
मध्यप्रदेश में नगरपालिका अध्यक्ष महापौर को लेकर चुनाव मार्च 2020 में होना है उससे पहले प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने वहां के चुनाव में नियमों में संशोधन किया है 20 साल से चली आ रही पुरानी नियमों को संशोधित करते हुए फिर एक बार 20 साल पहले जैसा नियम लागू कर दिया गया है जिसमें जनता प्रत्यक्ष रूप से अध्यक्ष और महापौर का चुनाव नहीं कर सकेगी
प्रदेश में अब नगर पालिका अध्यक्ष एवं महापौर के प्रत्यक्ष रूप से चुनाव नहीं होंगे। नगरीय निकाय चुनावों में इन पदों के लिए कोई प्रत्याशी नहीं होगा। 20 साल से जनता सीधे वोट देकर अपने नगर पालिका अध्यक्ष एवं महापौर का चुनाव कर रही थी मगर अब ऐसा नही होगा । कमलनाथ कैबिनेट ने तय किया है कि 20 साल पहले जैसा होता था वही फिर से किया जाएगा। जनता पार्षदों को चुनेगी और पार्षद महापौर या अध्यक्ष को। फिलहाल प्रदेश के नगरीय निकायों में आम चुनाव के जरिए जनता वोट कर महापौर या अध्यक्ष को चुनती है।
नई व्यवस्था लागू करने के लिए मध्यप्रदेश नगर पालिक अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। प्रदेश में अगले साल मार्च के महीने में निकायों के चुनाव संभावित है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर का चुनाव कराए जाने के पीछे अपना राजनीतिक लाभ देख रही है।
20 साल पहले तय हुआ था कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से नगर पालिका अध्यक्ष या महापौर का चुनाव होना गलत है। उन दिनों दलील यह भी दी गई थी कि प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं देश के प्रधानमंत्री का चुनाव में सीधे जनता द्वारा प्रत्यक्ष प्रणाली से किया जाना चाहिए।
कमलनाथ सरकार के द्वारा इस नियम के संशोधन के बाद से इसका समर्थन विरोध दोनों हो रहा है। समर्थन पक्ष वाले कई लोग यह दलील दे रहे हैं कि महापौर और उस जगह के पार्षदों में मतभेद होने के कारण कई बार विकास कार्य में अवरोध होता था तो वहीं इस संशोधन का विरोध करने वाले यह दलील दे रहे हैं कि इससे फिर एक बार पार्षदों का खरीद-फरोख्त बढ़ जाएगा।

































































