisar Sharma को लंबी पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया

Abhisar Sharma

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार तड़के कई पत्रकारों (Abhisar Sharma And Other) के घरों पर छापे मारे. रिपोर्ट के अनुसार यह कार्यवाही न्यूज क्लिक (News Click) से जुड़े पत्रकारों के घर पर हुई. दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा समाचार पोर्टल के खिलाफ सख्त गैर कानूनी गतिविधियां अधिनियम UAPA के तहत एक नया मामला दर्ज किया गया है.

चीन से धन प्राप्त करने के आरोपी के बीच यह दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दायरे में है. 30 से अधिक जगहों पर ऐसी कार्यवाही हुई. पत्रकार अभिसार शर्मा और भाषा सिंह ने अपने-अपने घरों पर दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की पुष्टि की थी.

हाल ही में कई रिपोर्टें आई थी जिसमें यह दावा किया गया था की न्यूज़ पोर्टल को चीन से फंडिंग मिलती है. हालांकि अभी इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन जिस तरह न्यूज़ पोर्टल से जुड़े पत्रकारों के घर पर छापे मारे गए हैं उसको लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें हो रही है. कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं और इसको स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इस कार्रवाई का समर्थन भी कर रहे हैं.

कुछ लोगों का मानना है कि वह आवाज़ें जो अभी भी अपने यूट्यूब चैनलों के माध्यम से या फिर अपने न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से सरकार से सवाल पूछ रही है, जनता से जुड़े हुए मुद्दों पर आवाज उठा रही हैं, उन आवाजों को कहीं ना कहीं दबाने की कोशिश हो रही है. अभिसार शर्मा जैसे पत्रकारों को निशाने पर इसीलिए लिया जा रहा है ताकि इन्हें डराया धमकाया जा सके.

इसके ठीक विपरीत कुछ लोगों का मानना है कि यह पत्रकारिता पर हमला बिल्कुल भी नहीं है. क्योंकि पिछले दिनों विपक्ष के गठबंधन द्वारा कुछ पत्रकारों के बहिष्कार की बात की गई थी उस वक्त अभिसार शर्मा तथा इनके जैसे तमाम पत्रकारों ने उस बहिष्कार का समर्थन किया था श, इसलिए पूछताछ का समर्थन कर रहे हैं लोगों का कहना है कि जब विपक्ष ने बहिष्कार किया उस वक्त वह पत्रकारिता पर हमला नहीं था तो फिर फंडिंग की जांच के लिए पूछताछ हो रही है इसको पत्रकारिता पर हमले से क्यों जोड़ा जा रहा है या फिर लोकतंत्र से क्यों जोड़ा जा रहा है?

हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अगर आरोप लगे हैं तो बिल्कुल जांच होनी चाहिए, पूछताछ होनी चाहिए. लेकिन न्यूज क्लिक के मालिकों से पूछताछ होनी चाहिए ना कि उससे जुड़े हुए पत्रकारों से पूछताछ होनी चाहिए.

वही जिन जिन एंकरों और पत्रकारों को सरकार समर्थक माना जाता है उन एंकरों और पत्रकारों ने अभिसार शर्मा तथा अन्य पत्रकारों से पूछताछ का समर्थन किया है. सोशल मीडिया के जरिए कहीं ना कहीं वह यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि अभिसार शर्मा तथा बाकी लोगों ने चीन से फंडिंग लेकर सरकार का विरोध किया है.

इनका कहना है कि मोदी विरोध तक तो ठीक है लेकिन मोदी का विरोध करते-करते अभिसार शर्मा जैसे पत्रकार देश का विरोध कर रहे हैं? अभी किसी तरह की जांच पूरी हुई नहीं है. पुलिस की तरफ से अभिसार शर्मा तथा बाकी के पत्रकारों को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है. लेकिन सरकार का समर्थन करने वाले एंकर और पत्रकार सरकार के समर्थकों और कार्यकर्ताओं को यह बताने की कोशिश सोशल मीडिया के जरिए कर रहे हैं कि अभिसार शर्मा तथा बाकी लोगों ने चीन से फंडिंग ली है.

लगातार साथ छोड़ रहे हैं Scindia के साथी

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मध्य प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी हैं. इस चुनाव का अहम चेहरा केंद्रीय मंत्री सिंधिया (Scindia) भी होंगे, लेकिन फिलहाल उनके लिए सब कुछ ठीक नहीं दिखाई दे रहा है. बताया जा रहा है कि सिंधिया के लिए यह चुनाव काफी मुश्किल होने वाला है. इसके पीछे की वजह बताई जा रही है उनके सहयोगियों का साथ छोड़कर वापस कांग्रेस में जाना.

