राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग के खौफ में कांग्रेस, ‘पाठशाला’ के बाद अब विधायकों को मिलेगी ‘ट्रेनिंग’

भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए होने वाली चुनावी जंग बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। अपनी एकमात्र सीट को सुरक्षित रखने के लिए कांग्रेस फूंक-फूंककर कदम रख रही है। किसी भी तरह के सियासी उलटफेर या क्रॉस वोटिंग के डर से निपटने के लिए कांग्रेस ने शनिवार शाम भोपाल के ‘इंदिरा भवन’ में विधायक दल की एक बेहद अहम बैठक बुलाई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक का इकलौता एजेंडा विधायकों को एकजुट रखना और हर एक वोट को सुरक्षित करना है। कांग्रेस कार्यालय में आयोजित की गई बैठक में मप्र कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ ही पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन भी शामिल हुईं।

कांग्रेस नेतृत्व इस बार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। पार्टी की रणनीति दो मुख्य बिंदुओं पर टिकी है:

तकनीकी बारीकियों की ट्रेनिंग – बैठक में विधायकों को वोटिंग के नियम और बैलेट पेपर को सही तरीके से भरने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि मानवीय भूल के कारण कोई भी वोट रिजेक्ट (अमान्य) न हो।
व्हिप का डंडा – सभी विधायकों को पार्टी लाइन पर रहने और व्हिप का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी जाएगी।

मध्य प्रदेश राज्यसभा का सियासी समीकरण
कागजी तौर पर मुकाबला भले ही सीधा नजर आ रहा हो, लेकिन आंकड़ों का गणित कांग्रेस की धड़कनें बढ़ाने के लिए काफी है। आइए समझते हैं कि विधानसभा में सीटों की क्या स्थिति है:
जीत के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा – राज्यसभा की एक सीट के लिए 58 वोट की आवश्यकता है।
कांग्रेस की मौजूदा ताकत – विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास 66 विधायक थे। लेकिन मुकेश मल्होत्रा और राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद यह संख्या घटकर 64 रह गई है।

निर्मला सप्रे का पेच – बीना से कांग्रेस के टिकट पर जीतीं निर्मला सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, लेकिन यह मामला अभी कोर्ट में है। कानूनी दांवपेच के बीच सप्रे ने कोर्ट में खुद को कांग्रेसी ही बताया है। ऐसे में तकनीकी रूप से उन पर कांग्रेस का व्हिप लागू होगा, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।

मैदान में उतरे दिग्गज- किसके बीच है मुकाबला?
3 सीटों के लिए हो रहे इस सियासी दंगल में दोनों ही पार्टियों ने अपने मजबूत चेहरों को दांव पर लगाया है:
कांग्रेस – राहुल गांधी की करीबी और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है।
भाजपा – पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है।

सियासी हकीकत – आंकड़ों के लिहाज से भाजपा के पास अपनी सीटें आसानी से निकालने के लिए पर्याप्त बहुमत मौजूद है। वहीं कांग्रेस के पास 64 विधायकों का संख्या बल तो है, लेकिन अंदरूनी कलह और क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते पार्टी के लिए अपनी इस इकलौती सीट को बचाना एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है।

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