मध्य प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी हैं. इस चुनाव का अहम चेहरा केंद्रीय मंत्री सिंधिया (Scindia) भी होंगे, लेकिन फिलहाल उनके लिए सब कुछ ठीक नहीं दिखाई दे रहा है. बताया जा रहा है कि सिंधिया के लिए यह चुनाव काफी मुश्किल होने वाला है. इसके पीछे की वजह बताई जा रही है उनके सहयोगियों का साथ छोड़कर वापस कांग्रेस में जाना.
समंदर पटेल के बाद पिछले दिनों सिंधिया के सहयोगी प्रमोद टंडन वापस कांग्रेस में शामिल हो गए. प्रमोद टंडन को रामकिशोर शुक्ला और दिनेश मल्हार के साथ इंदौर में पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख कमलनाथ ने औपचारिक रूप से कांग्रेस में फिर से शामिल करवाया.
प्रमोद टंडन तब बीजेपी में शामिल हुए थे जब सिंधिया और उनके करीबी कई कांग्रेस विधायक मार्च 2020 में पार्टी बीजेपी में शामिल हो गए थे. प्रमोद टंडन सिंधिया के काफी करीबी माने जाते हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि वह ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनसे पहले उनके पिता स्वर्गीय माधव राव सिंधिया के कट्टर समर्थक और वफादार थे.
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर दिखाए जाने वाले तमाम सर्वे में कांग्रेस बीजेपी पर बढ़त बनाती हुई नजर आ रही है. ग्वालियर चंबल को लेकर भी जो सर्व आ रहे हैं उसमें कांग्रेस बीजेपी पर भारी नजर आ रही है और यह सिंधिया के लिए किसी झटके से काम नहीं है, क्योंकि सिंधिया भी इसी क्षेत्र से आते हैं और अगर यहां पर विधानसभा चुनाव में बीजेपी हारती है तो यह सिंधिया के लिए बहुत बड़ा झटका होगा.


































