समंदर पटेल के बाद पिछले दिनों सिंधिया के सहयोगी प्रमोद टंडन वापस कांग्रेस में शामिल हो गए. प्रमोद टंडन को रामकिशोर शुक्ला और दिनेश मल्हार के साथ इंदौर में पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख कमलनाथ ने औपचारिक रूप से कांग्रेस में फिर से शामिल करवाया.

प्रमोद टंडन तब बीजेपी में शामिल हुए थे जब सिंधिया और उनके करीबी कई कांग्रेस विधायक मार्च 2020 में पार्टी बीजेपी में शामिल हो गए थे. प्रमोद टंडन सिंधिया के काफी करीबी माने जाते हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि वह ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनसे पहले उनके पिता स्वर्गीय माधव राव सिंधिया के कट्टर समर्थक और वफादार थे.

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर दिखाए जाने वाले तमाम सर्वे में कांग्रेस बीजेपी पर बढ़त बनाती हुई नजर आ रही है. ग्वालियर चंबल को लेकर भी जो सर्व आ रहे हैं उसमें कांग्रेस बीजेपी पर भारी नजर आ रही है और यह सिंधिया के लिए किसी झटके से काम नहीं है, क्योंकि सिंधिया भी इसी क्षेत्र से आते हैं और अगर यहां पर विधानसभा चुनाव में बीजेपी हारती है तो यह सिंधिया के लिए बहुत बड़ा झटका होगा.

आज बेंगलुरु में 26 दलों के बैठक में गठबंधन के नाम, नेता और संयोजक के नामों का हो सकता है ऐलान 

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में जारी विपक्ष की दो दिवसीय बैठक का मंगलवार को दूसरा दिन है। इसी बीच संभावनाएं जताई जा रही हैं कि UPA की अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी को विपक्षी मोर्चे का भी प्रमुख बनाया जा सकता है।

खबर है कि सोमवार को इस संभावित गठबंधन के नाम को लेकर भी चर्चाएं हुईं। कुल 26 दल बैठक में शामिल हुए थे।एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी को विपक्षी दलों का प्रमुख बनाया जा सकता है। वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संयोजक की भूमिका में नजर आ सकते हैं।

सोमवार को दलों के नेता रात्रि भोज में शामिल हुए, जहां मंगलवार की बैठक का एजेंडा तय किया गया। दूसरे दौर की बैठक सुबह 11 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक जारी रहेगी।

कहा जा रहा है कि चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने गठबंधन के नाम को लेकर भी मंथन किया। इस दौरान सभी पार्टियों ने सुझाव दिया कि नाम में ‘भारत’ शब्द होना चाहिए। साथ ही न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर भी चर्चा की गई है। खबर है कि मीटिंग में शामिल होने वाले विपक्षी दल सीटों पर साझा उम्मीदवार उतारने की बात पर भी सहमत हो गए हैं। बेंगलुरु के ताज वेस्ट एंड होटल में आयोजित भोज में कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी साथ बैठकर बातचीत करती नजर आईं। खबर है कि दोनों की मुलाकात के चलते विपक्षी दलों की बैठक भी 20 मिनट की देरी से शुरू हुई। खास बात है कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्तों में बीते कुछ समय से तनाव है। इसकी बड़ी वजह पश्चिम बंगाल की राजनीति को माना जाता है। दोनों ही दल एक-दूसरे पर लगातार निशाना साधते रहे हैं।

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के मुख्यमंत्री एवं जनता दल (यू) के शीर्ष नेता नीतीश कुमार, द्रमुक नेता एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे शामिल रहे।साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, आम आदमी पार्टी के नेता एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कुछ अन्य नेता इस बैठक में शामिल हैं। इस बीच, एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता महेश तपासे ने मुंबई में बताया कि पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार मंगलवार को बेंगलुरु में विपक्षी दलों की बैठक का हिस्सा बनेंगे।

 

कर्नाटक में सिद्धारमैया का शपथ ग्रहण आज, डिप्टी CM बनेंगे शिवकुमार, 28 मंत्री ले सकते हैं शपथ, विपक्षी एकता पर नजर

कांग्रेस अब शनिवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डी के शिवकुमार के साथ 28 लोगों को मंत्री पद की शपथ दिलाकर राज्य मंत्रिमंडल के गठन में देरी से बचने के लिए फुर्ती दिखाने की कोशिश कर रही है. मनोनीत मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद शनिवार को शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार को दिल्ली वापस लौटे. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा था कि मंत्रियों के एक समूह के साथ सीएम और डिप्टी सीएम शपथ लेंगे.

कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि सीएम और डिप्टी सीएम के साथ 28 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है. पार्टी अब सरकार गठन में देरी नहीं करना चाहती है. लिस्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है और आलाकमान से इसे मंजूरी दी जाएगी. बाद में शामिल करने के लिए लगभग चार कैबिनेट मंत्री पद खाली रखे जा सकते हैं. कांग्रेस ने गुरुवार को सिद्धरमैया को कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री नामित किया और सीएम पद के प्रबल दावेदार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी. इसके बाद सिद्धरमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया.

सिद्धरमैया और शिवकुमार आज दोपहर साढ़े 12 बजे अपने-अपने पद की शपथ लेंगे. सिद्धरमैया दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. कर्नाटक के चुनाव नतीजों की घोषणा के एक दिन बाद 14 मई को सीएलपी की बैठक हुई थी जिस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नए मुख्यमंत्री का फैसला करने के लिए अधिकृत करते हुए एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित किया गया था. उस दिन आए तीन केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने भी विधायकों की राय ली थी, जिसे उन्होंने खड़गे के साथ साझा किया था. राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को हुए चुनावों में कांग्रेस ने 135 सीट जीतकर शानदार जीत हासिल की. जबकि सत्तारूढ़ भाजपा और पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व वाले जनता दल (सेक्युलर) ने क्रमशः 66 और 19 सीट हासिल की.

 

इससे पहले कांग्रेस ने कई दिनों की मैराथन बैठकों और गहन मंथन के बाद ऐलान किया कि कर्नाटक की सत्ता का ताज सिद्धरमैया के सिर पर सजेगा और प्रदेश पार्टी अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे. कई दिनों तक चली अनिश्चितता पर विराम लगाते हुए पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि शिवकुमार नयी सरकार में एकमात्र उपमुख्यमंत्री होने के साथ अगले लोकसभा चुनाव तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर भी बने रहेंगे. सिद्धरमैया और शिवकुमार को कर्नाटक में कांग्रेस के लिए बड़ी ‘पूंजी’ बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों की जोड़ी का विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

किसके नाम पर तैयार हुआ कांग्रेस आलाकमान?

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कर्नाटक का विधानसभा चुनाव कांग्रेस प्रचंड बहुमत के साथ जीतने में कामयाब हो गई. संघ तथा बीजेपी को इस बात का बिल्कुल भी अनुमान नहीं था कि उनकी कर्नाटक में इतनी बुरी हार होगी. प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों और रोड शो से भी बीजेपी को कर्नाटक में कोई फायदा नहीं मिला और कांग्रेस के सामने बीजेपी को बुरी हार झेलनी पड़ी.

अब कर्नाटक में मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होना है. कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया में से कोई एक कर्नाटक के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाला है. मीडिया में दोनों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. डीके शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष थे और उनके नेतृत्व में कांग्रेस को इतनी बड़ी जीत मिली है, जिसमें तमाम कांग्रेस के नेताओं की मेहनत भी शामिल है.

मीडिया में सूत्रों के हवाले से खबर फैलाई जा रही है कि सीबीआई और ईडी के शिकंजे से बचने के लिए या फिर आगे चलकर कोई विवाद जन्म ना ले कॉन्ग्रेस पार्टी इस चीज से बच रही है और इसी कारण डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री शायद ना बनाया जाए.

हालांकि मीडिया में सूत्रों के हवाले से ढाई ढाई साल के फार्मूले को भी तवज्जो मिल रही है और इसको लेकर कहा जा रहा है कि डीके शिवकुमार का कहना है कि अगर ढाई ढाई साल के फार्मूले पर मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो सबसे पहले उन्हें मौका मिलना चाहिए.

हालांकि इस तरह के कोई भी बयान डीके शिवकुमार या फिर कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से नहीं दिए गए हैं. मीडिया में इन सारी बातों के कयास लगाए जा रहे हैं.

कांग्रेस में हमेशा देखा गया है कि सभी से राय लेकर मुख्यमंत्री पद का फैसला होता है और कर्नाटक को लेकर भी यही हो रहा है. अभी तक डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया की तरफ से किसी भी तरह का ऐसा बयान नहीं आया है, जिससे ऐसा समझा जाए कि किसी भी तरह की गुटबाजी कर्नाटक कांग्रेस के अंदर है.

कर्नाटक के एग्जिट पोल कितने भरोसेमंद? किसकी बन रही है सरकार?

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कर्नाटक में मतदान खत्म हो चुके हैं. मतदान के खत्म होते ही एग्जिट पोल भी आ चुके हैं. कर्नाटक के चुनाव प्रचार में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही कोई कसर नहीं छोड़ी. बीजेपी ने जहां सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के सहारे कर्नाटक का चुनाव जीतने की कोशिश की, वहीं कांग्रेस की तरफ से जनता को गारंटी दी गई.

लेकिन जिस तरह के एग्जिट पोल के नतीजे आए हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस की गारंटी पर भरोसा जताया है. राहुल गांधी ने जिस तरह से भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कर्नाटक में चुनाव प्रचार का आगाज किया था उसका परिणाम अब दिखाई दे रहा है.

224 सीटों वाले कर्नाटक में कांग्रेस को 122 से 140 सीटें मिलती हुई दिखाई दे रही हैं. वहीं बीजेपी को 62 से 80 और जेडीएस को 20 से 25 सीटें मिलती हुई दिखाई दे रही हैं तथा तीन सीटें अन्य के खाते में जाती ही नजर आ रही हैं.

मीडिया में जितने भी एग्जिट पोल दिखाए जा रहे हैं उसमें बीजेपी किसी में भी सरकार बनाती हुई नजर नहीं आ रही है, जबकि अधिकतर एग्जिट पोल में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से कहीं अधिक सीटें पाती ही नजर आ रही है.

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सबसे बड़ी बात यह है कि आज तक न्यूज़ चैनल पर सुधीर चौधरी भी राहुल गांधी की तारीफ करते नजर आ रहे हैं. वह बता रहे हैं कि राहुल गांधी ने इस बार काफी अलग तरह से चुनाव प्रचार किया है, जिसका फायदा कांग्रेस को मिलता हुआ दिखाई दे रहा है.

आपको बता दें कि चुनाव प्रचार जब से कर्नाटक में शुरू हुआ था उसी वक्त से राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि बीजेपी कर्नाटक में पूरी तरीके से फेल साबित हुई है और एंटी इनकंबेंसी का सामना उसे करना पड़ सकता है और एग्जिट पोल में भी ऐसा ही कुछ नजर आ रहा है.

आपको बता दें कि कर्नाटक में 224 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 2,615 उम्मीदवार मैदान में हैं. वोट डालने के लिए 58,545 मतदान केंद्र बनाए गए. कुल 42, 48,028 नए मतदाताओं को चुनाव में वोट देने के लिए अधिकृत किया गया है. राज्य में करीब 5.3 करोड़ मतदाता हैं.

क्या है एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के इस्तीफे के मायने?

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एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला ले लिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे में कई भावनात्मक बातें कहीं हैं. पवार ने कुछ दिनों पहले इसको लेकर इशारा भी किया था.

उनके ऐलान के बाद पार्टी ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है. सभी नेता शरद पवार को मनाने में जुट गए हैं. सवाल यह है कि आखिर शरद पवार ने क्यों इस्तीफे का एलान किया? अब एनसीपी का नया अध्यक्ष कौन होगा? अजित पवार ओं सुप्रिया सुले में कौन मारेगा बाजी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की सियासत में यह बड़ी राजनीतिक घटना है. शरद पवार का नाम महाराष्ट्र में काफी बड़ा है. इसके अलावा वह देश के भी बड़े नेता हैं. ऐसे में उनके एनसीपी अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान करना बड़ा सियासी संदेश भी है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के अंदर उठ रहे विरोध और बार-बार भतीजे अजीत पवार की बगावती बयान बाजी के बीच शरद पवार अपनी ताकत परखना चाहते हैं. वह यह देखना चाहते हैं कि आखिर जिस पार्टी को उन्होंने खड़ा किया, आज उसमें उनके साथ कितने लोग खड़े हैं. इसका असर भी देखने को मिलने लगा है. बड़ी संख्या में एनसीपी के नेता उन्हें मनाने में जुट गए हैं.

एनसीपी पर प्रभुत्व को लेकर पवार के घर में ही लड़ाई चल रही है. एक तरफ शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले हैं तो दूसरी तरफ उनके भतीजे अजीत पवार. ऐसे में पार्टी में पावर को लेकर परिवार में घमासान है. संभव है कि शरद पवार अपने इस फैसले के जरिए परिवार के विवाद को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं.

कौन जीत रहा है कर्नाटक का राजनीतिक रण?

Amit Shah Rahul Gandhi

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अब 2 हफ्ते से भी कम का वक्त बचा हुआ है. इस चुनाव के दो प्रमुख दावेदार भाजपा और कांग्रेस हैं. इन दोनों के सामने इस वक्त चुनौतियां बिल्कुल अलग हैं. दोनों पार्टियों में से किसी की कोई गलती उनके लिए सांप सीढ़ी का खेल बन सकती है. लेकिन जितने भी राजनीतिक सर्वे आ रहे हैं उसमें भाजपा इस लड़ाई में काफी पीछे दिखाई दे रही है और कर्नाटक का रण कांग्रेस आसानी से जीती हुई नजर आ रही है.

लेकिन इन सबके बीच यदि भाजपा या उसके विधायक anti-incumbency का सामना कर रहे हैं तो कांग्रेस ऐसी जमीन पर चल रही है जो पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है. क्योंकि भाजपा से कांग्रेस में आए हुए कई नेता टिकट की जुगाड़ में है और अगर कांग्रेस यह चुनाव आसानी से जीत भी जाती है तो क्या वह अपने विधायकों को अपने पाले में बनाए रख पाएगी, इस की चुनौती भी कांग्रेस के सामने होगी.

कर्नाटक का विधानसभा चुनाव सांप्रदायिक रंग भी ले रहा है. अमित शाह ने एक जनसभा में यह भी कहा कि अगर कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार चुनी जाती है तो राज्य में सांप्रदायिक दंगे होंगे. हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में सांप्रदायिक मुद्दे अपने चरम पर पहुंच गए हैं.

10 मई को होने वाले मतदान यह तय करेगा कि अगले 5 साल तक कर्नाटक में कौन सरकार चलाएगा. लेकिन जहां बीजेपी के नेता अपनी रैलियों में सांप्रदायिक मुद्दों को हवा दे रहे हैं, वहीं कांग्रेस जनता के मुद्दों पर चुनाव लड़ती हुई नजर आ रही है. राहुल गांधी ने कई चुनावी वादे कर्नाटक की जनता से किए हैं. अगर वह काम कर जाते हैं तो राजनीतिक सर्वे के मुताबिक आने वाले दिनों में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बन सकती है.

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कर्नाटक को लेकर अमित शाह द्वारा कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों में कितना दम?

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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, बीजेपी में भगदड़ मची हुई है. बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री तक कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं. बीजेपी के कई नेताओं ने पिछले कुछ दिनों में पार्टी छोड़ी है. पिछले कुछ सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि बीजेपी में किसी राज्य में इस तरह की भगदड़ मची हो.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कर्नाटक में बीजेपी के हाथों से सत्ता जा सकती है और एक बार फिर से कांग्रेस कर्नाटक में सरकार बना सकती है. हालांकि चुनाव के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि आखिर कर्नाटक में कौन किस पर भारी है.

इस बीच कर्नाटक में 40% कमीशन का मुद्दा काफी बड़ा होता जा रहा है. पिछले दिनों कांग्रेस ने इस पर बीजेपी सरकार पर काफी आरोप लगाए हैं और राहुल गांधी ने भी 40% कमीशन को लेकर बीजेपी पर हल्ला बोला है. इस 40% कमीशन को लेकर अब अमित शाह का बयान आया है.

देश के गृह मंत्री और बीजेपी नेता अमित शाह ने एक बयान दिया है. एक मीडिया चैनल से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा है कि बीजेपी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने वाले कर्नाटक बीजेपी के नेता जीत नहीं पाएंगे. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस के करप्शन को छुपाने के लिए 40 फ़ीसदी कमीशन के आरोप लगाए गए हैं.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर अमित शाह ने कहा है कि हम कर्नाटक जीतने जा रहे हैं. पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएंगे. हालांकि इससे पहले बंगाल के विधानसभा चुनाव को लेकर और हरियाणा के विधानसभा चुनाव को लेकर भी अमित शाह ने ऐसा ही दावा किया था. लेकिन बंगाल और हरियाणा में बीजेपी को वह नतीजे नसीब नहीं हुए, जिसकी उसे उम्मीद थी.

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पेड न्यूज पर टली सुनवाई

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मध्य प्रदेश के बीजेपी सरकार में गृह मंत्री और दतिया के विधायक नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पेड न्यूज़ मामले में सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई फिर टल गई है. जिन जजों की बेंच में इस केस की सुनवाई होनी थी उनके उपलब्ध न होने के चलते सुनवाई फिर टल गई है.

अब एक-दो दिन में सुनवाई की नई तारीख तय होगी. इससे पहले बीते बुधवार को इस मामले की सुनवाई होनी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दूसरे देशों की बहस लंबी चलने के कारण सुनवाई टाल दी गई थी.

मामले में भारत निर्वाचन आयोग ने 23 जून 2017 को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 10 ए के तहत 3 साल के लिए नरोत्तम मिश्रा को अयोग्य घोषित किया था. इस फैसले को लेकर नरोत्तम मिश्रा ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अपील की थी उसके बाद शिकायतकर्ता राजेंद्र भारती ने मध्य प्रदेश में राजनीतिक दबाव को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को उठाया था, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने केस को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित करा दिया था.

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 14 जुलाई 2017 को नरोत्तम मिश्रा की अपील को खारिज करते हुए निर्वाचन आयोग को आदेश को यथावत रखा था. बाद में नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच में अपील की थी. इसमें सिंगल बेंच और निर्वाचन आयोग के खिलाफ आदेश पारित किया गया था. हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश के बाद शिकायतकर्ता राजेंद्र भारतीय और भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग अपील दायर की थी.

आपको बता दें कि 2008 के विधानसभा चुनाव में पेड न्यूज़ छपवाने को लेकर राजेंद्र भारती ने 2009 में निर्वाचन आयोग में शिकायत की थी. 8 साल तक निर्वाचन आयोग में सुनवाई चली. आयोग ने एक्सपर्ट कमेटी बनाई. इस कमेटी में 46 खबरों को पेड न्यूज की कैटेगरी में माना. 23 जून 2017 को आरटीआई एक्ट की धारा 10 A में नरोत्तम मिश्रा को 3 साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया था.

दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस के संगठन को लेकर जो बोला है, क्या वह सही है?

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कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सीहोर में एक बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि हमें स्वीकार करने में कभी भी एतराज नहीं है कि हमारी कांग्रेस पार्टी का संगठन जैसा होना चाहिए, वैसा नहीं है. हमारा जो इलेक्शन मैनेजमेंट है पोलिंग के दिन उसमें भी भारी कमी रहती है. उस प्रकार की तैयारी हमारी नहीं रहती जैसी होनी चाहिए.

उन्होंने आगे कहा है कि जनता हमें वोट देना चाहती है, लेकिन हमारे संगठन की कमी की वजह से पूरा नहीं कर पाते हैं. इसलिए कमलनाथ जी ने पूरे प्रदेश की विधानसभा सीटों को सही तरीके से सेक्टर-मंडल में बांटा है. विधानसभा क्षेत्र की हारी हुई सीटों पर प्रदेश भर में दौरा कर रिपोर्ट तैयार कर कमलनाथ को सौंपी जाएगी.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बुधवार को सीहोर में थे. उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस की सरकार बन गई थी, लेकिन कुछ लोग बिक गए. जो गरीब विधायक थे वे नहीं बिके. लेकिन जो राजा महाराजा टाइप के लोग थे वह बिक गए, जिसके कारण सरकार चली गई.

दिग्विजय सिंह ने कहा कि, अगर कांग्रेस पार्टी के सभी लोग एकजुट होते तो किसानों का कर्जा माफ हो जाता, बिजली की दरें भी नहीं बढ़ती. इस बार फिर से जनता परिवर्तन चाहती है. इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार मध्यप्रदेश में बनेगी.

दिग्विजय सिंह ने बताया कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को लगातार पराजय मिल रही है उन विधानसभा क्षेत्रों में जाकर वह स्वयं कार्यकर्ताओं की बात सुन रहे हैं. कांग्रेस के कार्यकर्ता पूरी तरह एकजुट है और चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि मतदान के दिन कांग्रेस इतनी मेहनत नहीं कर पाती जितनी करनी चाहिए. लेकिन इस बार पूरी मेहनत की जाएगी.

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की तैयारियां जोरों पर हैं. कमलनाथ और दिग्विजय दोनों एकजुट होकर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगे हुए हैं और दोनों ही नेता दावे कर रहे हैं कि वह इस बार मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने में कामयाब होंगे. दिग्विजय सिंह ने तो यहां तक कह दिया है कि कमलनाथ ही होंगे कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार.

आपको बता दें कि इससे पहले के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर दिखाई देती थी मध्यप्रदेश में. लेकिन इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जा चुके है और कांग्रेस पूरी तरीके से एकजुट दिखाई दे रही है. कांग्रेस में इस बार गुटबाजी का नामोनिशान मध्यप्रदेश में नहीं दिखाई दे रहा है. इसका लाभ निश्चित तौर पर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिल सकता है.

क्या राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का यह कदम मध्यप्रदेश में बाजी पलट सकता है?

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मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस बड़ी तैयारियों की रूपरेखा तैयार कर रही है. इसी कड़ी में चुनाव से पहले कांग्रेस नए वचनों के साथ जनता के बीच जाएगी. इसका खाका कांग्रेस पार्टी ने तैयार कर लिया है. कमलनाथ के निवास पर हुई वचन पत्र समिति की बैठक में वचन पत्र के बिंदुओं को तय किया गया.

वचन पत्र समिति की एक और आखिरी बैठक के बाद इस ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी जाएगी. कमलनाथ की अब तक की गई घोषणाओं को वचन पत्र में शामिल किया गया है. किसान कर्ज माफी योजना को दोबारा शुरू किया जाएगा. गौरतलब है कि राहुल गांधी भी किसानों की कर्ज माफी की बात करते रहे हैं.

कांग्रेस कर्नाटक चुनाव के बाद मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी का घोषणा पत्र जारी करेगी. मध्य प्रदेश कांग्रेस लॉन्चिंग के लिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को न्योता भेजने की तैयारी में है. आपको बता दें कि वचन पत्र में हर वर्ग को कुछ ना कुछ दिया गया है.

कांग्रेस पार्टी इस बार हर वर्ग को साधने के लिए वचन पत्र तैयार कर रही है. इसमें सभी 230 विधानसभा सीटों को प्रभावित करने वाले बिंदु होंगे. कांग्रेस पुराने वचनों को पूरा करने के साथ ही नए वचन देने की तैयारी में है. लेकिन कांग्रेस के वचन पत्र को लेकर प्रदेश में सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है. बीजेपी ने कांग्रेस के वचन पत्र को छलावा बताया है.

देखना यह भी दिलचस्प होगा कि वचन पत्र लॉन्चिंग कार्यक्रम में जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शिरकत करेंगे उस वक्त पूर्व कांग्रेसी और मौजूदा बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की क्या प्रतिक्रिया रहती है. बता दें कि सिंधिया के कारण ही मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार चली गई थी. सिंधिया राहुल के करीबी नेताओं में गिने जाते थे. ऐसे में राहुल गांधी के लिए भी मध्य प्रदेश जीतना काफी जरूरी होगा और यह प्रदेश उनकी प्राथमिकताओं में भी शामिल होगा.

‘जो चप्पल उठाने की औकात नहीं रखते थे, वे आज…’ यह क्या बोल गए वरुण गांधी?

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पीलीभीत से बीजेपी के सांसद वरुण गांधी ने राजनीति में भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए सोमवार को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जो हमारे चप्पल उठाने की औकात नहीं रखते थे वे आज 5-5 गाड़ियों के काफिले में चल रहे हैं. वरुण ने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र पीलीभीत के ललौरीखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में हुए जनसंवाद कार्यक्रम में राजनीति में भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करते हुए किसी का नाम लिए बगैर जबरदस्त हमला बोला.

उन्होंने कहा कि, जो हमारे चप्पल उठाने की औकात नहीं रखते थे वह आज 5-5 गाड़ियों के काफिले में चल रहे हैं, है कि नहीं?

वरुण गांधी ने कहा कि जो लोग चुनाव के पहले और उसके बाद कालोनियां बनाते थे, वह अब पांच पांच गाड़ियों के काफिले में चल रहे हैं. वरुण का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इसके तरह-तरह के अर्थ निकाले जा रहे हैं.

बीजेपी सांसद ने भ्रष्टाचार को लेकर अपनी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि आज आप जब थाने जाते हैं तो रिश्वत देनी पड़ती है. पेंशन, कमरा, आवास लेने के लिए पैसे देने पड़ते हैं. यह जो पाप है, यह जो भ्रष्टाचार का समय चल रहा है, आपको क्या लगता है कि यह आपकी गलतियों की वजह से नहीं हो रहा है?

वरुण गांधी ने कहा है कि जब भी चुनाव आता है तो लोग जाति-धर्म के आधार पर वोट देते हैं. लोग यह नहीं सोचते कि किसी अच्छे इंसान को जिताए. लोग यह नहीं सोचते कि कट्टर इमानदार को जिताएं. लोग यह सोचते हैं कि यह प्रत्याशी सहधर्मी है, इसलिए इसके साथ चले जाओ.

आपको बता दें कि वरुण गांधी पिछले कुछ सालों से अपनी ही बीजेपी की केंद्र सरकार तथा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हमलावर दिखाई दिए हैं. अलग-अलग मुद्दों पर वह अपनी ही सरकार के खिलाफ हल्ला बोल करते हुए नजर आए हैं. हालांकि अभी भी वह बीजेपी में बने हुए हैं और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से उनके ऊपर कोई एक्शन नहीं लिया गया है.

आपको बता दें कि पिछले दिनों चर्चा थी कि वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. मीडिया में यह भी खबरें थी कि प्रियंका गांधी का इसमें अहम रोल हो सकता है, लेकिन मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने साफ कर दिया था कि वरुण गांधी की विचारधारा अलग है और इसके साथ ही यह मान लिया गया था कि राहुल ने वरुण गांधी के कांग्रेस में आने वाले रास्ते को बंद कर दिया है. हालांकि राजनीति में सब कुछ संभव है. वरुण आने वाले कुछ सालों में किस पार्टी में होंगे, अभी से कहना जल्दबाजी होगी.

भारत जोड़ो यात्रा के नतीजे को लेकर जयराम रमेश का बड़ा बयान !

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत जोड़ो यात्रा विपक्ष की एकता के लिए नहीं निकाली गई है, लेकिन विपक्षी एकता इस यात्रा के नतीजे के रूप में सामने आ सकती है.

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान शामली के ऊंचागांव में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में रमेश ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) द्वारा यात्रा को समर्थन दिए जाने से जुड़े सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा विपक्ष की एकता के लिए नहीं निकाली गई है, मगर विपक्ष की एकता इस यात्रा का एक नतीजा हो सकती है. रमेश ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस मजबूत होती है तो विपक्ष की एकता भी मजबूत होगी. एक कमजोर कांग्रेस विपक्ष की एकता को मजबूत नहीं कर सकती. ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से कांग्रेस मजबूत होगी और अगर कांग्रेस मजबूत है तो विपक्ष की एकता भी मजबूत होगी.

उन्होंने कहा कि बुधवार को रालोद के कई कार्यकर्ता बागपत में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में शामिल हुए. सपा और बसपा के नेताओं से भी शुभकामनाएं मिलीं. वह राहुल गांधी के साथ चल नहीं पाए. किन कारणों से, मैं नहीं जानता, मगर यह कहना कि इस यात्रा को विपक्ष का समर्थन नहीं मिला, यह बिल्कुल गलत है. इस यात्रा के प्रति और भी बहुत से लोगों ने समर्थन जताया है, जो साथ चल नहीं पाए.

‘भारत के टुकड़े करने वालों’ द्वारा ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाले जाने के भाजपा नेताओं के आरोप पर रमेश ने कहा कि हमने तो पाकिस्तान के टुकड़े-टुकड़े किए हैं, हिंदुस्तान के नहीं. जो भारत के टुकड़े कर रहे हैं, वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोग हैं. ये लोग भाषा के नाम पर, प्रांत के नाम पर, जाति और धर्म के नाम पर नफरत फैला रहे हैं, समाज को बांट रहे हैं. कांग्रेस ऐसा नहीं करती.

क्या ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के जरिये कांग्रेस को अगले लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा का साथ मिल सकता है, इस सवाल पर रमेश ने कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव की जो तैयारी करनी है, वह अभी शुरू नहीं हुई है. विपक्ष से जो बातचीत होनी चाहिए एक सकारात्मक कार्यक्रम बनाने की दिशा में, उसकी अभी शुरुआत नहीं हुई है. उससे पहले 2023 में नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं. इसके बाद ही 2024 में क्या होगा, उस पर सोच विचार होगा.

हम आगे बढ़ेंगे और एक मजबूत विपक्ष बनाएंगे:
हालांकि, कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कह सकता हूं कि हमें विपक्षी पार्टियों से जो समर्थन मिला है, वह अच्छा और सकारात्मक संकेत है. मुझे यकीन है कि इसी भावना के साथ हम आगे बढ़ेंगे और एक मजबूत विपक्ष बनाएंगे.उन्होंने स्पष्ट किया, ‘सिर्फ मोदी विरोधी मंच बनाने से काम नहीं चलेगा. हमें जनता के सामने एक सकारात्मक साझा कार्यक्रम देना होगा कृषि के क्षेत्र में, उद्योग के क्षेत्र में, संविधान को और मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के संदर्भ में, अभी बहुत कुछ काम करना बाकी है।

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